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एनआरसी ड्राफ्ट: दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय सीमा 31 दिसम्बर तक बढ़ी

एनआरसी ड्राफ्ट: दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय सीमा 31 दिसम्बर तक बढ़ी
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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने असम में एनआरसी ड्राफ्ट में जगह न पा सके 40 लाख लोगों को दावे और आपत्तियां दाखिल करने के लिए समय सीमा 31 दिसम्बर तक बढ़ा दी है। पहले ये समय सीमा 15 दिसम्बर तक थी। अब इसके सत्यापन का काम 15 फरवरी से शुरू होगा।

असम सरकार ने दावे और आपत्ति दाखिल करने के लिए समय सीमा 15 जनवरी तक बढ़ाने की मांग की थी। असम सरकार ने कोर्ट को बताया था कि अब तक 14 लाख 28 हजार दावे दाखिल किए जा चुके हैं। पिछले एक नवम्बर को कोर्ट ने दावे और आपत्तियां दर्ज करने के लिए 15 दिसम्बर तक का वक्त दिया था। उसके पहले ये मियाद 25 नवम्बर थी। सुप्रीम कोर्ट ने लोगों को नागरिकता साबित करने के लिए पांच और दस्तावेजों के इस्तेमाल की इजाज़त दे दी है। पहले सिर्फ 10 दस्तावेजों को मान्यता दी थी ।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एनआरसी कोआर्डिनेटर प्रतीक हजेला की उन आपत्तियों को खारिज कर दिया था कि पांच और दस्तावेजों की अनुमति देने से फर्जीवाड़े की संभावना बढ़ेगी।

पिछले 19 सितम्बर को सुप्रीम कोर्ट ने ड्राफ्ट रजिस्टर में जगह न पा सके लोगों के दावे और आपत्तियों के निपटारे की प्रक्रिया 25 सितम्बर से शुरू करने का निर्देश दिया था। ये प्रक्रिया 60 दिनों तक चलनी थी ।

जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने पहले 30 दिनों तक 10 तरह के दस्तावेजों के इस्तेमाल की इजाजत दी थी। उसके बाद पांच और दस्तावेजों पर भी विचार किया जाएगा। पिछले 5 सितम्बर को सुनवाई के दौरान एनआरसी के स्टेट कोआर्डीनेटर प्रतीक हजेला ने दावे पेश करने के साथ 15 अतिरिक्त दस्तावेज में से सिर्फ 10 को स्वीकार किए जाने का सुझाव दिया था ।

सुनवाई के दौरान केंद्र ने एनआरसी कोआर्डिनेटर की रिपोर्ट की कॉपी मुहैया कराने की मांग की थी लेकिन जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मांग को खारिज कर दिया था। केंद्र की ओर से अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा था कि हमें वो रिपोर्ट चाहिए ताकि हम ये जान सकें कि जिन 40 लाख लोगों को एनआरसी के ड्राफ्ट से बाहर रखा गया है, उनकी विरासत का क्या होगा। तब कोर्ट ने कहा था कि केंद्र सरकार भले ही इस रिपोर्ट को मांग रही है लेकिन हमें चीजें संतुलित करनी है।

पिछले 28 अगस्त को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि क्या उसने लोगों को नए सिरे से वंशावली दाखिल करने की इजाज़त के परिणाम पर गौर किया है। रजिस्टर में छूट गए लोगों की आपत्तियों के निराकरण के समय इसकी इजाज़त देना पूरी प्रक्रिया नए सिरे से शुरू करने जैसा है।

सुनवाई के दौरान एनआरसी ने कहा था कि वो अपने ड्राफ्ट की पुष्टि के लिए सैंपल सर्वे करना चाहता है। 10 प्रतिशत लोगों का सैंपल सर्वे कर देखा जाएगा कि नागरिक रजिस्टर बनाने का काम सही तरीके से हुआ या नहीं। कोर्ट ने कहा कि उसी ज़िले की पुरानी टीम सैंपल सर्वे न करे। दूसरे ज़िले से नई टीम ये काम करे ।

पिछले 16 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षकारों को निर्देश दिया था कि वे सरकार की ओर से आपत्तियां और दावे पेश करने के लिए एसओपी पर अपना पक्ष रखें । सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा था कि 30 अगस्त से एनआरसी के फ़ाइनल ड्राफ़्ट के लिए दावे और आपत्तियां ली जाएंगी। कोर्ट ने एनआरसी के स्टेट कोआर्डिनेटर को निर्देश दिया था कि वह सीलबंद लिफ़ाफ़े मे जनसंख्या के अनुपात के हिसाब से जिलेवार उन लोगों की सूची दें, जो एनआरसी ड्राफ़्ट की लिस्ट से बाहर हैं।

राज्य में अवैध तरीके से रह रहे बांग्लादेशियों की पहचान के मद्देनज़र ये प्रक्रिया काफी अहम है। पांच दिसम्बर, 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने असम के 48 लाख लोगों की नागरिकता के मामले में गुवाहाटी हाईकोर्ट के फैसले को निरस्त करते हुए कहा था कि उन लोगों को अपनी नागरिकता साबित करने का दोबारा मौका मिलेगा। कोर्ट ने कहा कि जिन 48 लाख महिलाओं को पंचायत द्वारा नागरिकता का प्रमाण पत्र दिया गया है, उसका वेरिफिकेशन के बाद इस्तेमाल किया जा सकता है।

Updated : 2019-01-05T14:23:30+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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