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EGR vs Gold ETF vs Physical Gold: Best Gold Invest

सोने में निवेश ईजीआर की एंट्री से बदलेगा निवेश का तरीका !

EGR, Gold ETF और फिजिकल गोल्ड में क्या अंतर है? जानिए सोने में निवेश के नए विकल्प, फायदे, नुकसान और किस निवेशक के लिए कौन-सा माध्यम बेहतर है।


सोने में निवेश ईजीआर की एंट्री से बदलेगा निवेश का तरीका  

ज्ञानेश पाठक

भारतीय समाज और सोने स्वर्ण का रिश्ता सदियों सदियों पुराना है। यह केवल मुनाफे या निवेश का जरिया नहीं, बल्कि हमारे रीति-रिवाजों और भावनाओं का अभिन्न हिस्सा है। त्योहारों की रौनक हो या शादियों का उल्लास, सोना हर मोड़ पर भारतीय परिवारों के सुख-दुख का साथी रहा है। एक अनुमान के मुताबिक, आज भी भारत के घरों में लगभग 25,000 टन सोना पड़ा है, जो काफी हद तक निष्क्रिय (अलमारियों में बंद) है और जिसकी देश भर में कोई एक तय कीमत भी नहीं है। लेकिन बदलते समय के साथ स्वर्ण बाजार की यह पूरी तस्वीर अब बदल रही है।

वर्ष 2024 से सरकार ने नए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को जारी करना पूरी तरह बंद कर दिया था, जिसके बाद बजट 2026 के नए नियमों ने इसके कर लाभों को भी सीमित कर दिया। दूसरी तरफ, नवंबर 2025 में सेबी ने मोबाइल ऐप्स पर मिलने वाले अनियंत्रित डिजिटल सोने को लेकर कड़ी चेतावनी जारी की थी। इस बदलते परिवेश के बीच नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के 'इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स' इंजीआर ने निवेश की दुनिया में कदम रखा है। अब देश के आम निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि सोने में निवेश का सबसे व्यावहारिक, सुरक्षित और किफायती रास्ता कौन सा है? क्या हमें सुनार की दुकान से पारंपरिक सोना खरीदना चाहिए, सालों से चल रहे एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (गोल्ड ईटीएफ) में बने रहना चाहिए या फिर नए ईजीआर को अपनाना चाहिए? आइए, इसे विस्तार से समझते हैं.

भौतिक सोना

पारंपरिक मोह और इसकी छिपी हुई भारी लागतें

पारंपरिक रूप से भारत में सोने की खरीद हमेशा से आभूषणों या सिक्कों के रूप में की जाती रही है, जिसे हम भौतिक सोना (फिजिकल गोल्ड) कहते हैं। सुनार की दुकान पर जाकर अपनी आंखों के सामने सोने को देखना और उसे छूकर महसूस करना हमेशा से भारतीयों की पहली पसंद रहा है।

बाजार के जानकार इस उपभोक्ता व्यवहार की गहराई को समझाते हुए कहते हैं। 'भारत में गहनों और सोने का अपना एक सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्व है, क्योंकि यह लोगों को 'ठोस स्वामित्व' यानी संपत्ति को छूकर महसूस करने और खुद के पास सुरक्षित रखने की वास्तविक खुशी देता है। यही कारण है कि भारतीय परिवारों में इसकी मांग हमेशा बनी रहेगी।'

इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट ईजीआर सोने का 'डीमैट' अवतार भौतिक सोने और गोल्ड ईटीएफ जैसे डिजिटल विकल्पों के बीच मौजूद इसी बड़े अंतर को भरने के लिए बाजार में इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट की शुरुआत हुई है। यह निवेश शेयर बाजार की तरह आपके डीमैट खाते में इलेक्ट्रॉनिक रूप में दिखाई देता है, लेकिन इसकी सबसे खास बात यह है कि इसके पीछे सेबी से मान्यता प्राप्त सुरक्षित सरकारी तिजोरियों में असली भौतिक सोना जमा रहता है।

यही नहीं, ईजीआर निवेशकों को काफी ज्यादा लचीलापन देता है। इसमें निवेश की शुरुआत सिर्फ 100 मिलीग्राम (0.1 ग्राम) जैसे छोटे हिस्से से भी की जा सकती है, जिसकी मौजूदा कीमत करीब 1500 से 1600 रुपये के आसपास है। इसके अलावा यह 1 ग्राम, 10 ग्राम और 100 ग्राम जैसे कई विकल्पों में उपलब्ध है।

छिपी हुई लागतों का गणित

अतिरिक्त शुल्क - सोना खरीदते ही सबसे पहले आपको 3 प्रतिशत वस्तु एवं सेवा कर देना पड़ता है। इसके अलावा जौहरी 5 प्रतिशत से लेकर 20 प्रतिशत या उससे भी अधिक 'घड़ाई शुल्क' यानी बनाने का शुल्क वसूल लेते हैं, जिसका निवेश मूल्य से कोई लेना-देना नहीं होता।

सुरक्षा की चिंता- इसे घर में रखने पर चोरी का डर बना रहता है, और बैंक लॉकर के लिए हर साल मोटा किराया देना पड़ता है।

बिक्री पर नुकसान- सबसे बड़ा झटका तब लगता है जब आप सोना बेचने जाते हैं। उस समय जौहरी पुराना घड़ाई शुल्क तो वापस नहीं ही करते, ऊपर से शुद्धता जांचने के नाम पर सोने के वजन या कीमत में भी कटौती कर लेते हैं। इसका मतलब यह है कि यदि आपका मकसद सिर्फ निवेश करना है, तो भौतिक सोना अपनी छिपी हुई भारी लागतों की वजह से काफी कमजोर सौदा साबित होता है.

