AAP ने 7 सांसदों के BJP में शामिल होने के बाद उपराष्ट्रपति को याचिका भेजी। संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत सदस्यता खत्म करने की मांग, कोर्ट जाने के संकेत।
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) के सात राज्यसभा सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। पार्टी ने इस घटनाक्रम को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति को याचिका भेजकर संबंधित सांसदों की सदस्यता समाप्त करने की मांग की है।
दसवीं अनुसूची के तहत कार्रवाई की मांग
AAP सांसद संजय सिंह ने कहा कि सभी कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेने के बाद यह याचिका दायर की गई है। उन्होंने बताया कि वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की राय भी ली गई है। याचिका में संविधान की दसवीं अनुसूची (Anti-Defection Law) का हवाला देते हुए सातों सांसदों की सदस्यता समाप्त करने का अनुरोध किया गया है।
संजय सिंह ने कहा कि मामले की जल्द सुनवाई होनी चाहिए और निष्पक्ष निर्णय लिया जाना जरूरी है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर पार्टी इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएगी।
किन सांसदों का नाम शामिल
AAP छोड़कर BJP में शामिल होने वाले सांसदों में राघव चड्ढा, स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, विक्रम साहनी और राजिंदर गुप्ता शामिल बताए जा रहे हैं।
विलय का दावा और संवैधानिक आधार
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि राज्यसभा में AAP के दो-तिहाई से अधिक सांसदों ने संवैधानिक प्रावधानों के तहत BJP में विलय किया है। उन्होंने बताया कि सात सांसदों ने इस संबंध में दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर उसे सभापति को सौंप दिया है।
बढ़ सकता है कानूनी और राजनीतिक विवाद
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यह मामला आने वाले दिनों में कानूनी और संवैधानिक बहस का केंद्र बन सकता है। Anti-Defection Law की व्याख्या, दो-तिहाई बहुमत के आधार पर विलय की वैधता और सभापति के अधिकार जैसे मुद्दे अहम रहेंगे।
इस पूरे घटनाक्रम ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है, जहां एक ओर दल-बदल कानून की सीमाएं चर्चा में हैं, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दलों की रणनीति भी सवालों के घेरे में है।