शहरी भारत में महिलाएं निवेश के फैसलों में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। ताजा सर्वे के मुताबिक अब 56% महिलाएं खुद निवेश निर्णय ले रही हैं, म्युचुअल फंड और शेयर बाजार में भी भागीदारी बढ़ी है।
भारत में शहरी महिलाएं अब अपने वित्तीय फैसलों में पहले से कहीं ज्यादा सक्रिय और आत्मनिर्भर होती जा रही हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक अब आधे से ज्यादा महिलाएं निवेश से जुड़े निर्णय खुद ले रही हैं। हालांकि निवेशकों में आत्मविश्वास तो बढ़ा है, लेकिन मजबूत और ठोस फाइनेंशियल प्लानिंग के मामले में अभी भी एक बड़ा अंतर बना हुआ है।
सर्वे में क्या सामने आया
साल 2025 की चौथी तिमाही में किए गए इस सर्वेक्षण में देश के 13 शहरों के 5,050 लोगों को शामिल किया गया। सभी प्रतिभागी 25 से 60 वर्ष आयु वर्ग के थे और अपने परिवार के निवेश संबंधी फैसलों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। अध्ययन में पुरुष और महिलाओं की संख्या बराबर रखी गई और इसका फोकस मुख्य रूप से शहरी, अपेक्षाकृत उच्च सामाजिक-आर्थिक वर्ग के परिवारों पर रहा।
तीन साल में बड़ा बदलाव
रिपोर्ट की सबसे प्रमुख बात यह है कि निवेश के फैसलों में महिलाओं की स्वतंत्र भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। सर्वे के अनुसार अब 56 फीसदी महिलाएं निवेश से जुड़े फैसले खुद ले रही हैं, जबकि 2022 में यह आंकड़ा 44 फीसदी था। यानी महज तीन साल में इसमें 12 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वहीं इसकी तुलना में 2025 में 68 फीसदी पुरुष भी निवेश के फैसले स्वतंत्र रूप से लेने की बात कहते हैं।
खुद सीखकर निवेश करने वाली महिलाओं की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है। अब करीब 16 फीसदी महिला निवेशकों का कहना है कि उन्होंने निवेश के बारे में स्वयं सीखा है, जो 2022 में 13 फीसदी था। वहीं निवेश के मामलों में संयुक्त रूप से फैसले लेने वाली महिलाओं का हिस्सा 52 फीसदी से घटकर 43 फीसदी रह गया है। साथ ही महिलाएं अब बाजार से जुड़े निवेश उत्पादों में भी ज्यादा सक्रिय हो रही हैं।
म्यूचुअल फंड में बढ़ती भागीदारी
म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अब करीब 46 फीसदी लोग म्यूचुअल फंड में निवेश कर रहे हैं, जबकि 2022 में यह आंकड़ा 38 फीसदी था। अध्ययन में शामिल वित्तीय उत्पादों में यह सबसे बड़ी बढ़ोतरी मानी गई है।हालांकि इसमें लिंग के आधार पर अंतर अभी भी बना हुआ है। लगभग 48 फीसदी पुरुष म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं, जबकि 44 फीसदी महिलाएं ऐसा करती हैं। इक्विटी यानी शेयर बाजार में निवेश के मामले में यह अंतर और ज्यादा दिखाई देता है। 44 फीसदी पुरुष शेयरों में निवेश करते हैं, जबकि महिलाओं में यह आंकड़ा 37 फीसदी है।
बाजार आधारित निवेश में भी बढ़ रही सक्रियता
रिपोर्ट के मुताबिक अब लगभग 51 फीसदी महिलाएं म्यूचुअल फंड और शेयरों में स्वतंत्र रूप से निवेश कर रही हैं, जबकि तीन साल पहले यह आंकड़ा 39 फीसदी था। इससे साफ है कि महिलाएं पारंपरिक बचत विकल्पों से आगे बढ़कर बाजार से जुड़े निवेश विकल्पों की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही हैं।
तेजी से बदल रहा निवेशकों का स्वरूप
कुल मिलाकर रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि भारत में निवेशकों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। महिलाएं निवेश की दुनिया में पहले से ज्यादा सक्रिय और स्वतंत्र भागीदार बन रही हैं। साथ ही लोगों की आकांक्षाएं भी बदल रही हैं—अब फोकस केवल बचत तक सीमित नहीं है, बल्कि वित्तीय आजादी और बेहतर जीवन अनुभवों पर भी है।
तकनीक भी इसमें बड़ी भूमिका निभा रही है। डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन संसाधनों के जरिए लोग निवेश के बारे में सीख रहे हैं और उस पर चर्चा कर रहे हैं। हालांकि सबसे बड़ी चुनौती अभी भी वित्तीय अनुशासन को मजबूत करना और बढ़ते आत्मविश्वास तथा व्यवस्थित वित्तीय योजना के बीच के अंतर को कम करना है।