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माल्या-जेटली मुलाकात पर मचे घमासान के बीच सीबीआई ने बढ़ाया जांच का दायरा

माल्या-जेटली मुलाकात पर मचे घमासान के बीच सीबीआई ने बढ़ाया जांच का दायरा
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नई दिल्ली। संसद भवन में शराब कारोबारी व बैंक कर्ज मामले के भगोड़ा विजय माल्या व वित्त मंत्री अरुण जेटली के बीच हुई कथित मुलाकात को लेकर मचे घमासान की आंच में अब कांग्रेस के कुछ बड़े नेता व वित्त मंत्रालय में कार्यरत कुछ तत्कालीन अधिकारी झुलस सकते हैं। सीबीआई ने माल्या लोन मामले में जांच की सीमा बढ़ा दी है। इस बीच एक अंग्रेजी समाचार चैनल की ओर से प्रस्तुत माल्या लिखित पत्र के मुताबिक माल्या ने बैंक से उसकी कंपनी को स्वीकृत कर्ज के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की प्रशंसा की थी। इस पत्र में माल्या ने आगे लिखा है कि प्रधानमंत्री ने माल्या को अपने सलाहकार टीकेए नैयर से बात करने को कहा। माल्या ने एेसा ही किया और नैयर ने संबंधित मंत्रालय के अधिकारियों से बात की। उनके बात करते ही माल्या को राहत मिल गई। अब सवाल है कि क्या सीबीआई नैयर से भी पूछताछ करेगी। साथ ही इस धन्यवाद वाचक पत्र को जांचकर्ताओं की ओर से सिंह द्वारा बैंकों पर दबाव डालने के रूप में लिया है। इस बीच सीबीआई के सूत्र यह भी बता रहे हैं कि सिंह से भी पूछताछ संभव है।

उधर, जानकारी के मुताबिक सीबीआई विजय माल्या व वित्त मंत्रालय के कुछ अधिकारियों के बीच ई-मेल पर किए संवाद पर भी संजीदा है। उल्लेखनीय है कि एजेंसी ने जांच के दौरान इस तरह के लगभग एक लाख से ज्यादा ई-मेल संवाद इकट्ठा किए थे। इसलिए एजेंसी अब इन संवादों को खंगाल रही है और विजय माल्या से यूपीए के मंत्रियों व वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के संबंधों सूत्रों को जोड़ने पर विचार कर रही है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व सीबीआई ने कुछ अधिकारियों को गवाह की श्रेणी में रखा था। सूत्रों के मुताबिक इन्हें अब मामले का अभियुक्त भी बनाया जा सकता है। इन सभी अधिकारियों ने माल्या के लोन रिस्ट्रक्चरिंग में मदद की थी। सीबीआई सूत्रों के मुताबिक इसके अधिकारियों ने वित्त मंत्रालय से संपर्क कर संबंधित दस्तावेजों को भी संग्रहित कर लिया है।

उल्लेखनीय है कि लोन रिस्ट्रक्चरिंग एक एेसी प्रक्रिया है जिसके तहत व्ययसाय के किसी क्षेत्र से अगर राशि की वापसी नहीं हो पाती है तो उस क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों को बैंक की ओर से छूट दी जाती है। साथ ही कंपनियों को आगे लोन दिया जाता है। हालांकि माल्या के मामले में बैंक ने इस प्रक्रिया में भी जान-बूझकर गलती की क्योंकि व्यवसाय क्षेत्र की बजाय सिर्फ माल्या के कंपनी को लोन दिया गया।

उधर, विजय माल्या की ओर से पैदा किए विवाद की ताप ने देश की राजनीतिक गलियारों को पूरी तरह गर्म कर दिया है। कल कांग्रेस पार्टी के पूर्व नेता शहजाद पूनावाला ने ट्विट कर कहा था कि राहुल गांधी 2013 के दौरान नीरव मोदी की कॉकटेल पार्टी में गए थे। पूनावाला ने कहा कि कहीं यह पार्टी नीरव के लोन को मंजूरी करवाने का माध्यम तो नहीं थी जबकि इलाहाबाद बैंक के पूर्व निदेशक के द्वारा इस लोन को लेकर आशंका जाहिर की गई थी।

Updated : 2018-09-17T06:31:59+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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