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कवि एवं पत्रकार विष्णु खरे का निधन, साहित्य जगत में शोक

कवि एवं पत्रकार विष्णु खरे का निधन, साहित्य जगत में शोक

नई दिल्ली/स्वदेश वेब डेस्क। दिल्ली हिंदी अकादमी के उपाध्यक्ष एवं प्रख्यात कवि एवं पत्रकार विष्णु खरे का 78 साल की उम्र में दिल्ली के जीबी पंत अस्पताल में निधन हो गया है। एक हफ्ते पहले ब्रेन हेमरेज होने के कारण उनको अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उसके बाद से उनकी हालत लगातार गंभीर बनी हुई थी।

उल्लेखनीय है कि विष्णु खरे ने 30 जून, 2018 को ही हिंदी अकादमी के उपाध्यक्ष का पदभार संभाला था। विष्णु खरे का जन्म मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में नौ फरवरी, 1940 को हुआ था। उन्होंने इंदौर के क्रिश्चियन कॉलेज से इंग्लिश में परास्नातक किया लेकिन उन्होंने हिंदी पत्रकार के रूप में अपना करियर शुरू किया। इस कड़ी में वह पहले 'दैनिक इन्दौर' में उप संपादक रहे। उसके बाद नवभारत टाइम्स अखबार से लंबे समय तक जुड़े रहे।

उनका पहला काव्य संग्रह 'एक गैर रूमानी समय में' था। उन्होंने मशहूर ब्रिटिश कवि टीएस इलियट की कविताओं का अनुवाद भी किया जो कि यह 'मरु प्रदेश और अन्य कविताएं' नाम से प्रकाशित हुआ। उन्होंने समकालीन हिंदी कविताओं का अंग्रेजी में भी अनुवाद किया। उन्होंने काव्य संग्रहों के अलावा आलोचना की किताबें भी लिखीं। विष्णु खरे की प्रमुख कविताएं जो कि अशोक वाजपेयी द्वारा संपादित की गई थीं 'खुद अपनी आंख से', 'सबकी आवाज के पर्दे में', 'पिछला बाकी' एवं 'काल' जैसी कुछ अन्य प्रमुख हैं।

पुरस्कार/सम्मान

विष्णु खरे को साहित्य के एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया, जिसमें 'नाइट ऑफ द व्हाइट रोज सम्मान', 'हिंदी अकादमी साहित्य सम्मान', 'शिखर सम्मान', 'रघुवीर सहाय सम्मान', 'मैथिलीशरण गुप्त सम्मान' शामिल हैं।

Updated : 2018-09-20T01:13:17+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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