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क्लीन गंगा पर एनजीटी ने जताया असंतोष, कहा-जमीनी स्तर पर पर्याप्त काम नहीं हुआ

क्लीन गंगा पर एनजीटी ने जताया असंतोष, कहा-जमीनी स्तर पर पर्याप्त काम नहीं हुआ

नई दिल्ली । नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने गंगा सफाई पर असंतोष जताते हुए कहा है कि अभी तक इसे साफ करने के लिए शायद की कोई प्रभावी कदम उठाया गया हो। एनजीटी चेयरपर्सन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि स्थिति असाधारण रूप से खराब हो गई है। एनजीटी ने कहा कि प्रशासन के दावों के बावजूद गंगा की सफाई के लिए जमीनी स्तर पर पर्याप्त काम नहीं हुआ है। गंगा में प्रदूषण दूर करने के लिए रेगुलर मानिटरिंग की जरूरत है।

एनजीटी ने आम जनता का फीडबैक लेने के लिए सर्वेक्षण करने का आदेश दिया कि वे गंगा के प्रदूषण के बारे में क्या सोचते हैं। इसके लिए लोग प्रशासन को ई-मेल के जरिये भी अपना फीडबैक दे सकते हैं। एनजीटी ने कहा कि गंगा देश की सर्वाधिक प्रतिष्ठित नदी है जिसे सौ करोड़ लोग सम्मान देते हैं लेकिन हम हैं कि उसकी रक्षा नहीं कर सकते हैं। हमें मेकानिज्म को और मजबूत करने की जरूरत है।

इसके पहले की सुनवाई के दौरान एनजीटी ने नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) को आदेशों की पालना रिपोर्ट दाखिल नहीं करने के लिए फटकार लगाई थी।

13 जुलाई, 2017 को एनजीटी ने हरिद्वार से लेकर उन्नाव तक गंगा किनारे से सौ मीटर की दूरी को नो डेवलपमेंट जोन घोषित कर दिया था। एनजीटी ने गंगा को प्रदूषित करने वाले पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाने का आदेश दिया था।

एनजीटी ने अपने विस्तृत फैसले में गंगा में न्यूनतम बहाव जारी रखने का निर्देश दिया था। एनजीटी ने उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की सरकारों को निर्देश दिया था कि गंगा के घाटों पर धार्मिक आयोजनों के लिए दिशानिर्देश तय करें। एनजीटी ने अपने आदेश के अनुपालन पर नजर रखने के लिए निगरानी समिति का गठन किया था।

एनजीटी ने आदेश दिया था कि कि हरिद्वार से उन्नाव तक के 86 बड़े नालों की छह माह में सफाई कर ली जाए । इसमें कोई लेटलतीफी या बहाना स्वीकार नहीं किया जाएगा । एनजीटी ने कहा था कि गंगा के आसपास क्रोम का उत्पादन करनेवाले उद्योगों पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाए और जो औद्योगिक कचरे का निस्तारण करते हैं उन पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाए । एनजीटी ने आदेश दिया था कि गंगा किनारे से 500 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार का प्रदूषण या कूड़ा न फैलाया जाए।

एनजीटी ने सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्ती दिखाते हुए कहा है कि अगर कोई भी अधिकारी हमारे आदेश का पालन नहीं करेगा तो उसे कोर्ट की अवमानना की सजा भुगतनी होगी । गंगा पर सफाई मामला सुप्रीम कोर्ट ने अपने यहां से ट्रांसफर कर एनजीटी को भेजा था।

Updated : 2018-07-20T17:17:46+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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