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बीजेपी को तीन राज्यों में मिले नये मददगार

बीजेपी को तीन राज्यों में मिले नये मददगार

नई दिल्ली। तमिलनाडु , गुजरात व उ.प्र. में भाजपा को कई मददगार मिल गये। खानदानी राजनीतिक झगड़ों के कारण ऐसा संभव हुआ। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के संस्थापक करुणानिधि की मृत्यु के बाद पार्टी पर कब्जा के लिए उनके बड़े बेटे एमके अलगिरी और उससे छोटे बेटे स्टालिन में झगड़ा हुआ। स्टालिन ने पार्टी पदाधिकारियों की बैठक बुलाई। जिसमें स्टानिल को द्रमुक का अध्यक्ष चुन लिया गया। इसमें उनकी सौतेली बहन कनिमोझी ने मदद की। लेकिन इनकी एक और बहन सेल्वी बड़े भाई एमके अलगिरी के साथ है। अलगिरी अपनी अलग पार्टी बना रहे हैं। तमिलनाडु के मदुरै क्षेत्र व उसके आस-पास के इलाके में उनका अच्छा प्रभाव है।

द्रमुक नेताओं का कहना है कि स्टालिन की कांग्रेस पार्टी के साथ तालमेल की बातचीत चल रही है। वह कांग्रेस के साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं और उनके बड़े भाई एमके अलगिरी भाजपा के साथ तालमेल कर सकते हैं। इस बारे में तमिलनाडु के वरिष्ठ पत्रकार वैंकट का कहना है कि अलगिरी केवल सौदेबाजी कर रहे हैं। उन्होंने अपने छोटे भाई स्टालिन को संदेश भेजवाया है कि यदि वह पार्टी में बुलाते हैं , सम्मान व पद देते हैं तो वापस पार्टी में आ जाऊंगा। अभी यह सब चलेगा । वैसे तो आगामी लोकसभा चुनाव में अधिक सीटें द्रमुक को ही मिलने की संभावना है। इसलिए भी अलगिरी की मजबूरी छोटे भाई स्टालिन को अध्यक्ष मान पार्टी में बने रहने की होगी।

उधर गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला राज्य सभा चुनाव के समय कांग्रेस से अलग हो गये थे। उनका बेटा व पूर्व विधायक महेन्द्र वाघेला और समधी बलवंत सिंह राजपूत कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गये । वाघेला अब कांग्रेस व भाजपा के विकल्प की तलाश में गैर भाजपा, गैर कांग्रेसी नेताओं से राय-बात कर रहे हैं। लेकिन इनके पुत्र व समधी के भाजपा में चले जाने से भाजपा को तो फायदा होगा। इस पर गुजरात के वरिष्ठ पत्रकार डॉ.हरि देसाई का कहना है कि लगता है कि शंकर सिंह वाघेला का पिछले दिनों चला दाव फेल हो गया है। वैसे अब वह जो भी करेंगे उसका फायदा चाहे जैसे भी हो भाजपा को ही मिलना है।

इधर उ.प्र. में सपा से अलग होकर शिव पाल यादव ने अपनी नई पार्टी , "समाजवादी सेकुलर मोर्चा" का गठन कर लिया है । जिसमें वह अपने भतीजे अखिलेश यादव व उनकी पार्टी सपा से नाराज यादव व मुसलमान नेताओं को लाएंगे । उनको आगामी लोक सभा चुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा)और बहुजन समाजवादी पार्टी (बसपा)के प्रत्याशियों के विरुद्ध वोट काटने के लिए खड़ा करेंगे। यह करके भाजपा को लाभ पहुंचाएंगे। इसके बारे में वरिष्ठ पत्रकार वशिष्ठ नारायण का कहना है कि शिवपाल यादव की पार्टी वोट कटवा पार्टी होगी, जो सपा व बसपा के वोट काटकर भाजपा को लाभ पहुंचाएंगी।

Updated : 2018-09-02T16:28:36+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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