मध्य प्रदेश में कोचिंग संस्थानों के लिए नया कानून लागू होगा। रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा, ₹25 हजार जुर्माना लगेगा और फीस रिफंड भी देना होगा।
मध्य प्रदेश में कोचिंग संस्थानों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य में जल्द ही ‘कोचिंग संस्थान विनियमन अधिनियम’ लागू किया जाएगा, जिसके तहत हर कोचिंग सेंटर का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। बिना पंजीकरण संचालन करने पर 25 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा।
उच्च शिक्षा विभाग ने इस कानून का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है, जिसे अगले विधानसभा सत्र में मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य कोचिंग सेक्टर को एक कानूनी ढांचे में लाना और छात्रों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
कोचिंग सेक्टर पर पहली बार सख्त कानूनी नियंत्रण
अब तक प्रदेश में कोचिंग संस्थानों पर कोई सख्त और एकीकृत कानून नहीं था। इसी वजह से कई शहरों में बिना नियमों के कोचिंग हब तेजी से बढ़े हैं। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे शहरों में हजारों कोचिंग संस्थान संचालित हो रहे हैं, जहां फीस, सुविधाओं और पढ़ाई के स्तर को लेकर लगातार शिकायतें मिलती रही हैं।
नए कानून में क्या-क्या होगा बदलाव
प्रस्तावित कानून में कई सख्त प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिनका सीधा असर कोचिंग संस्थानों और छात्रों दोनों पर पड़ेगा। हर कोचिंग सेंटर का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा और बिना पंजीकरण संचालन अवैध माना जाएगा। शिक्षकों के लिए न्यूनतम योग्यता ग्रेजुएशन तय की गई है। किसी भी आपराधिक रिकॉर्ड वाले व्यक्ति को शिक्षक नहीं बनाया जा सकेगा। 16 वर्ष से कम उम्र के छात्रों का नामांकन नहीं किया जाएगा और दाखिले के लिए कम से कम 10वीं पास होना जरूरी होगा।
फीस और रिफंड पर सख्त नियम
सबसे बड़ा बदलाव फीस व्यवस्था को लेकर है। कोर्स के दौरान फीस बढ़ाई नहीं जा सकेगी। अगर कोई छात्र बीच में पढ़ाई छोड़ता है, तो बची हुई अवधि की फीस 10 दिनों के भीतर रिफंड करनी होगी। भ्रामक विज्ञापनों जैसे 100 प्रतिशत चयन या गारंटीड रैंक जैसे दावों पर पूरी तरह रोक लगा दी जाएगी।
छात्रों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर फोकस
नए कानून में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता दी गई है। हर कोचिंग संस्थान को काउंसलिंग और मनोवैज्ञानिक सहायता की व्यवस्था करनी होगी। संस्थानों को छात्रों को वैकल्पिक करियर विकल्पों की जानकारी देना भी अनिवार्य होगा। कक्षाओं के समय को भी नियंत्रित किया जाएगा और दिन में अधिकतम 5 घंटे की कोचिंग की सिफारिश की गई है।
वेबसाइट पर देनी होगी पूरी जानकारी
हर कोचिंग संस्थान को अपनी वेबसाइट पर पारदर्शिता सुनिश्चित करनी होगी। इसमें शिक्षकों की योग्यता, फीस स्ट्रक्चर, कोर्स डिटेल्स, रिफंड पॉलिसी और हॉस्टल सुविधाओं की पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी होगी।
क्यों जरूरी हुआ यह कानून
हाल के वर्षों में कोचिंग सेक्टर में तेजी से विस्तार के साथ कई गंभीर समस्याएं सामने आई हैं। बिना रेगुलेशन के चल रहे संस्थानों पर नियंत्रण की मांग लगातार बढ़ रही थी। सुप्रीम कोर्ट ने भी राज्यों को कोचिंग संस्थानों के लिए नियम बनाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद केंद्र सरकार ने मॉडल गाइडलाइन भेजी थी, लेकिन मध्य प्रदेश में इसे पूरी तरह लागू नहीं किया जा सका। हाईकोर्ट में भी इस मुद्दे पर याचिका लंबित है, जिसमें कोचिंग संस्थानों के बढ़ते दबाव और अनियमितताओं पर सवाल उठाए गए हैं।
छात्र आत्महत्याओं के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश में छात्र आत्महत्याओं के मामले गंभीर रूप से बढ़े हैं। यही कारण है कि कोचिंग सेक्टर पर सख्त नियंत्रण की जरूरत महसूस की जा रही है। नया कानून लागू होने के बाद उम्मीद है कि कोचिंग संस्थानों में पारदर्शिता बढ़ेगी और छात्रों के हितों की सुरक्षा मजबूत होगी।