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विदेशी पर्यटक कम कर रहे खरीददारी, हो रहा नुकसान, जानिए क्या है कारण

रिफंड व अन्य समस्यायें खत्म हों तो विदेशी सैलानियों की संख्या व खरीददारी बढ़ेगी

विदेशी पर्यटक कम कर रहे खरीददारी, हो रहा नुकसान, जानिए क्या है कारण

नई दिल्ली। केन्द्र सरकार द्वारा भारत में विदेशी सैलानियों को आकर्षित करने के लिए, पर्यटन के तमाम लुभावने विज्ञापन, प्रचार आदि किये जा रहे हैं। इसके लिए विदेश में तरह-तरह के उपक्रम किये जा रहे हैं। लेकिन इसका उचित परिणाम नहीं मिल रहा है। इसके बहुत से कारणों में से एक कारण भारत में विदेशी सैलानियों द्वारा, पर्यटकों द्वारा खरीदने वाले सामान पर जीएसटी रिफंड आसान नहीं होना है। उस रिफंड को पाने के लिए पर्यटकों को बहुत झमेले में पड़ना पड़ता है। उसके लिए एयरपोर्ट व ऐसे कम अन्य जगह पर लाइन में लगना पड़ता है। बहुत से दस्तावेज दिखाना पड़ता है या अपने देश में जाकर बहुत से दस्तावेज जमा करने के झमेले में पड़ना पड़ता है। तब जाकर जीएसटी रिफंड मिलता है। इस परेशानी से बचने के लिए बहुत से पर्यटक भारत में पसंद होने के बावजूद सामान नहीं खरीद रहे हैं। इसके अलावा भारत में जब सामान खरीदने पर रिफंड मिलना आसान नहीं है, तो बहुत से पर्यटक भारत आते ही नहीं हैं। वे जापान, सिंगापुर, थाईलैंड, मलयेशिया, श्रीलंका आदि देशों के पर्यटन पर चले जाते हैं। इससे भारत को पर्यटकों व सामान बिक्री दोनों का ही बहुत नुकसान हो रहा है।

भारत के फुटकर सामान विक्रेता संगठन के प्रमुख कुमार राजगोपालन का कहना है कि यदि भारत में विदेशी पर्यटकों के लिए यहां खरीददारी पर जीएसटी रिफंड व ऐसे ही अन्य कई परेशान करने वाली उनकी समस्याओं को सहज, सुविधाजनक बना दिया जाए तो यहां विदेशी सैलानी अधिक संख्या में आने लगेंगे| यहां के सामान खरीदने पर दिल खोल कर खर्च करने लगेंगे क्योंकि भारत में रहने, खाने, घूमने पर खर्च बहुत कम है| यहां के सामान भी बहुत सस्ते हैं। यहां जगह, सौन्दर्य, मौसम से लगायत सामान, उसके डिजाइन, रंग आदि में भी विविधता है। यह विदेशी पर्यटकों को बहुत ही लुभाती है।

इस बारे में दिल्ली की एक बड़ी ट्रेवेल कम्पनी के मालिक का कहना है कि सच्चाई यह है कि केन्द्र सरकार और उसके सुविधाभोगी अफसर विदेशी पर्यटकों के लिए जितना सुविधा, सुरक्षा उपलब्ध कराया जाना चाहिए उसका एक तिहाई भी नहीं करा रहे हैं। उनकी बहुत सी समस्यायें हल करने की बजाय टाली जा रही हैं| भारत सरकार केवल विज्ञापन पर पर्यटकों को बहुत सुविधा देने का प्रचार करती है। मूल समस्या को खत्म करने की त्वरित कार्रवाई नहीं करती है। यहां की सरकार को पर्यटकों को सुविधा देने के लिए सिंगापुर व दुबई माडल पर काम करना होगा। यह हो जाये तो भारत में विदेशी पर्यटकों की संख्या 2 वर्ष में ही दोगुनी हो जाए। विदेशी पर्यटकों द्वारा खरीददारी 4 गुनी हो जाए। विदेशी पर्यटकों के आने से अभी हास्पिटलिटी सेक्टर को जो आमदनी हो रही है, वह चार गुनी हो जाए। इस क्षेत्र में रोजगार दो गुनी हो जाए।

अमेरिका के कई विश्व प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों में पढ़ाने, वहां के छात्रों को प्रति वर्ष भारत घुमाने, यहां की विरासत, विविधता दिखाने, खान-पान, रहन-सहन से परिचय कराने, इतिहास दिखाने, बताने के लिए लाने वाले भारतीय संस्कृति, इतिहास, खानपान, कला, संगीत विशेषज्ञ नवनीत रमन का कहना है कि भारत सरकार को पर्यटकों की बहुत सी परेशानियों को, समस्याओं को सुलझाने के लिए ईमानदारी से काम करने वाले लोगों को लगाना पड़ेगा, जो समस्याओं की वजह को खत्म करें। नौकरशाही व बाबूगिरी नहीं करें। छोटी-छोटी बातों के लिए पर्यटकों को बहुत ही परेशानी झेलनी पड़ती है। पर्यटन के लिए प्रसिद्ध अन्य देशों में ऐसा नहीं है। कोई पर्यटक यहां खरीददारी करने के पहले दस बार सोचता है क्योंकि कोई सामान खरदीने पर जीएटी रिफंड के लिए जो कागजी झमेला में हो रहा है, उसके चक्कर में वह नहीं पड़ना चाहता। वह एक बार सामान खरीदे, फिर उसका बिल आदि सहेज कर रखे। फिर सामान व बिल तथा अपने सारे दस्तावेज ले जाकर एयरपोर्ट के काउंटर पर लाइन में लगकर दिखावे। वहां पर बहसबाजी करे। यदि काउंटर वाला कोई अड़ंगा लगा दे , तो अलग से परेशानी। यह सब कोई पर्यटक क्यों करे। इसलिए सरकार को कोई ऐसा रास्ता निकालना चाहिए, जिससे आसानी से पर्यटक सामान खरीद सकें और उनका जीएसटी रिफंड बिना देरी के सीधे उनके खाते में ट्रांसफर हो जाए। उनका कहना है कि विदेशी सैलानी जो जापान जाते हैं उनमें 40 प्रतिशत खरीददारी करते हैं, यूरोपीय देशों व सिंगापुर में 36 प्रतिशत खरीददारी करते हैं और भारत में मात्र 20 प्रतिशत करते हैं। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि इतने बड़े और विविधता वाले देश भारत में विदेशी सैलानियों के कम आने और जो आते हैं उनके द्वारा भी कम खरीददारी करने से, भारत की अर्थव्यस्था को कितने हजार करोड़ रुपये का सालाना नुकसान हो रहा है।

Updated : 2018-07-30T16:57:21+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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