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Mirzapur The Movie Review: Is It Worth Watching?

Mirzapur The Movie Review: गुड्डू-मुन्ना का भौकाल, सीटीमार मोमेंट्स से भरपूर फिल्म

Mirzapur The Movie Review: अली फजल, दिव्येंदु शर्मा और पंकज त्रिपाठी की फिल्म में गुड्डू-मुन्ना का भौकाल बरकरार है। जानिए कैसी है मिर्जापुर द मूवी।


mirzapur the movie review गुड्डू-मुन्ना का भौकाल सीटीमार मोमेंट्स से भरपूर फिल्म

Mirzapur The Movie Review |

मनोरंजन। करीब 8 साल पहले ओटीटी पर  मिर्जापुर शुरू हुई थी। इसने अपनी कहानी, किरदारों और दमदार डायलॉग्स से दर्शकों के बीच अलग पहचान बनाई थी। तीन सीजन तक दर्शकों का मनोरंजन करने के बाद अब यह दुनिया बड़े पर्दे पर पहुंच गई है। 'मिर्जापुर द मूवी' में पुराने किरदारों की वापसी के साथ कुछ नए चेहरे भी कहानी में शामिल किए गए हैं। फिल्म में गुड्डू पंडित, मुन्ना भइया और कालीन भैया का पुराना अंदाज देखने को मिलता है। वहीं, रवि किशन की एंट्री कहानी में नया ट्विस्ट लेकर आती है।

पहले जानिए क्या है मिर्जापुर द मूवी की कहानी?

फिल्म की कहानी 'मिर्जापुर'  की उसी दुनिया में आगे बढ़ती है, जहां सत्ता, गद्दी और वर्चस्व की लड़ाई जारी है। कालीन भैया यानी पंकज त्रिपाठी का मिर्जापुर पर दबदबा कायम है। उनके साथ गु्ड्डू पंडित और बबलू पंडित उनकी सत्ता को मजबूत करने में जुटे हैं। वहीं, मुन्ना त्रिपाठी यानी मुन्ना भैया अपने अंदाज में ताकत और रौब दिखाने से पीछे नहीं हटते। हालांकि कहानी में नया मोड़ तब आता है जब बब्बन यादव की एंट्री होती है। रवि किशन का यह किरदार जैसलमेर का बाहुबली और ड्रग्स के कारोबार का बड़ा खिलाड़ी है। उसकी नजर मिर्जापुर की गद्दी पर है और वह कालीन भैया को रास्ते से हटाकर सत्ता हासिल करना चाहता है। बब्बन यादव के सामने गुड्डू, बबलू और मुन्ना भैया की तिकड़ी खड़ी है। ऐसे में मिर्जापुर की गद्दी आखिर किसके हाथ लगेगी। यहीं फिल्म की कहानी का मुख्य सवाल है।

कहानी का बिल्डअप करता है प्रभावित

'मिर्जापुर' की सबसे बड़ी ताकत हमेशा उसकी वर्ल-बिल्डिंग, किरदार और संवाद रहे हैं। फिल्म के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि इतने बड़े संसार को बड़े पर्दे पर सीमित समय में किस तरह पेश किया जाए। निर्देशक गुरमीत सिंह इस चुनौती को काफी हद तक सफलतापूर्वक संभालते हैं। जिन दर्शकों ने सीरीज के तीनों सीजन देखें हैं। उनके लिए फिल्म की दुनिया से जुड़ना आसान है। वहीं, नए दर्शकों को भी कहानी और किरदारों का बैकग्राउंड समझाने की कोशिश की गई है। फिल्म की गति ज्यादातर हिस्सों में बनी रहती है। बीच-बीच में कुछ ऐसे हिस्से जरूर आते हैं जहां रफ्तार धीमी महसूस होती है। लेकिन कुल मिलाकर कहानी दर्शकों को बांधे रखने में कामयाब रहती है।

