रणबीर कपूर और यश स्टारर ' रामायण' को लेकर मेकर्स ने ऐसा ग्लोबल रिलीज प्लान तैयार किया है। यह भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी थिएट्रिकल रिलीज में बदल सकता है। जानिए मेकर्स का प्लान क्या है।
मुंबई। बॉलीवुड से साथ टॉलीवुड स्टार को लेकर 4000 करोड़ के बड़े बजट वाली 'रामायण' सिर्फ एक फिल्म की तरह रिलीज होने की तैयारी नहीं कर रही है। वह एक ऐसी तैयारी में है जो इंडियन सिनेमा की सबसे बड़ी ग्लोबल थिएट्रिकल लॉन्चिंग में बदल सकती है। इसके लिए मेकर्स प्रयास में करने में लगे हुए हैं। फिल्म में रणबीर कपूर (राम के पात्र), साई पल्लवी (सीता के रोल) में हैं। वहीं, यश रावण के किरदार में नजर आएंगे। नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही इस फिल्म को दो हिस्सों में रिलीज किया गया है। पार्ट वन की रिलीज इस साल दीवाली के आसपास तय है।
बता दें कि फिल्म की सबसे बड़ी रणनीति इसका असाधारण स्क्रीन प्लान है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इंटरनेशनल डिस्ट्रीब्यूटर सोनी पिक्चर्स भारत के बाहर 50 हजार से ज्यादा स्क्रीन तक फिल्म पहुंचाने की तैयारी कर रहा है। भारत में करीब 9 हजार स्क्रीन्स का अनुमान जोड़ा जाए तो कुल संख्या 59000 से ऊपर जा सकती है। अगर यह योजना इसी स्तर पर लागू होती है तो 'रामायण' की ग्लोबल थिएट्रिकल पहुंच भारतीय फिल्मों के लिए नया पैमाना बना सकती है।
मेकर्स का प्लान जमीन पर उतरते ही क्या बदलेगा
अगर रिपोर्ट किया गया स्क्रीन प्लान जमीन पर उतरता है तो 'रामायण' की रिलीज कई बड़ी भारतीय फिल्मों से काफी आगे निकल सकती है। रिपोर्ट में 'पुष्पा 2' की करीब 12 से 13 हजार स्क्रीन्स और RRR की करीब 10 से 11 हजार स्क्रीन्स वाली ग्लोबल रिलीज से इसकी तुलना की गई है। इसी वजह से रामायण का प्रस्तावित स्क्रीन स्केल चर्चा का सबसे बड़ा कारण बन गया है।
हालांकि यहां एक जरूरी फर्क समझना होगा। 59 हजार से ज्यादा स्क्रीन्स अभी फिल्म की रिलीज के बाद सामने आया अंतिम आंकड़ा नहीं है। यह रिपोर्ट किया गया रिलीज प्लान है। वास्तविक स्क्रीन संख्या अलग-अलग देशों में स्थानीय थिएटर नेटवर्क और अंतिम डिस्ट्रीब्यूशन व्यवस्था पर निर्भर करेगी। इसलिए अभी संभावित ग्लोबल रिलीज स्केल के तौर पर देखना ज्यादा सही है।
मेकर्स ने बदला कमाई का गणित
फिल्म का बजट करीब 4000 करोड़ रुपये बताया गया है।इतनी बड़ी लागत वालीफिल्म के सामने सबसे बड़ी व्यावसायिक चुनौती सिर्फ भारत में बड़ी ओपनिंग हासिल करना सही नहीं है। इसे लंबे समय तक और ज्यादा बाजारों में दर्शकों तक पहुंचाना भी जरूरी है। यही वजह है कि रामायण की रणनीति एक बड़े भारतीय बाजार के बजाय ग्लोबल थिएट्रिकल पहुंच पर टिकी दिखाई देती है। फिल्म के निर्माता नमित मल्होत्रा पहले ही इसे अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक ले जाने की महत्वकांक्षा जाहिर कर चुके हैं। सोनी पिक्चर्स का इंटरनेशनल डिस्ट्रीब्यूशन संभालना इसी रणनीति का हिस्सा है। फिल्म को IMAX जैसे प्रीमियम फॉर्मेट में भी रिलीज करने की तैयारी है। 'रामायण' को IMAX के लिए शूट किए जाने की बात भी सामने आई है।
भाषा की दीवार तोड़ने के लिए AI का सहारा
ग्लोबल रिलीज की सबसे बड़ी व्यावहारिक चुनौती भाषा की होती है। 'रामायण' के मेकर्स इसका समाधान भी तकनीक के जरिए तलाश रहे हैं। फिल्म में DNEG की ब्रह्मा AI तकनीक का इस्तेमाल अलग-अलग भाषाओं में लिप-सिंक के लिए किया जा रहा है। इसका मकसद यह है कि डबिंग के बावजूद कलाकारों के चेहरे भाव और होठों की हरकतें नई भाषा के संवाद के साथ ज्यादा स्वाभाविक दिखें। फिल्म को करीब 50 भाषाओ में पहुंचाने की योजना इसी सोच का हिस्सा है। ब्रह्मा AI को लेकर prime Focus की ऑफिशियल जानकारी भी इसे हाईज-फिडेलिटी मल्टीलिंगुअल डिजिटल कंटेंट से जुड़ी तकनीक के तौर पर पेश करती है।
'अवतार' से तुलना ने बढ़ाई चर्चा
रिपोर्ट की गई रिलीज रणनीति की तुलना जेम्स कैमरून की अवतार-द वे ऑफ वाटर से भी की जा रही है। बड़े पैमाने पर ग्लोबल स्क्रीन नेटवर्क इसकी बड़ी वजह है। 'रामायण' के प्रस्तावित 59 हजार से ज्यादा स्क्रीन्स का आंकड़ा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि फिल्म की योजना सिर्फ भारतीय दर्शकों पर निर्भर रहने की नहीं है। मेकर्स जिस तरह स्क्रीन संख्या, प्रीमियम फॉर्मेट और मल्टीलिंगुअल तकनीक को एक साथ जोड़ रहे हैं। उससे फिल्म को एक ऐसे ग्लोबल प्रोडक्ट के रूप में पेश करने की कोशिश दिखती है। इसे अलग-अलग देशों के दर्शक, स्थानीय भाषा के करीब अनुभव कर सकें। यही रणनीति 'रामायण' को सामान्य भारतीय रिलीज से अलग बनाती है।
मेकर्स की रणनीति वसूल पाएगी लागत
बड़ी रिलीज अपने आप बड़ी कमाई की गारंटी नहीं देती। हजारों स्क्रीन्स तक पहुंच बनाने के बाद भी टिकट बिक्री दर्शकों की मांग और हर बाजार में फिल्म के प्रदर्शन पर निर्भर करेगी।लेकिन मेकर्स ने जोखिम को सिर्फ एक या दो बड़े बाजारों तक सीमित रखने के बजाय ज्यादा से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंच बनाने की कोशिश की है। 'रामायण' की पूरी रणनीति इसी विस्तार पर आधारित है। बड़ा बजट। अंतरराष्ट्रीय डिस्ट्रीब्यूशन। IMAX जैसे प्रीमियम फॉर्मेट। करीब 50 भाषाओं तक पहुंच और AI आधारित लिप-सिंक। इन सभी को एक साथ रखकर देखा जाए तो साफ है कि फिल्म की सबसे बड़ी बाजी सिर्फ कहानी या स्टारकास्ट पर नहीं है। असली दांव इसे दुनिया के ज्यादा से ज्यादा सिनेमाघरों और भाषाई बाजारों तक एक साथ पहुंचाने का है।