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तृप्ति देसाई सबरीमाला मंदिर जाने पर अड़ीं, सरकार से मांगी सुरक्षा

तृप्ति देसाई सबरीमाला मंदिर जाने पर अड़ीं, सरकार से मांगी सुरक्षा

तिरुवनंतपुरम/स्वदेश वेब डेस्क। महाराष्ट्र में पुणे की महिला अधिकार कार्यकर्ता तृप्ति देसाई ने ऐलान किया है कि वह अपनी सहयोगियों के साथ आगामी 17 नवम्बर को केरल के सबरीमाला मंदिर में दर्शन पूजन के लिए जाएंगी।

भू माता ब्रिगेड की संयोजक तृप्ति देसाई ने केरल के मुख्यमंत्री पी. विजयन को एक पत्र लिखकर आग्रह किया है कि उनके सात सदस्यीय दल को सुरक्षा प्रदान की जाए। उनके अनुसार सर्वोच्च उच्चतम न्यायालय ने महिलाओं के मंदिर में प्रवेश करने के अधिकार को बरकरार रखा है तथा इस अधिकार का उपयोग करते हुए वह सबरीमाला जाएंगी। उन्होंने राज्य सरकार से उनके दल को आवास और परिवहन सुविधा मुहैया कराने का भी आग्रह किया है।

उल्लेखनीय है कि तृप्ति देसाई ने इसके पहले मुंबई की हाजी अली दरगाह और शनि सिंगणापुर मंदिर में महिलाओं के दर्शन पूजन के अधिकार को हासिल करने की सफल मुहिम चलाई थी।

उधर, अयप्पा धर्मसेना के अध्यक्ष राहुल ईश्वर ने तृप्ति देसाई या प्रतिबंधित आयु वर्ग की किसी भी महिला को मंदिर में प्रवेश करने से रोकने का घोषणा की है। उन्होंने कहा कि अयप्पा भक्त अगले 60 दिनों तक सबरीमाला मंदिर की चौकीदारी करेंगे तथा किसी को मंदिर की परंपरा तोड़ने की इजाजत नही देंगे। सबरीमाला मंदिर के संबंध में उच्चतम न्यायालय के फैसले की अपनी तरह से व्याख्या करते हुए राहुल ईश्वर ने कहाकि न्यायालय ने अपने पुराने फैसले पर कोई स्टे (स्थगन) नही दिया है तो अयप्पा भक्त भी सबरीमाला मंदिर में स्टे (डेरा) करेंगे।

इस बीच आज उच्चतम न्यायालय ने उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें न्यायालय से महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति देने संबंधी आदेश पर स्थगन आदेश जारी करने का आग्रह किया गया था। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह 22 जनवरी तक इंजतार करें।

उल्लेखनीय है कि न्यायालय ने मंगलवार को फैसला सुनाया था कि वह 49 पुनर्विचार याचिकाओं पर 22 जनवरी को खुली अदालत में सुनवाई करेगा।

केरल सरकार ने सबरीमाला में जारी तनाव और गतिरोध को हल करने के लिए 15 नवम्बर को सर्वदलीय बैठक आयोजित की है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस सहित कई राजनीतिक दल सबरीमाला के संबंध में राज्य की वाम मोर्चा सरकार के तीखे आलोचक रहे हैं। इन दलों का कहना है कि राज्य सरकार को उच्चतम न्यायालय के फैसले को लागू करने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। उनका यह भी तर्क है कि अब जब कि उच्चतम न्यायालय पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई के लिए राजी है तब राज्य सरकार को 22 जनवरी तक सबरीमाला में यथास्थिति कायम रखनी चाहिए।

सबरीमाला मंदिर के कपाट 16 नवम्बर को खुल रहे हैं, जब इस मंदिर का दो महीने तक चलने वाला मंडलम और मकर संक्रांति का तीर्थयात्रा सत्र शुरु होगा। इस दौरान लाखों श्रद्धालुओं के सबरीमाला पहुंचने की संभावना है। राज्य पुलिस ने श्रद्धालुओं के आवागमन पर आसमान से भी निगरानी रखने का निश्चय किया है।

Updated : 2018-11-19T01:08:07+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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