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बसपा के साथ समझौते पर राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष ने किया "ना" , म.प्र. व छत्तीसगढ़ का "हां"

बसपा के साथ समझौते पर राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष ने किया ना , म.प्र. व छत्तीसगढ़ का हां
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नई दिल्ली। राजस्थान के कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट नहीं चाहते कि उनके राज्य में कांग्रेस का बसपा से गठबंधन हो। उधर, म.प्र. कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ और छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल चाहते हैं उनके राज्य में बसपा से समझौता हो। इसके लिए दो तथ्यों को आधार बनाया गया। एक - 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा, कांग्रेस व बसपा को मिले वोट प्रतिशत, दूसरा - राज्य में भाजपा की सत्ता विरोधी मुद्दा।

मालूम हो कि शनिवार 14 जुलाई 2018 को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इन तीनों राज्यों के पार्टी अध्यक्षों व प्रभारियों के साथ विधानसभा चुनावी तैयारियों को लेकर बैठक की थी। उसमें कई मुद्दों पर बातचीत हुई। प्रमुख मुद्दा था अन्य दलों के साथ तालमेल करके चुनाव लड़ना। चुनाव तैयारियों के मुद्दे पर राहुल गांधी ने तीनों राज्यों के अध्यक्षों व प्रभारियों को बिना समय गंवाये अभी से आक्रामक प्रचार शुरू करने के लिए कहा। विपक्षी दलों से तालमेल के मुद्दे पर अध्यक्षों व प्रभारियों ने यह कार्य कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर छोड़ दिया। लेकिन इस पर अपनी बेबाक राय रखी। म.प्र. कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ व प्रभारी दीपक बावरिया का तर्क था कि बसपा ने म.प्र. में 2013 के विधानसभा चुनाव में 6.3 प्रतिशत वोट और 4 विधानसभा सीटें पाई थी। कांग्रेस को भाजपा से 8 प्रतिशत कम वोट मिला था। ऐसे में यदि म.प्र. में कांग्रेस का बसपा, सपा और गोंडवाना स्वतंत्र पार्टी से गठबंधन हो जाता है, तो दिसम्बर 2018 में होने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी जीत जाएगी। लगभग यही तर्क छत्तीसगढ़ के कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल और प्रभारी पीएल पुनिया का था। छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रमुख बघेल का कहना है कि 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को कांग्रेस से मात्र 0.75 प्रतिशत वोट अधिक मिले थे और बसपा को 6.11 प्रतिशत वोट मिले थे। ऐसे में यदि कांग्रेस का बसपा से गठबंधन हो जाता है, तो दिसम्बर 2018 के विधानसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस-बसपा गठबंधन को आसानी से बहुमत मिल जाएगा और सरकार बन सकती है। हालांकि बसपा प्रमुख मायावती ने अजीत जोगी की पार्टी छत्तीसगढ़ विकास पार्टी से गठबंधन करने की बात की है, लेकिन उनसे (माया) बात करने पर कांग्रेस से समझौता हो सकता है। सूत्रों का कहना है कि मायावती की छत्तीसगढ़ के कांग्रेस प्रभारी पीएल पुनिया से खुन्नस है, इसलिए भी वह छत्तीसगढ़ में अजीत जोगी के साथ गठबंधन को प्राथमिकता दे रही हैं। इधर राजस्थान कांग्रेस प्रमुख सचिन पायलट तथा प्रभारी अविनाश पाण्डेय का कहना है कि राजस्थान में स्थिति म.प्र. तथा छत्तीसगढ़ से भिन्न है। राजस्थान में 2013 के विधानसभा चुनाव में बसपा को 3.3 प्रतिशत वोट मिले थे। लेकिन सचिन पायलट यहां पर बसपा से विधानसभा चुनाव के पहले गठबंधन नहीं करना चाहते हैं। उनका तर्क है कि कांग्रेस राजस्थान में अकेले ही भाजपा को हराने में सक्षम है। चुनाव बाद बसपा को सरकार में साथ ले लिया जाएगा। लेकिन उन्होंने भी इस पर अंतिम निर्णय लेने की जिम्मेदारी कांग्रेस अध्यक्ष पर छोड़ दिया है।


Updated : 2018-07-15T17:25:04+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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