ईजीआर की सबसे बड़ी खासियत

इसमें 99.9 प्रतिशत और 99.5 प्रतिशत शुद्धता वाले कड़े सरकारी मानकों का भरोसा मिलता है। यही चीज इसे गोल्ड ईटीएफ से अलग बनाती है, क्योंकि जरूरत पड़ने पर निवेशक अपने डीमैट खाते में मौजूद ईजीआर को एक्सचेंज पर सरेंडर करके सरकारी तिजोरी से असली सोने के सिक्के या बार की भौतिक डिलीवरी भी ले सकते हैं।

सलाह- कोई भी एक विकल्प हर व्यक्ति के लिए सर्वकालिक श्रेष्ठ नहीं हो सकता। सही विकल्प पूरी तरह आपकी जरूरत और निवेश के उद्देश्य पर निर्भर करता है

पारंपरिक व सामाजिक आवश्यकताओं के लिए: यदि आपका उद्देश्य सिर्फ रिटर्न कमाना नहीं बल्कि बच्चों की शादी के लिए गहने जोड़ना या त्योहारों पर शगुन के लिए सोना खरीदना है, तो भौतिक सोना आपके लिए महंगा होने के बावजूद व्यावहारिक रूप से सही है।

विशुद्ध वित्तीय निवेशकों के लिएः यदि आप म्यूचुअल फंड की तरह हर महीने छोटा-छोटा व्यवस्थित निवेश यानी सिप करना चाहते हैं, बाजार जैसी मजबूत तरलता पसंद करते हैं और सोने को कभी घर लाने का इरादा नहीं है, तो गोल्ड ईटीएफ सबसे आजमाया हुआ रास्ता है। 

आधुनिक और समझदार निवेशकों के लिए: जो डिजिटल निवेश की सुरक्षा, पारदर्शिता, शुद्धता की गारंटी और बिना घड़ाई शुल्क जैसी सुविधाएं चाहते हैं, लेकिन साथ ही यह भरोसा भी रखना चाहते हैं कि जरूरत पड़ने पर वे इस सोने को अपने घर मंगा सकें, उनके लिए ईजीआर सबसे मजबूत माध्यम है।

भविष्य की राह

सच यह है, आम निवेशकों के बीच ईजीआर को पूरी तरह लोकप्रिय होने में अभी 2 से 3 साल का समय लग सकता है। जब देश के बड़े डिस्काउंट ब्रोकर्स इसे अपने ऐप्स पर वन-क्लिक ट्रेडिंग के जरिए बेहद आसान बना देंगे, तब इसकी तरलता में भारी उछाल आएगा। इसके अलावा, जब बड़े बैंक ईजीआर को गारंटी के तौर पर स्वीकार कर इसके बदले स्वर्ण ऋण देना शुरू करेंगे, तब यह व्यवस्था भारतीय निवेशकों के लिए दीर्घकालिक संपत्ति निर्माण का सबसे पसंदीदा विकल्प बन जाएगी।

गोल्ड ईटीएफ

डिजिटल रफ्तार और इसके रास्ते की सबसे बड़ी रुकावट

जो निवेशक भौतिक सोने के झांझट, भारी घड़ाई शुल्क और चोरी के डर से बचना चाहते थे, उनके लिए पिछले एक दशक में गोल्ड

ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) एक बेहद लोकप्रिय विकल्प बनकर सामने आया है। भारतीय निवेशकों के बीच इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अप्रैल 2026 तक गोल्ड ईटीएफ का कुल प्रबंधित परिसंपत्ति बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है।

'मीरा मनी' के सह-संस्थापक आनंद के. राठी इसके फायदे और लागत के ढांचे को समझाते हुए बताते हैं कि गोल्ड ईटीएफ बाजार से जुड़े ऐसे वित्तीय साधन हैं, जो निवेशकों को शानदार सुविधा और बेहतर तरलता देते हैं। निवेशक जब चाहें, बाजार की लाइव कीमत पर इन्हें अपने ब्रोकर ऐप के जरिए सिर्फ एक क्लिक में बेच सकते हैं और पैसा सीधे अपने बैंक खाते में मंगा सकते हैं।

गोल्ड ईटीएफ की कमियां

वार्षिक खर्च: इस सुविधा के बदले फंड हाउस निवेशकों से हर साल 0.35 प्रतिशत से लेकर 0.60 प्रतिशत तक का कुल व्यय अनुपात और ट्रैकिंग चार्ज वसूलते हैं, जो सीधे आपके रिटर्न से कटता रहता है।भौतिक रूप में असंभव: गोल्ड ईटीएफ डिजिटल निवेशकों की जरूरत तो पूरी करते हैं, लेकिन इनमें एक बड़ा अंतर यह है कि आप अपने इस डिजिटल निवेश को कभी भी असली भौतिक सोने में नहीं बदल सकते।कड़ा कर नियम-टैक्स के मामले में भी यह थोड़ा सख्त माना जाता है, क्योंकि 12 महीने बाद ही इस पर 12.5 प्रतिशत की दर से दीर्घावधि पूंजीगत लाभ कर देना पड़ता




 

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