भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स 1092 अंक टूट गया जबकि निफ्टी 23,600 के नीचे बंद हुआ। निवेशकों को करीब पांच लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
भारतीय शेयर बाजार के लिए शुक्रवार का कारोबारी सत्र काफी झटका देने वाला साबित हुआ। दिनभर उतार-चढ़ाव के बाद आखिरकार बाजार में ऐसी बिकवाली आई कि सेंसेक्स 1000 अंकों से ज्यादा टूटकर बंद हुआ। वहीं निफ्टी भी अहम स्तरों के नीचे फिसल गया। इस गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
मुंबई स्थित शेयर बाजार में शुक्रवार, 29 मई 2026 को आई इस गिरावट का असर सीधे निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब पांच लाख करोड़ रुपये घट गया। ऐसे में यही सवाल अब उठ रहा है कि क्या बाजार में यह सिर्फ मुनाफावसूली है या फिर आगे और दबाव देखने को मिल सकता है।
सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट
कारोबार खत्म होने तक बीएसई सेंसेक्स 1,092.06 अंक यानी 1.43 फीसदी टूटकर 74,775.74 के स्तर पर बंद हुआ। दूसरी ओर, एनएसई का निफ्टी 50 भी 359.41 अंक फिसलकर 23,547.75 पर आ गया। दरअसल, बाजार ने दिन की शुरुआत उतार-चढ़ाव के साथ की थी, लेकिन दोपहर बाद बिकवाली का दबाव अचानक बढ़ गया। इसका असर लगभग सभी सेक्टरों पर देखने को मिला। खास बात यह रही कि निफ्टी 23,600 और 23,550 जैसे अहम सपोर्ट लेवल के नीचे बंद हुआ, जिसे तकनीकी तौर पर कमजोर संकेत माना जा रहा है।
निवेशकों को बड़ा झटका, पांच लाख करोड़ साफ
बाजार में आई इस तेज गिरावट ने निवेशकों की वेल्थ पर बड़ा असर डाला। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप घटकर करीब 466 लाख करोड़ रुपये रह गया। फिलहाल, निवेशक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार का रुख कैसा रहेगा। लगातार ऊंचे स्तर पर पहुंचने के बाद अब मुनाफावसूली का दबाव साफ दिखाई दे रहा है। कई निवेशकों ने दिन के आखिर में तेजी से अपने शेयर बेचे, जिससे गिरावट और बढ़ गई।
पावर ग्रिड और इंडिगो समेत कई शेयर टूटे
आज की गिरावट में पावर सेक्टर और एविएशन कंपनियों के शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। पावर ग्रिड के शेयर करीब चार फीसदी तक टूट गए। वहीं इंडिगो के शेयरों में भी लगभग तीन फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि केवल यही दो कंपनियां नहीं, बल्कि बैंकिंग, आईटी और मेटल सेक्टर के कई दिग्गज शेयर भी लाल निशान में बंद हुए। ऐसे में छोटे निवेशकों के बीच बेचैनी बढ़ गई है।