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Azeem Sheikh Interview Hanuman Ansh Govind Role

Hanuman Ansh Movie: कद कितना भी ऊंचा क्यों न हो, पैर हमेशा जमीन पर रहने चाहिए: अजीम शेख

बॉलीवुड की फिल्म हनुमान अंश में हेड कांस्टेबल गोविंद बने झांसी के अजीम शेख ने स्वदेश से बातचीत में संघर्ष, सफलता और नवोदित कलाकारों को लेकर खुलकर बात की।


hanuman ansh movie कद कितना भी ऊंचा क्यों न हो पैर हमेशा जमीन पर रहने चाहिए अजीम शेख

Hanuman Ansh Movie Actor Interview |

प्रमोद पचौरी, झांसी। बॉलीवुड की फिल्म 'हनुमान अंश' की अपार सफलता ने कामयाबी की एक और नई इबारत लिख दी। तमाम मिथकों को झुठलाते हुए फिल्म के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने दिखाया कि विषयवस्तु अच्छी हो तो उसे देखा व पसंद किया जाता है। फिर इसके लिए बड़े बजट की आवश्यकता नहीं होती।

लगभग 2 करोड़ की लागत से बनी फिल्म हनुमान अंश ने कुछ ही दिनों में 400 करोड़ की कमाई कर ली है। सिनेमाघरों में जुट रही दर्शकों की भीड़ बताती है कि कमाई का यह आंकड़ा अभी कई और रिकॉर्ड बनाएगा।

हेड कांस्टेबल गोविंद की भूमिका में छाए अजीम शेख

फिल्म हनुमान अंश में अज़ीम शेख ने कानून और मानवता के बीच संतुलन बनाने वाले एक ईमानदार पुलिसकर्मी, हेड कांस्टेबल गोविंद की भूमिका निभाई है। उनका यह किरदार फिल्म की आस्था, आध्यात्मिकता और भावनात्मक ताने-बाने को आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम करता है। उन्होंने इस भूमिका को पूरी प्रामाणिकता और शालीनता के साथ पर्दे पर जिया है। 

नीम करौरी बाबा पर केंद्रित है फिल्म

फिल्म नीम करौरी बाबा पर केंद्रित है और इसके सभी पात्र बाबा के इर्द-गिर्द घूमते नजर आते हैं। फिल्म में गोविंदा की भूमिका निभाने वाले झांसी के अजीम शेख ने दमदार अभिनय से अपनी कलाकारी का लोहा मनवाया है। फिल्म में वह लगभग 3 मिनट 30 सैकेंड दिखते हैं, लेकिन इस छोटी सी भूमिका में ही वह दर्शकों से खूब तालियां बटोरते हैं। 

कड़ी मेहनत को सफलता का श्रेय

अजीम शेख हर सफलता का श्रेय अपनी कड़ी मेहनत को देते हैं, लेकिन कभी भी उसका अहंकार अपने व्यवहार में नहीं आने देते। अजीम का मानना है कि कद कितना भी ऊंचा क्यों न हो, पैर हमेशा जमीन पर टिके होने चाहिए। फिल्म अनकही के सेट पर जाते समय अजीम शेख स्वदेश कार्यालय आए। इस बीच आपने स्वदेश से बातचीत में हनुमान अंश के कई पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।

बातचीत के प्रमुख अंश

प्रश्न : केवल तीन मिनट, 30 सेकेंड और इतना बड़ा कमाल?

देखिए, हनुमान अंश में गोविन्द का करेक्टर जब मुझे मिला तो निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने मुझसे एक ही बात कही थी- डूबकर करना है। तीन मिनट और तीस सैकेंड में मैंने अपने अंदर का सब कुछ दर्शकों के समक्ष रख दिया। फिल्म हिट हो गई मेरे लिए सबसे सुखद अनुभूति यही है कि मुझे दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है।

प्रश्न : बॉक्स ऑफिस पर हनुमान अंश की अप्रत्याशित सफलता ने कई मिथकों को तोड़ा, साथ ही यह सन्देश भी दिया है कि छोटे बजट में भी कुछ अच्छा किया जा सकता है?

कलाकार ने कहा कि निश्चित रूप से आप सही कह रहे हैं। फिल्म निर्देशक विशाल चतुर्वेदी की दूरदर्शिता, उनकी सोच और काम लेने की क्षमता का ही कमाल है कि सिनेमाघरों में भीड़ जुट रही है।

झांसी से मुंबई तक 18 साल का संघर्ष

प्रश्न : आप झाँसी जैसे छोटे से शहर से मुंबई पहुंचे। आपका 18 साल का संघर्ष क्या अब रंग लाने लगा है?

उत्तर : जब मैं मुंबई गया था तो मेरे पास सपनों के अलावा कुछ नहीं था। मायानगरी की सड़कें नापी। छोटे-छोटे रोल मिले। कुछ चले, कुछ रद्द हो गए। बाद में क्राइम पेट्रोल धारावाहिक में रोल मिले तो जीविका चल निकली। हनुमान अंश से अब पहचान मिली है। हाल ही में फिल्म अनकही में व्यस्त हूँ। उम्मीद है यह फिल्म मेरे करियर में टर्निंग प्वाइंट साबित होगी।

नवोदित कलाकारों को सन्देश

प्रश्न : नवोदित कलाकारों को क्या सन्देश देंगे, खासकर जो आपकी तरह फिल्म क्षेत्र में करियर बनाना चाहते है?

उत्तर : देखिए, सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। अपनी लगन, निरंतर प्रयास और काम के प्रति पूरी ईमानदारी से ही मुकाम बनाया जा सकता है। जहाँ तक मेरा सवाल है तो मैंने कठोर परिश्रम किया है। मेरा अपना मानना है कि सफलता के लिए परिश्रम के साथ-साथ आप धैर्य और बुद्धि से काम लें।

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