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थावरचंद गहलोत ने कहा - आरक्षण पर समाज में पैदा किया जा रहा है संदेह

थावरचंद गहलोत ने कहा - आरक्षण पर समाज में पैदा किया जा रहा है संदेह
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नई दिल्ली। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने शनिवार को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) में कहा कि आरक्षण के मुद्दे पर षड्यंत्रकारी समाज में संदेह पैदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार का प्रयास है कि अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण के जो प्रावधान हैं, उन्हें ईमानदारी से जस का तस बनाए रखा जाए।

केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत यहां इग्नू के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज और प्रज्ञा प्रवाह द्वारा संयुक्त रूप से "भारत में समावेशीकरण का राष्ट्रीय विमर्श" विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल, इग्नू के कुलपति प्रो. नागेश्वर राव सहित अनेक लोग मौजूद थे।

गहलोत ने कहा कि सरकार का यह प्रयास है कि सरकारी नौकरियों में, विश्वविद्यालयों, विद्यालयों में दाखिला में आरक्षण की पूरी प्रक्रिया लागू की जाए। जो सामाजिक न्याय से वंचित होकर समाज से दूर रहा है, उसको पूरी तरह से स्थापित किया जाए। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति वर्ग और ओबीसी वर्ग को लाभ देने की तर्ज पर ही दिव्यांग छात्रों के लिए पहली बार छात्रवृत्ति की शुरुआत की, सरकार ने इसके बजट में 30 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी की है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने भीमराव अंबेडकर के अविस्मरणीय योगदान को याद करने तथा उनके विचारों को समाज के बीच प्रसारित करने के लिए अनेक प्रयास किये हैं। अंबेडकर की जयंती को सरकार ने समरसता दिवस के रूप में मनाने के साथ ही 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाना शुरू किया है। सरकार ने पंचतीर्थ की स्थापना की है, उसके विकास का कार्य लगातार हो रहा है। सरकार का पूरा प्रयास है कि बाबा साहब के समावेशी आदर्शों को समाज में पूरी तरह से स्थापित किया जाए।

संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल ने कहा कि बंधुत्व और आपसी भाईचारे के बिना समानता और स्वतंत्रता के लक्ष्यों की पूर्ति नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि प्राचीन भारत में वर्ण व्यवस्था भेदभाव मूलक नहीं थी। पिछले एक हजार वर्षों के दौरान ही यह कुरीति समाज में आई। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज हमेशा से सबको साथ लेकर चलता रहा है। भारतीय समाज का यह सर्वसमावेशी स्वरूप विभिन्नताओं और बहुलवाद पर आधारित है। उन्होंने कहा कि आज समाज में सामाजिक, आर्थिक असमानता है तथा धर्म और जाति के नाम पर विभाजन की कोशिश की जा रही है ऐसे में सबको साथ लेकर चलने और आपसी भाईचारे की बहुत आवश्यकता है।

Updated : 2018-08-05T02:23:15+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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