सीटी और तालियों वाले कई मोमेंट्स

अगर आप 'मिर्जापुर' के फैन हैं और बड़े पर्दे पर वही पुराना भौकाल देखने पहुंचे हैं। तब फिल्म आपको निराश नहीं करेगी। गुड्डू पंडित का अंदाज हो, मुन्ना भैया की मौजूदगी या एक्शन सीक्वेंस ऐसा है कि कई जगह थिएटर में सीटी और तालियाँ सुनाई देने की पूरी गुंजाइश है। फिल्म के गाने भी एक्शन औरल सीक्वेंस को और प्रभावी बनाते हैं। कुछ लोकप्रिय ट्रैक जब कहानी के अहम मौकों पर स्क्रीन पर आते हैं तो दर्शकों का उत्साह बढ़ जाता है। खास तौर पर गुड्डू और मुन्ना के बीच की पुरानी दुश्मनी और टकराव फिल्म के मजेदार हिस्सों में शामिल है।

रवि किशन ने बब्बन के किरदार में बांधा समां

फिल्म की खास बातों में रवि किशन की परफॉर्मेंस को रखा जा सकता है। बब्बन यादव के किरदार में उन्होंने जबरदस्त उर्जा दिखाई है। उनका किरदार मिर्जापुर की स्थापित दुनिया में एक नया रंग जोड़ता है और कई दृश्यों में वह छाप छोड़ने में कामयाब रहते हैं। वहीं, अली फजल ने गुड्डू पंडित के किरदार में एक बार फिर अपना प्रभाव कायम रखा है। वहीं, दिव्येंशु शर्मा की मुन्ना भैया के रूप में वापसी फैंस के लिए आकर्षण है। पंकज त्रिपाठी भी कालीन भैया के रूप में अपने पुराने अंदाज में नजर आते हैं और स्क्रीन पर उनकी मौजूदगी का असर बरकरार है।

बबलू पंडित के रोल में जितेंद्र कुमार कमजोर

जितेंद्र कुमार ने बबलू पंडित के किरदार में मेहनत की है। लेकिन उनकी परफॉर्मेंस बाकी प्रमुख कलाकारों के मुकाबले उतनी प्रभावशाली नहीं लगती। इस किरदार में दर्शकों को पुराने सीजन की कमी महसूस हो सकती है। सपोर्टिंग कास्ट में रसिका दुग्गल, शीबा चड्ढा, सोनल चौहान, मोहित मलिक, अभिषेक बनर्जी, श्वेता त्रिपाठी और श्रिया पिलगांवकर ने अपने-अपने किरदारों के साथ न्याय किया है।

क्या सिनेमा में देखने जाएं फिल्म?

कुल मिलाकर 'मिर्जापुर द मूवी' उन दर्शकों के लिए खास ट्रीट है जो इस फ्रेंचाइजी की शुरूआत से इसके साथ जुड़े हुए हैं। फिल्म में एक्शन, गैंगस्टर ड्रामा, दमदार डायलॉग और कई सीटीमार मोमेंट्स मौजूद हैं। कुछ जगह कहानी की रफ्तार धीमी जरूर होती है। लेकिन फिल्म का ओवरऑल ट्रीटमेंट इसे एक मनोरंजक मसाला फिल्म बनाता है। खासकर गुड्डू पंडित, मु्न्ना भइया और कालीन भइया को बड़े पर्दे पर देखने का अनुभव फैंस के लिए आकर्षण का केंद्र रहेगा। 

तो सिनेमा में जाने की बात करें तो अगर आप बड़े पर्दे पर लार्जर-देन-लाइफ और मिर्जापुर वाला भौकाल देखना चाहते हैं तो यह फिल्म आपने के लिए मनोरंजक साबित हो सकती है। हालांकि, फिल्म की भाषा, हिंसा और कंटेंट को देखते हुए इसे परिवार और खासकर बच्चों के साथ देखने से बचना बेहतर रहेगा।

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