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सीआरपीएफ : वीआईपी ड्यूटी से मुक्त करने का किया आग्रह

वाजपेयी सरकार ने सीआरपीएफ को वीआईपी ड्यूटी से मुक्त करने की सिफारिश की थी

सीआरपीएफ : वीआईपी ड्यूटी से मुक्त करने का किया आग्रह

नई दिल्ली। देश के आंतरिक सुरक्षा के लिए 27 जुलाई 1939 को बनाई गई "केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल"(सीआरपीएफ) के बेहतरीन जवानों को अति महत्वपूर्ण व्यक्तियों (वीआईपी) की सुरक्षा में लगाकर इनकी क्षमता का दुरूपयोग किया जा रहा है। यह केन्द्रीय गृह मंत्रालय के अधीन है। इसका उपयोग देश व राज्यों में कानून व्यवस्था बनाये रखने, विद्रोह को खत्म करने के लिए किया जाता है। लोकसभा व राज्य विधानसभा चुनावों के समय भी इसकी भूमिका महत्वपूर्ण होती है। लेकिन कई दशक से इसके जवानों को बीआईपी सुरक्षा में लगाकर इसकी क्षमता का दुरूपयोग किया जा रहा है। अटल बिहारी वाजपेयी जब प्रधानमंत्री थे तो उन्होंने 2002 में इस पर विचार के लिए एक मंत्री समूह का गठन किया था। उस मंत्री समूह ने रिपोर्ट दिया कि वीआईपी सुरक्षा से सीआरपीएफ, भारत-तिब्बत पुलिस सीमा बल (आईटीबीपी) और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को हटाकर, केवल केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल(सीआईएसएफ) के जिम्मे कर देना ठीक रहेगा। यानि वीआईपी की सुरक्षा के लिए केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ही पर्याप्त है। अन्य सुरक्षा बल जिस कार्य के लिए बनाए गये हैं, उनको उस कार्य के लिए, उस कार्य में ही रहने दिया जाये।

पूर्व सांसद हरिकेश बहादुर का कहना है कि वीआईपी को सुरक्षा देने का निर्णय केन्द्रीय गृह मंत्रालय करता है। वही तय करता है कि किसको सुरक्षा दिया जाना चाहिए, किसको नहीं। यह किसी सत्ताधारी नेता, गैर सत्ताधारी नेता, पार्टी प्रमुख, अफसर, बाबा, जज, सेठ आदि तथाकथित अति महत्वपूर्ण व्यक्तियों के जीवन के खतरे को देख कर दिया जाता है। लेकिन अब यह स्टेटस सिंबल हो गया है। इसलिए हर ऐरा-गैरा, नत्थू-खैरा जुगाड़ लगाकर इसे पाने की कोशिश करने लगा है।इससे सुरक्षा बलों के जवानों का मनोबल भी गिर रहा है।

सो, वाजपेयी सरकार के समय 2002 के मंत्रिसमूह की रिपोर्ट / सिफारिश को आधार बनाकर सीआरपीएफ ने कई वर्षों से केन्द्रीय गृह मंत्रालय को वीआईपी सुरक्षा से मुक्त करके जिस कार्य के लिए यह पुलिस बल बनाई गई है उस कार्य में लगाने का आग्रह किया जा रहा है। लेकिन गृह मंत्रालय और केन्द्र सरकार सुन ही नहीं रहे हैं। सीआरपीएफ की इस गुजारिश पर आंख मूंदे हुए है। इस वर्ष नवम्बर में वीआईपी सुरक्षा का रिव्यू किया जाना है। सीआरपीएफ ने इसके पहले ही , फिर से अपने को वीआईपी सुरक्षा से मुक्त करने का याद दिलाया है।

सूत्रों के मुताबिक सीआरपीएफ के जवान फिलहाल भाजपा अध्यक्ष अमित शाह सहित 76 व्यक्तियों की सुरक्षा में तैनात हैं। आईटीवीपी के जवान 18 वीवीआईपी की सुरक्षा में तैनात हैं, जिनमें सर्वोच्च न्यायालय के जज,जम्मू-कश्मीर के नेता आदि हैं। एनएसजी के जवान 15 वीआईपी की सुरक्षा में तैनात हैं।

राष्ट्रपति को तो उनका अपना विशेष सुरक्षा बल होता है,जो उनको सुरक्षा प्रदान करता है। प्रधानमंत्री, पूर्व पर्धानमंत्री व उनके परिजनों, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पत्नी व यूपीए की चेयरपरसन सोनिया गांधी, उनके पुत्र व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी , पुत्री प्रियंका गांधी व परिजनों को स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (एसपीजी) की सुरक्षा मिली हुई है।

जिन अति महत्वपूर्ण व्यक्तियों को "जेड प्लस" श्रेणी की सुरक्षा मिली होती है, उनकी सुरक्षा में 38 सुरक्षा कर्मी तैनात रहते हैं। जिनको "जेड" श्रेणी की सुरक्षा होती है उनको 24,जिनको "वाई" श्रेणी की सुरक्षा होती है उनको 11, जिनको "एक्स" श्रेणी की सुरक्षा होती है उनको 2 सुरक्षा गार्ड मिले होते हैं।

जिस पर एक वर्ष में देश की गरीब जनता का लगभग 390 करोड़ रुपये खर्च होता है। इस पर भी हालत यह है कि हर वर्ष वीआईपी की संख्या बढ़ती ही जा रही है। ऐसे में सीआरपीएफ का केन्द्र सरकार से वीआईपी ड्यूटी से मुक्ति का आग्रह उचित है। पूर्व आईपीएस अफसर प्रकाश सिंह जो पुलिस फोर्स रिफार्म पर लगातार लिखते, सरकार से मांग करते रहे हैं, का कहना है कि अब तो बीआईपी सुरक्षा के नाम पर सुरक्षा बलों का दुरूपयोग किया जा रहा है। सीआरपीएफ का वीआईपी ड्यूटी से मुक्त करने का आग्रह बिल्कुल जायज है। और जब भाजपा की वाजपेयी सरकार द्वारा गठित मंत्री समूह ने अपनी रिपोर्ट में इसकी सिफारिश की है, तो भाजपा की वर्तमान सरकार द्वारा अब तक इस पर अमल नहीं करना सबको अचरज में डाल रहा है।

Updated : 2018-08-28T15:21:45+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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