सरकार ने 16 मई से पेट्रोल के निर्यात पर 3 रुपये प्रति लीटर विंडफॉल टैक्स लगा दिया है। वहीं डीजल और ATF के निर्यात शुल्क में कटौती की गई है। जानिए इसका असर आम लोगों और तेल कंपनियों पर क्या पड़ेगा।
Ministry of Finance ने पेट्रोल और डीजल के निर्यात को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने 16 मई से पेट्रोल के निर्यात पर 3 रुपये प्रति लीटर का विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क यानी विंडफॉल टैक्स लगा दिया है। वहीं डीजल और विमानन ईंधन ATF के निर्यात शुल्क में राहत दी गई है।
सरकार के इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या अब देश में पेट्रोल-डीजल महंगा होगा? फिलहाल वित्त मंत्रालय ने साफ किया है कि घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। यानी आम उपभोक्ताओं के लिए अभी राहत बनी हुई है।
आखिर क्यों लगाया गया पेट्रोल पर विंडफॉल टैक्स?
दरअसल, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-इजराइल-ईरान संकट के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। ऐसे में सरकार को आशंका है कि तेल कंपनियां ज्यादा मुनाफे के लिए घरेलू सप्लाई कम करके निर्यात बढ़ा सकती हैं।
इसी खतरे को देखते हुए पेट्रोल के निर्यात को नियंत्रित करने के लिए यह विंडफॉल टैक्स लगाया गया है। सरकार चाहती है कि घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनी रहे और अचानक सप्लाई संकट न खड़ा हो। हालांकि, पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर लगने वाला सड़क एवं बुनियादी ढांचा उपकर फिलहाल शून्य कर दिया गया है।
डीजल और ATF पर सरकार ने क्यों दी राहत?
सरकार ने डीजल के निर्यात शुल्क को 23 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 16.5 रुपये कर दिया है। वहीं विमानन टरबाइन ईंधन यानी ATF पर शुल्क 33 रुपये से घटाकर 16 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया।
अब समझिए, इसका फायदा खास तौर पर तेल कंपनियों और एविएशन सेक्टर को मिल सकता है। पिछले कुछ महीनों में लगातार बढ़ते शुल्क की वजह से निर्यात लागत बढ़ रही थी। ऐसे में यह कटौती कंपनियों के लिए राहत मानी जा रही है।
पिछले महीनों में कई बार बदले गए शुल्क
फिलहाल यह पहला मौका नहीं है जब सरकार ने ईंधन निर्यात शुल्क में बदलाव किया हो। पिछले कुछ महीनों में इसकी कई बार समीक्षा की गई है।
30 अप्रैल की समीक्षा में डीजल पर 23 रुपये और ATF पर 33 रुपये प्रति लीटर शुल्क तय किया गया था। इससे पहले 11 अप्रैल को यह शुल्क और भी ज्यादा बढ़ाकर क्रमशः 55.5 रुपये और 42 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया था।
यानी सरकार लगातार वैश्विक हालात और कच्चे तेल की कीमतों को देखते हुए टैक्स स्ट्रक्चर में बदलाव कर रही है।
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
फिलहाल सरकार ने साफ कर दिया है कि घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया है। ऐसे में फिलहाल आम लोगों को सीधे तौर पर कीमत बढ़ने का असर नहीं झेलना पड़ेगा।
हालांकि, अगर पश्चिम एशिया संकट और गहराता है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ती हैं, तो आने वाले समय में ईंधन बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। यही वजह है कि सरकार अभी से निर्यात और घरेलू सप्लाई के बीच संतुलन बनाने की रणनीति पर काम करती दिख रही है।