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सत्ता की दौड़ में वफादारों ने मारी बाजी

सत्ता की दौड़ में वफादारों ने मारी बाजी

नई दिल्ली। छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्यप्रदेश में मतगणना के बाद मुख्यमंत्री का नाम तय करने के लिए 12, तुगलक रोड पर चले घटनाक्रम ने दिखाया कि कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं है। अनुशासन की कमी और आलाकमान की पार्टी नेताओं पर पकड़ की कमी की पोल खुल गई। जो काम आलाकमान के एक इशारे पर हो जाना चाहिए था, उसे पूरा करने के लिए सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी सहित पार्टी के कई बड़े नेताओं को मशक्कत करनी पड़ी। इन तीनों राज्यों में जिस तरह पेंच फंसा उसे निपटाना आसान नहीं था। प्रत्येक राज्य में दो या तीन-तीन मुख्यमंत्री पद के दावेदार थे। आलाकमान ने प्रदेश अध्यक्षों को ही मुख्यमंत्री के लिए वरीयता दी। हां! राजस्थान इसके लिए अपवाद रहा, जहां प्रदेश अध्यक्ष के बजाए गहलोत के अनुभव को वरीयता दी गई। भले ही जनता और समर्थकों में सिंधिया, पायलट और टी एस सिंहदेव पहली पसंद रहे हों लेकिन गांधी परिवार के वफादारों ने इस रेस में बाजी मार ली। फिर दलील कुछ भी दी जाए। इस हिसाब से पायलट, सिंधिया और ताम्रध्वज साहू को अभी काफी कुछ सिद्ध करना है।

राजस्थान में सचिन पायलट, मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया और छत्तीसगढ़ में ताम्रध्वज साहू समर्थकों की पहली पसंद बने थे। ये वो चेहरे थे जिन्हें राज्यों के युवा मतदाताओं ने मुख्यमंत्री के तौर पर देखा था, लेकिन मुख्यमंत्री की दौड़ में पिछडऩे के बाद इनके समर्थकों ने सड़कों पर जिस तरह तांडव दिखाया उससे भविष्य की बगावत अवश्यसंभावी है। मध्य प्रदेश में मतदाता तेज तर्रार, जुझारू छवि के नेता ज्योतिदारित्य सिंधिया को राज्य का आगामी मुख्यमंत्री मान कर चल रहे थे। इस बात का पार्टी को चम्बल और बुन्देलखण्ड मे खासा लाभ भी मिला। इसके इतर, राजस्थान में युवा तुर्क सचिन पायलट ने पिछले पांच साल जो अथक मेहनत की, उसके प्रतिफल से उन्हें वंचित कर दिया गया। यहां भी आलाकमान ने जनता की मंशा को समझने के बजाए खुद की मंशा पर ही केन्द्रित रखा। सबसे बुरी दुर्गति तो छत्तीसगढ़ ़में हुई जहां साहू समाज ने लोकसभा चुनाव मे कांग्रेस को खामियाजा भुगतने की धमकी दे दी है। छत्तीसगढ़ में साहू समाज बेहद मजबूत स्थिति में होने के कारण यह समाज सामाजिक निर्देशों पर अक्षरश: अमल करने वाला माना जाता है। इधर, राज्य में 32 प्रतिशत आबादी आदिवासी समुदाय की है, जो इस बार टी.एस. सिंहदेव से खासा प्रभावित था साथ ही 9 से 10 प्रतिशत सामान्य वर्ग ने भी टी.एस. सिंहदेव को मुख्यमंत्री का चेहरा मान कर कांग्रेस के पक्ष मे भरपूर मतदान किया। इसमें कोई दो राय नहीं है कि भूपेश बघेल ने पिछले चार साल पार्टी को मजबूत करने मे खासी मशक्कत की है लेकिन कांग्रेस को वोट आम जनता ने दिया है जिसकी मंशा को दरकिनार कर आलाकमान ने अपनी मंशा छत्तीसगढ़ पर थोप दी है, ऐसा सभी वर्ग मानते हंै। इधर, आदिवासी वर्ग भी खुद को खासा उपेक्षित महसूस कर रहा है, इस वर्ग को साधने मे टी.एस. सिंहदेव के जनघोषणा पत्र ने बेहतरीन भूमिका अदा की है। राज्य के लाखों शासकीय कर्मचारी वर्ग जिसने कांग्रेस को अपार बहुमत देने मे बेहद महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है वह सीधे-सीधे टी.एस.सिंहदेव से प्रभावित हुआ था जिसमें पुलिस कर्मचारी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, चतुर्थवर्ग, तृतीय वर्ग कर्मचारी वर्ग खास तौर पर सिंहदेव को मुख्यमंत्री मानकर चल रहा था। यह वर्ग भी टी.एस.सिंहदेव को ही मुख्यमंत्री मानकर चल रहा था। सर्व आदिवासी समाज ने भी आदिवासी मुख्यमंत्री की मांग उठा दी है, जिस लोकसभा चुनाव को ध्यान में रख कर आलाकमान ने भूपेश बघेल को मुख्यमंत्री के लिए चयन किया है उसी लोकसभा चुनाव मे कांग्रेस को भारी विरोध का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि मंत्रीमण्डल के गठन मे इन वर्गों को साधने की कोशिश तो की जाएगी मगर ऐसा करने से किस हद तक विरोध को कम किया जा सकेगा यह भविष्य के गर्भ में है। बहरहाल, इस सारे घटनाक्रम ने यह तो साबित कर ही दिया है कि जनता के भाग्य और इच्छाओं का फैसला जनता नहीं पार्टी के आलाकमान करेंगें फिर पार्टी चाहे जो हो।

झीरमघाटी पर मामले की होगी जांच..

छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री घोषित होते ही सबसे पहले झीरमघाटी नरसंहार मामले की जांच नए सिरे से कराने की बात कह कर राज्य मे राजनीतिक भूचाल के संकेत दे दिये हैं। उम्मीद की जा रही हैै कि नागरिक आपर्ति निगम घोटाले, धान घोटाले, प्रियदर्शनी इन्द्रा बैंक घोटाले और व्यापमं जैसे कथित

घाटालों की जांच भी कराई जाएगी। इन कथित घोटालों को लेकर कांग्रेस सहित भूपेश बघेल आन्दोलनरत रहे हैं। झीरमघाटी मामले में भूपेश बघेल सीधे-सीधे भाजपा सरकार पर ही आरोप लगाते रहे हैं। वे पहले भी कई बार सार्वनिक मंचों पर धमकी भरे अन्दाज में कह चुके हैं कि कांग्रेस सरकार बनने पर ये सभी जांचे करार्इं जाएंगी। ऐसी स्थिति में यह जाहिर है कि भूपेश बघेल सरकार चलाने के साथ-साथ भाजपा और जोगी कांग्रेस में अपने विरोधियों से दो-दो हाथ भी करने जा रहे हैं।

Updated : 2019-01-05T14:39:23+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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