सेबी प्रमुख ने PMS नियमों की समीक्षा के संकेत दिए। निवेशकों की सुरक्षा, पारदर्शिता और गवर्नेंस पर फोकस, नियमों में बड़े बदलाव संभव।
मुंबई से आई एक अहम खबर ने हाई नेटवर्थ निवेशकों और फंड मैनेजरों का ध्यान खींच लिया है। Securities and Exchange Board of India (सेबी) के चेयरमैन Tuhin Kanta Pandey ने संकेत दिए हैं कि पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) से जुड़े नियमों की व्यापक समीक्षा की जाएगी। बाजार के जानकार मान रहे हैं कि अगर नियमों में बदलाव होता है, तो यह इस सेगमेंट के कामकाज और निवेश रणनीतियों पर बड़ा असर डाल सकता है।
क्यों जरूरी हुई समीक्षा?
सेबी ने 2020 में PMS के लिए मौजूदा नियम बनाए थे। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में निवेश का स्वरूप तेजी से बदला है। नए उत्पाद आए हैं, जोखिम लेने की प्रवृत्ति बढ़ी है और निवेशकों की उम्मीदें भी बदली हैं। इसी पृष्ठभूमि में सेबी यह देखना चाहती है कि क्या मौजूदा नियम आज के कारोबारी माहौल के अनुरूप हैं या नहीं। सेबी का स्पष्ट लक्ष्य है निवेशकों का पैसा सुरक्षित रहे, पारदर्शिता बनी रहे और फंड मैनेजरों की जवाबदेही तय हो।
तेजी से बढ़ता PMS सेगमेंट
PMS ऐसी सेवा है जिसमें हाई नेटवर्थ निवेशकों (HNI) का पैसा पेशेवर फंड मैनेजर अलग-अलग रणनीतियों के तहत निवेश करते हैं। यह म्यूचुअल फंड से अलग होता है क्योंकि इसमें निवेश अधिक केंद्रित और कस्टमाइज्ड होता है। 31 जनवरी तक PMS का प्रबंधनाधीन धन (AUM) लगभग 105 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वित्त वर्ष 2021 से इसमें करीब 17% का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) दर्ज किया गया है। ग्राहकों की संख्या भी 2022 से बढ़कर करीब 2.15 लाख तक पहुंच चुकी है। इतनी तेज वृद्धि किसी भी रेगुलेटर को सतर्क करने के लिए काफी है।
क्या बदल सकते हैं नियम?
आंतरिक नियंत्रण पर जोर
तुहिनकांत पांडे ने साफ कहा कि जिन PMS योजनाओं में निवेश केंद्रित और “बड़े दांव” वाले होते हैं, वहां जोखिम भी अधिक होता है। ऐसे में कंपनियों के भीतर मजबूत आंतरिक नियंत्रण प्रणाली बेहद जरूरी है। संभावित बदलावों में शामिल हो सकते हैं
- अलग-अलग बिजनेस यूनिट्स के बीच स्पष्ट विभाजन
- मजबूत कॉर्पोरेट गवर्नेंस
- अनुशासित और पारदर्शी डॉक्यूमेंटेशन
- व्यवसाय के आकार के अनुरूप पर्याप्त स्टाफिंग
अगर ये नियम सख्त होते हैं, तो छोटे PMS खिलाड़ियों के लिए अनुपालन लागत बढ़ सकती है।
निवेशकों के लिए क्या मायने?
निवेशकों के लिए यह खबर दो तरह से देखी जा रही है। एक तरफ, सख्त नियमों से पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ेगी। दूसरी तरफ, अगर जोखिम वाले रणनीतिक निवेशों पर नियंत्रण बढ़ा, तो संभावित रिटर्न की प्रकृति भी बदल सकती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि सेबी का कदम लंबी अवधि में सेगमेंट को और परिपक्व और विश्वसनीय बनाएगा।