भारतीय मसालों का निर्यात 18 लाख टन के पार पहुंच गया है। वित्त वर्ष 2025 में 4.72 अरब डॉलर का रिकॉर्ड कारोबार, मिर्च, जीरा और हल्दी की वैश्विक मांग में तेज बढ़ोतरी
भारत एक बार फिर दुनिया के मसाला बाजार में अपनी बादशाहत साबित करता नजर आ रहा है। पिछले वित्त वर्ष में भारत से 18 लाख टन से ज्यादा मसालों और मूल्य संवर्धित मसाला उत्पादों का निर्यात हुआ, जिसकी कुल कीमत 4 अरब डॉलर से ऊपर रही। ये आंकड़े साफ बताते हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय मसालों की मांग लगातार बढ़ रही है, और तमाम वैश्विक चुनौतियों के बावजूद यह सेक्टर मजबूती से आगे बढ़ रहा है।
भारत पहले से ही दुनिया का सबसे बड़ा मसाला उत्पादक, उपभोक्ता और निर्यातक देश है, लेकिन अब जोर सिर्फ साबुत मसालों पर नहीं, बल्कि वैल्यू-एडेड यानी मूल्य संवर्धित उत्पादों पर भी बढ़ रहा है।
200 से ज्यादा देशों तक भारतीय मसालों की पहुंच
भारतीय मसाले आज दुनिया के करीब 200 देशों तक पहुंच रहे हैं। वित्त वर्ष 2025 में कुछ बाजार भारत के लिए खास तौर पर मजबूत साबित हुए।
प्रमुख निर्यात गंतव्य
- चीन- 768.50 मिलियन डॉलर (मुख्य रूप से मिर्च का आयात)
- संयुक्त राज्य अमेरिका- 654.71 मिलियन डॉलर (मसाला तेल, अजवाइन, जीरा)
- संयुक्त अरब अमीरात - 355.41 मिलियन डॉलर
- बांग्लादेश- 340.76 मिलियन डॉलर
हालांकि निर्यात के साथ चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। कई आयातक देशों ने अब गुणवत्ता, खाद्य सुरक्षा और बाहरी तत्वों की मौजूदगी को लेकर सख्त नियम लागू कर दिए हैं। ऐसे में निर्यातकों को पहले से ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है।
मसाला बोर्ड की अहम भूमिका
भारत की इस मजबूत स्थिति को बनाए रखने में Spices Board of India की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। बोर्ड गुणवत्ता नियंत्रण, निर्यात मानकों और अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुरूप उत्पाद तैयार करने में उत्पादकों और व्यापारियों को दिशा दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आपसी तालमेल मजबूत रहा, तो भारत अपनी नंबर-वन पोजीशन बरकरार रख सकता है।
आंकड़े क्या कहते हैं
वित्त वर्ष 2024 में मसाला निर्यात 4.46 अरब डॉलर था, जो वित्त वर्ष 2025 में बढ़कर 4.72 अरब डॉलर पहुंच गया, यानी करीब 6% की वृद्धिकुल निर्यात मात्रा 1.54 मिलियन टन से बढ़कर 1.80 मिलियन टन हो गईस्वास्थ्य के प्रति बढ़ती वैश्विक जागरूकता के कारण हल्दी के निर्यात मूल्य में 51% की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई
ये मसाले बने भारत की ताकत
भारत के कुल मसाला निर्यात का करीब 76% हिस्सा कुछ चुनिंदा मसालों से आता है।
मिर्च
सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद। वित्त वर्ष 2025 में इसकी निर्यात मात्रा 19% बढ़कर 0.71 मिलियन टन हो गई, जिसकी कीमत 1.34 बिलियन डॉलर रही। चीन भारतीय मिर्च का सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है।
जीरा
मात्रा के हिसाब से दूसरा सबसे बड़ा मसाला। 0.22 मिलियन टन जीरे का निर्यात हुआ, जिसकी कीमत 732 मिलियन डॉलर रही।
हल्दी
औषधीय गुणों की वजह से दुनियाभर में मांग तेजी से बढ़ी। निर्यात मूल्य 51% बढ़कर 341 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया।
मसाला तेल और ओलियोरेसिन
ये वैल्यू-एडेड उत्पाद भारत के लिए नए अवसर खोल रहे हैं। इनका कुल निर्यात मूल्य 535.92 मिलियन डॉलर रहा।
अन्य मसाले
अदरक (0.13 मिलियन टन), धनिया और पुदीना उत्पादों की भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अच्छी पकड़ बनी हुई है।
जानकारों का मानना है. आने वाले वर्षों में भारत को साबुत मसालों के साथ-साथ प्रोसेस्ड और वैल्यू-एडेड मसालों पर ज्यादा फोकस करना होगा। इससे न सिर्फ निर्यात मूल्य बढ़ेगा, बल्कि किसानों, कुटीर उद्योगों और छोटे उद्यमियों को भी सीधा फायदा मिलेगा.भारतीय मसालों की खुशबू फिलहाल पूरी दुनिया में फैल रही है, और अगर गुणवत्ता पर यही ध्यान रहा, तो यह सुगंध लंबे समय तक बनी रह सकती है।