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मनमोहन सिंह नहीं लड़ना चाहते राज्यसभा का चुनाव

मनमोहन सिंह नहीं लड़ना चाहते राज्यसभा का चुनाव
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नई दिल्ली। 86 वर्ष के हो चुके पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का राज्यसभा का समय 14 जून 2019 को पूरा हो रहा है। उसके बाद वह राज्यसभा चुनाव नहीं लड़ना चाहते। सूत्रों का कहना है कि वह अब राजनीति से संन्यास लेना चाहते हैं। उन्होंने अपने कुछ विश्वासपात्र लोगों से कहा भी कि अब राजनीति पहले जैसी नहीं रही। जो हालत हो गई है उसमें उनके जैसे लोगों को राजनीति को नमस्कार कर लेना ही ठीक होगा। मनमोहन का मानना है कि अब जिस तरह की मनमानी वाली राजनीति होने लगी है, किसी पर भी कीचड़ उछालने, फंसाने, परेशान करने का उपक्रम शुरू हो गया है| उससे सक्रिय राजनीति से मुक्ति पा लेना ही श्रेयस्कर है। एआईसीसी सदस्य अनिल श्रीवास्तव का कहना है कि मनमोहन सिंह की साख विश्व के सभी विकसित देशों के नेताओं व अर्थशास्त्रियों में है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा जब राष्ट्पति थे तब भी और आज भी मनमोहन सिंह को "गुरू" कह कर सम्बोधित करते हैं। उनका (मनमोहन ) कोई भी बयान देश व विदेश में बहुत मायने रखता है। वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के किसी भी बात या देश की आर्थिक स्थिति पर जब कुछ कहते हैं, तो उसका असर होता है। यही वजह है कि कांग्रेस में उनको हर हालत में राज्यसभा सांसद बनाये रखने की बात हो रही है।

मनमोहन सिंह की अनिच्छा के बावजूद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी व संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की चेयरपर्सन सोनिया गांधी चाहती हैं कि 1991 से असम से लगातार कई टर्म राज्यसभा सांसद रहे पूर्व प्रधानमंत्री एक टर्म और राज्यसभा में रहें। इसके लिए पंजाब से राज्यसभा सांसद अम्बिका सोनी से इस्तीफा दिलवाकर उनको राज्यसभा में लाने या डीएमके के सहयोग से तमिलनाडु से राज्यसभा सांसद बनाने की तैयारी चल रही है। डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने उनको राज्यसभा सांसद बनाने में मदद करने की खुद पहल की है।

मालूम हो कि 1991 में तबके प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव ने चंडीगढ़ में सेवानिवृत जीवन जी रहे मनमोहन सिंह को दिल्ली बुलवाकर वित्तमंत्री और असम से राज्यसभा सांसद बनवाया था। वह तबसे असम से ही राज्यसभा सांसद बनते रहे। वहां से 1991, 1995, 2001, 2007 व जून 2013 में पांचवी बार राज्यसभा सांसद बने। इस बार उनका राज्यसभा सांसद का 6 वर्ष का कार्यकाल 14 जून को खत्म हो रहा है। असम से खाली हो रहे राज्यसभा के इस सीट के लिए चुनाव 3 जून 2019 के पहले कराया जाएगा। इस समय असम में भाजपा की सरकार है। वहां कांग्रेस के विधायकों की संख्या बहुत कम है। सो, मई 2019 में राज्यसभा के इस सीट के लिए होने वाले चुनाव में कांग्रेस का प्रत्याशी नहीं जीत पाएगा। ऐसे में मनमोहन सिंह को किसी ऐसे राज्य से प्रत्याशी बनवाकर राज्यसभा सदस्य बनवाने पर मंथन चल रहा है, जहां से राज्यसभा की सीटें खाली हो रही हैं और उसके लिए मई में चुनाव होने वाले हैं। ऐसे राज्यों में से केवल तमिलनाडु ही ऐसा राज्य है जहां कांग्रेस अपनी सहयोगी पार्टी डीएमके के सहयोग से मनमोहन सिंह को राज्यसभा में भेज सकती है। कांग्रेसी सूत्रों का कहना है कि पंजाब से राज्यसभा सांसद अम्बिका सोनी से इस्तीफा दिलवाकर यदि मनमोहन सिंह को वहां से राज्यसभा का प्रत्याशी बनाया जाता है, तो राज्य में कांग्रेस की सरकार होने के कारण उनको (मनमोहन सिंह) आसानी से जीतवाकर सांसद बनाया जा सकता है। अंबिका सोनी को पंजाब की उस सीट से लोकसभा चुनाव लड़वाया जा सकता है, जहां से उनको मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह जीतवा सकें। 2016 में राज्यसभा सांसद चुनी गईं अंबिका सोनी का कार्यकाल अभी तीन वर्ष बचा हुआ है।

Updated : 9 March 2019 4:45 AM GMT
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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