तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने ज्योतिषी राधन पंडित को OSD पद से नियुक्ति के 24 घंटे के भीतर हटा दिया। विपक्ष और सहयोगी दलों के विरोध के बाद यह फैसला चर्चा में आ गया है।
तमिलनाडु की राजनीति में मुख्यमंत्री Vijay का एक फैसला अचानक चर्चा के केंद्र में आ गया है। फ्लोर टेस्ट पास करने के कुछ ही घंटों बाद विजय ने ज्योतिषी राधन पंडित को स्पेशल ड्यूटी ऑफिसर (OSD) नियुक्त किया था, लेकिन बढ़ते राजनीतिक विरोध के बीच 24 घंटे के अंदर ही यह फैसला वापस लेना पड़ा। इस घटनाक्रम ने नई सरकार की कार्यशैली और राजनीति में ज्योतिष की भूमिका को लेकर बहस छेड़ दी है। खास बात यह रही कि राधन पंडित लंबे समय से विजय के करीबी माने जाते हैं और उन्होंने अभिनेता से नेता बने विजय के मुख्यमंत्री बनने की भविष्यवाणी भी की थी।
विपक्ष और सहयोगी दलों ने क्यों उठाए सवाल?
दरअसल, राधन पंडित की नियुक्ति सामने आते ही विपक्ष के साथ-साथ सहयोगी दलों ने भी सवाल उठाने शुरू कर दिए। TVK की सहयोगी पार्टी MJK के प्रमुख थमीमुन अंसारी ने विधानसभा में कहा कि व्यक्तिगत स्तर पर ज्योतिष में विश्वास अलग बात है, लेकिन सरकारी व्यवस्था में इसे शामिल करना सही नहीं माना जा सकता।
वहीं Premalatha Vijayakanth ने भी मुख्यमंत्री के OSD पद पर एक ज्योतिषी की नियुक्ति को निंदनीय बताया। दूसरी तरफ TKS Elangovan ने तंज कसते हुए कहा कि अगर फैसले ज्योतिषीय समय और मुहूर्त से तय होंगे, तो फिर विधानसभा की भूमिका क्या रह जाएगी।
कौन हैं राधन पंडित?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राधन पंडित और विजय करीब दो दशक से एक-दूसरे के संपर्क में हैं। राधन सिर्फ ज्योतिषी ही नहीं, बल्कि TVK के प्रवक्ता की भूमिका भी निभा चुके हैं। बताया जा रहा है कि विजय के शपथ ग्रहण समारोह का समय भी उनकी सलाह पर बदला गया था। 4 मई को विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद सबसे पहले विजय से मिलने वालों में भी राधन शामिल थे। हालांकि, राजनीतिक विवाद बढ़ने के बाद सरकार ने दूरी बनाना ही बेहतर समझा।
विजय की कुंडली को बताया था ‘सुनामी’
चुनाव प्रचार के दौरान राधन पंडित कई बार सार्वजनिक मंचों और ऑनलाइन वीडियो में विजय की कुंडली का जिक्र कर चुके थे। उन्होंने विजय की राजनीतिक संभावनाओं को “सुनामी जैसा प्रभाव” वाला बताया था। राधन का दावा था कि TVK का नाम भी अंक ज्योतिष और ग्रह-नक्षत्रों के हिसाब से विजय की कुंडली के अनुरूप रखा गया है। यही नहीं, वे तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री J. Jayalalithaa के आध्यात्मिक मार्गदर्शक भी रह चुके हैं। करीब 40 वर्षों से ज्योतिष के क्षेत्र में सक्रिय राधन पंडित तमिलनाडु के राजनीतिक और फिल्मी गलियारों में एक चर्चित नाम माने जाते हैं।
फैसले से क्या संदेश गया?
हालांकि सरकार की ओर से नियुक्ति वापस लेने पर विस्तृत बयान सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक जानकार इसे “डैमेज कंट्रोल” के तौर पर देख रहे हैं। नई सरकार बनने के तुरंत बाद ऐसा विवाद खड़ा होना विजय के लिए असहज स्थिति माना जा रहा है। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि लोकतांत्रिक राजनीति और प्रशासनिक निर्णयों में व्यक्तिगत आस्था की सीमा कहां तक होनी चाहिए। वहीं विजय सरकार के शुरुआती फैसलों पर अब विपक्ष की नजर और भी तेज हो गई है।