अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आई। सेंसेक्स 900 अंक टूटा, निफ्टी भी बुरी तरह फिसला।
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और विदेशी बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के बीच सेंसेक्स और निफ्टी खुलते ही धराशायी हो गए। बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 900 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी भी 280 अंक से अधिक फिसल गया। बाजार में आई इस भारी गिरावट से निवेशकों में चिंता बढ़ गई है।
खुलते ही सेंसेक्स-निफ्टी में बड़ी गिरावट
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स शुक्रवार के 75,237 के बंद स्तर के मुकाबले गिरकर 74,807 पर खुला। कारोबार शुरू होने के कुछ ही मिनटों में यह 907 अंक टूटकर 74,330 के स्तर तक पहुंच गया।वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 23,643 के पिछले बंद स्तर से नीचे 23,482 पर खुला। इसके बाद गिरावट और तेज हुई और इंडेक्स 280 अंक से ज्यादा टूटकर 23,361 तक पहुंच गया।
इन दिग्गज शेयरों में भारी बिकवाली
बाजार में बिकवाली का असर बड़े शेयरों पर साफ दिखाई दिया। टाटा स्टील, पावर ग्रिड, मारुति, एसबीआई और ट्रेंट जैसे शेयरों में 2 से 4 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई।इसके अलावा अडानी पोर्ट्स, टाइटन और अन्य लार्जकैप शेयर भी दबाव में नजर आए। बैंकिंग, मेटल और ऑटो सेक्टर में सबसे ज्यादा कमजोरी देखी गई।
अमेरिका-ईरान तनाव बना सबसे बड़ा कारण
शेयर बाजार में आई इस बड़ी गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को लेकर सख्त बयान दिया है, जिससे मिडिल ईस्ट में नई जंग की आशंका बढ़ गई है। तनाव बढ़ने के बाद निवेशकों में डर का माहौल बन गया। वैश्विक बाजारों में भी इसका असर देखने को मिला और सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख बढ़ा।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
मिडिल ईस्ट तनाव का असर सीधे कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 112 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई, जबकि WTI क्रूड 108 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया।नेचुरल गैस की कीमतों में भी करीब 3 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया। भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए यह चिंता बढ़ाने वाला संकेत माना जा रहा है, क्योंकि इससे महंगाई और आयात बिल दोनों बढ़ सकते हैं।
विदेशी बाजारों से पहले ही मिल गए थे संकेत
भारतीय बाजार खुलने से पहले ही विदेशी बाजारों में कमजोरी दिख रही थी। गिफ्ट निफ्टी करीब 195 अंक की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था। एशियाई बाजारों में जापान का निक्केई करीब 600 अंक टूट गया। हांगकांग का हैंगसेंग, ब्रिटेन का FTSE-100, जर्मनी का DAX और फ्रांस का CAC इंडेक्स भी लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए।
निवेशकों की नजर अब आगे क्या होगा पर
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका-ईरान तनाव और बढ़ता है तथा कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले दिनों में बाजार में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने और जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने से बचने की सलाह दी जा रही है।