DII की मजबूत खरीदारी ने शेयर बाजार को संभाला, जबकि क्रूड ऑयल 100 डॉलर के ऊपर बना हुआ है। जानिए अगले हफ्ते सेंसेक्स, निफ्टी और निवेशकों के लिए क्या रह सकते हैं बड़े संकेत।
भारतीय शेयर बाजार में इस हफ्ते उतार-चढ़ाव भरा कारोबार देखने को मिला। एक तरफ घरेलू निवेशकों यानी DII की मजबूत खरीदारी ने बाजार को गिरने से बचाए रखा, वहीं दूसरी ओर अमेरिका-ईरान तनाव और 100 डॉलर के ऊपर बने कच्चे तेल के दाम ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
सेंसेक्स पूरे हफ्ते में करीब 415 अंक मजबूत हुआ, जबकि निफ्टी में लगभग 179 अंकों की बढ़त दर्ज की गई। हालांकि सप्ताह के आखिरी दो कारोबारी सत्रों में बाजार दबाव में दिखाई दिया। ऐसे में अब सवाल यही है कि आने वाला हफ्ता निवेशकों के लिए राहत लेकर आएगा या फिर बाजार में और अस्थिरता बढ़ेगी।
पूरे हफ्ते कैसी रही बाजार की चाल?
सप्ताह की शुरुआत मजबूत बढ़त के साथ हुई थी। सोमवार को सेंसेक्स 355 अंक चढ़कर 77,269 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 24,119 के पार पहुंच गया। हालांकि मंगलवार को बाजार में गिरावट देखने को मिली। इसके बाद बुधवार को जोरदार रिकवरी हुई और सेंसेक्स 941 अंक उछल गया। निफ्टी भी लगभग 300 अंक मजबूत होकर 24,331 तक पहुंचा। लेकिन सप्ताह के आखिरी दो दिनों में फिर बिकवाली बढ़ गई। शुक्रवार को सेंसेक्स 516 अंक टूटकर 77,328 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 24,176 के स्तर पर आ गया।
DII ने बाजार को कैसे दिया सहारा?
इस हफ्ते की सबसे बड़ी बात घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII की मजबूत मौजूदगी रही। निफ्टी 50 में DII की हिस्सेदारी बढ़कर 24.8% हो गई, जबकि विदेशी निवेशकों यानी FII की हिस्सेदारी घटकर 24.3% पर आ गई। दरअसल, SIP और रिटेल निवेशकों के लगातार निवेश से म्यूचुअल फंड और बीमा कंपनियों के पास खरीदारी की ताकत बनी हुई है। यही वजह रही कि विदेशी बिकवाली के बावजूद बाजार पूरी तरह टूटता नजर नहीं आया। हालांकि रुपए में कमजोरी, वैश्विक अनिश्चितता और दूसरे बाजारों में बेहतर रिटर्न के कारण FII अभी भी भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं।
क्रूड ऑयल और अमेरिका-ईरान तनाव क्यों अहम?
हार्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अभी भी कम होता नहीं दिख रहा। इसका असर सीधे अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई दे रहा है। कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है, जो भारत जैसे आयात आधारित देशों के लिए चिंता की बात मानी जाती है। अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो महंगाई, रुपये और कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है। यही वजह है कि अगले हफ्ते भी निवेशकों की नजर सबसे ज्यादा ग्लोबल संकेतों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों पर रहने वाली है।
किन सेक्टरों में रह सकती है हलचल?
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक FMCG और फार्मा सेक्टर में फिलहाल सकारात्मक माहौल दिखाई दे रहा है। आईटी शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ सकती है। वहीं बैंकिंग और ऑटो सेक्टर अभी दबाव में बने हुए हैं। SBI के कमजोर नतीजों का असर भी बैंकिंग शेयरों पर देखने को मिला। अगले सप्ताह डाबर, कोटक महिंद्रा बैंक, कोचीन शिपयार्ड, BSE और PNC इंफ्राटेक जैसे शेयरों में हलचल तेज रह सकती है। इसके अलावा कंपनियों के तिमाही नतीजे भी बाजार की दिशा तय करेंगे।
एक्सपर्ट्स क्या मान रहे?
बाजार विशेषज्ञ योगेश बागौरा के मुताबिक फिलहाल बाजार में वोलैटिलिटी बनी रह सकती है। उनका कहना है कि अगर निफ्टी 24,700 का स्तर पार करता है तो बाजार में नई तेजी देखने को मिल सकती है। हालांकि कमजोर ग्लोबल संकेतों की स्थिति में दबाव भी बढ़ सकता है। ऐसे में विशेषज्ञ फिलहाल निवेशकों को सतर्क रणनीति अपनाने की सलाह दे रहे हैं।
अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले वित्तीय सलाहकार की सलाह जरूर लें।