भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम चरण में पहुंच गया है। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि डील का 99% काम पूरा हो चुका है। जानिए दोनों देशों को इससे क्या बड़े फायदे मिल सकते हैं।
भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ता अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते का 99 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और अब केवल अंतिम एक प्रतिशत पर काम चल रहा है।
मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सर्जियो गोर ने कहा कि दोनों देश इस समझौते को लेकर बेहद आशावादी हैं। उनके मुताबिक यह व्यापार समझौता न केवल भारत और अमेरिका के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी इसके दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।
भारत-अमेरिका संबंधों के लिए क्यों अहम है यह डील?
दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। ऐसे में प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को दोनों देशों के रिश्तों में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। सर्जियो गोर ने कहा कि भारत और अमेरिका का संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। उनका मानना है कि आने वाले वर्षों में यह साझेदारी वैश्विक अर्थव्यवस्था और तकनीकी विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के भारत दौरे का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच बढ़ता संवाद इस रिश्ते की गंभीरता को दर्शाता है।
निवेश, रोजगार और तकनीक को मिल सकता है बड़ा बढ़ावा
अमेरिकी राजदूत के अनुसार प्रस्तावित समझौते से दोनों देशों को आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की कई बड़ी कंपनियां भारत में निवेश बढ़ा रही हैं, जिससे रोजगार सृजन, तकनीकी विकास और औद्योगिक विस्तार को गति मिल सकती है। Amazon, Microsoft और Google जैसी वैश्विक कंपनियों का भारत में बढ़ता निवेश भी इसी व्यापक आर्थिक सहयोग का हिस्सा माना जा रहा है। यही वजह है कि उद्योग जगत इस समझौते को भारत की आर्थिक वृद्धि और विदेशी निवेश के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मान रहा है।
AI, दवा उद्योग और सप्लाई चेन पर भी फोकस
सर्जियो गोर ने बताया कि भारत और अमेरिका आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल तकनीक और फार्मास्युटिकल सेक्टर में मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि फरवरी 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच शुरू की गई TRUST पहल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस पहल का उद्देश्य रणनीतिक तकनीकों, भरोसेमंद सप्लाई चेन और एआई विकास को बढ़ावा देना है। गोर ने यह भी कहा कि अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली करीब 40 प्रतिशत जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति भारत से होती है। ऐसे में स्वास्थ्य क्षेत्र में दोनों देशों की साझेदारी पहले से ही काफी मजबूत मानी जाती है।
परमाणु ऊर्जा और क्रिटिकल मिनरल्स पर बढ़ेगा सहयोग
व्यापार समझौते के अलावा दोनों देश नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। अमेरिकी राजदूत ने कहा कि आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में साझेदारी और मजबूत होने की संभावना है। इसके साथ ही भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में क्रिटिकल मिनरल्स फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर हुए हैं। इसका उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा और उन्नत तकनीकों के लिए आवश्यक खनिजों की आपूर्ति को सुरक्षित बनाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर, रक्षा उत्पादन और हाई-टेक उद्योगों के लिए क्रिटिकल मिनरल्स बेहद अहम भूमिका निभाने वाले हैं।
चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति?
सर्जियो गोर के बयान का एक महत्वपूर्ण पहलू सप्लाई चेन को लेकर भी रहा। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका ऐसे नेटवर्क विकसित कर रहे हैं जो वैश्विक बाजार में किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता को कम कर सकें हालांकि उन्होंने किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन माना जा रहा है कि यह रणनीति वैश्विक सप्लाई चेन में चीन के वर्चस्व को संतुलित करने की व्यापक कोशिश का हिस्सा हो सकती है।