ISRO पहली बार आम नागरिकों के लिए एस्ट्रोनॉट कैडर खोलने जा रहा है। गगनयान मिशन में STEM एक्सपर्ट्स को मौका मिल सकता है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) पहली बार अपने एस्ट्रोनॉट कैडर को आम नागरिकों के लिए खोलने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कदम भारत के मानव अंतरिक्ष मिशनों को विस्तार देने और अधिक विशेषज्ञता जोड़ने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।
गगनयान मिशन से पहले या उसके साथ ही इस योजना को लागू किया जा सकता है। खास बात यह है कि अब केवल सैन्य पायलट ही नहीं, बल्कि साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स (STEM) बैकग्राउंड वाले प्रोफेशनल्स भी अंतरिक्ष यात्री बनने का सपना पूरा कर सकेंगे।
क्या है ISRO का नया प्लान?
ISRO की एक समिति ने सुझाव दिया है कि भविष्य के मिशनों के लिए एस्ट्रोनॉट्स का दायरा बढ़ाया जाए। इस योजना के तहत
- आम नागरिकों को भी एस्ट्रोनॉट कैडर में शामिल किया जाएगा
- STEM एक्सपर्ट्स को प्राथमिकता मिल सकती है
- वैज्ञानिक, इंजीनियर और डॉक्टर भी बन सकेंगे अंतरिक्ष यात्री
हालांकि, इसके लिए पात्रता (Eligibility Criteria) अभी जारी नहीं की गई है।
गगनयान मिशन में क्या होगा बदलाव?
ISRO का गगनयान मिशन भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन है, जिसे 2027 तक लॉन्च करने की योजना है।
- यह लगभग 3 दिन का मिशन होगा
- 400 किमी ऊंचाई तक अंतरिक्ष यात्रा
- सुरक्षित वापसी के लिए विशेष क्रू मॉड्यूल
पहले बैच में 4 एस्ट्रोनॉट्स शामिल हैं, जो भारतीय वायुसेना के टेस्ट पायलट हैं।
दूसरे और तीसरे बैच में क्या खास?
कमेटी के प्रस्ताव के अनुसार दूसरे बैच में 4 क्रू मेंबर्स सीधे मिशन में शामिल हो सकते हैं, इसमें नागरिक और सैन्य दोनों पृष्ठभूमि के लोग शामिल होंगे। जबकि तीसरे बैच में 12 एस्ट्रोनॉट्स तक संख्या बढ़ाई जा सकती है भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन जैसी बड़ी योजनाओं को ध्यान में रखकर तैयारी की जा रही है. इससे भविष्य के मिशनों में ज्यादा विशेषज्ञों की भागीदारी संभव होगी।
एस्ट्रोनॉट बनने में कितना समय लगेगा?
एक एस्ट्रोनॉट बनने की प्रक्रिया लंबी और कठिन होती है।
- चयन, ट्रेनिंग और मिशन मिलाकर लगभग 5-6 साल
- दूसरे बैच की तैयारी: 6 साल
- तीसरे बैच की तैयारी: 8 साल तक
इस दौरान उम्मीदवारों को शारीरिक, मानसिक और तकनीकी रूप से पूरी तरह तैयार किया जाता है।
क्यों अहम है यह फैसला?
ISRO का यह कदम भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में बड़ा बदलाव ला सकता है। इससे ज्यादा टैलेंट को मौका मिलेगा, रिसर्च और टेक्नोलॉजी में तेजी आएगी, अंतरिक्ष मिशनों की संख्या बढ़ सकती है. दरअसल, यह पहल भारत को वैश्विक स्पेस रेस में और मजबूत स्थिति में ला सकती है, जहां अब आम नागरिक भी अंतरिक्ष तक पहुंचने का सपना देख सकते हैं।