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तीन तलाक के मुद्दे पर मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ खड़ी है कांग्रेसः मीनाक्षी लेखी

तीन तलाक के मुद्दे पर मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ खड़ी है कांग्रेसः मीनाक्षी लेखी
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नई दिल्ली। लोकसभा में शादीशुदा मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से निजात दिलाने संबंधी मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक 2018 पर विपक्षी सदस्यों की आपत्तियों को खारिज करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सदस्य व अधिवक्ता मीनाक्षी लेखी ने कहा कि आजादी के 70 साल बाद भी तीन तलाक की कुप्रथा जारी है। कांग्रेस पार्टी ने मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए कोई कदम नही उठाया और वह आज भी मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ खड़ी है जो शर्मनाक है।

चर्चा के दौरान विपक्षी सदस्य सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के अधिकार के बारे में भाजपा के रवैये को लेकर सवाल पूछते रहे। इस पर लेखी ने कहा कि सबरीमाला विवाद और तीन तलाक का मुद्दे में कोई समानता नही है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि सबरीमाला प्रकरण में वह कांग्रेस सदस्य शशि थरुर के विचार पढ़ लें जिससे उनके भ्रम दूर हो जाएंगे।

उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता और समान धार्मिक कर्मकांड दो अलग-अलग बाते हैं। विवाह और तलाक जैसे मामलों में समानता की बात वांछनीय है लेकिन कौन किस धर्म में कौन सा कर्मकांड अपनाया जाएगा यह उस धर्म का अधिकार है। उन्होंने कहाकि किस व्यक्ति का दाह संस्कार होगा और किसे दफनाया जाएगा यह उस धर्म के नियमों से ही तय होगा।

भाजपा सदस्य ने कुरान और इस्लामिक धर्म ग्रंथों को उद्धृत करते हुए कहा कि इसमें तलाक-ए-बिद्दत को जायज नही ठहराया गया है। स्वयं पैगंबर हजरत मुहम्मद भी इसके खिलाफ थे। उन्होंने कहा कि केवल मुसलमानों का हनफी फिरका ही तलाक-ए-बिद्दत को मान्यता देता है। दुर्भाग्य से ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में हनफी फिरके के लोगों का ही बहुमत है इस कारण वह मुस्लिम महिलाओं पर यह कुप्रथा थोपते हैं। लेखी ने कहा कि इस बोर्ड का कोई वैधानिक अधिकार नही है और कांग्रेस ने ही इसे खड़ा किया है।

मीनाक्षी लेखी ने जनवरी 2017 से लेकर दिसम्बर तक तीन तलाक के आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि इस अवधि में देश के विभिन्न राज्यों में ऐसे 430 मामले सामने आए जिनमें से 229 न्यायालय के फैसले से पहले और 201 उसके बाद आए। उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक 246 मामले सामने आए। उन्होंने कहा कि राज्य में 40 शरिया अदालतें चल रही हैं जो मुस्लिम महिलाओं के हितों पर आघात करती हैं।

इससे पूर्व चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस की कांग्रेस की सुष्मिता देव ने विधेयक का पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि यह सरकार विवाह और तलाक संबंधी दीवानी मामले को फौजदारी मामले में बदलने की कोशिश कर रही है। इससे मुस्लिम महिलाओं को न्याय नही मिलेगा बल्कि उनकी परेशानी और बढ़ेगी। मुस्लिम पुरुष अपराधी बना दिए जाएंगे और जेल में वह इस स्थिति में नही होंगे कि अपनी पत्नी और बच्चों को भरण पोषण का भत्ता दे सकें।

Updated : 2019-01-05T15:07:30+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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