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Arbitrage Fund: Low Risk, Better Tax Returns

आर्बिट्राज फंड, आयकर के साथ जोखिम मुक्त रिटर्न

आर्बिट्राज फंड कम जोखिम में बेहतर रिटर्न और टैक्स लाभ देते हैं। जानें कैसे काम करते हैं, किसे निवेश करना चाहिए और बाजार में इनकी भूमिका क्या है।


आर्बिट्राज फंड आयकर के साथ जोखिम मुक्त रिटर्न

ज्ञानेश पाठक

यह एक प्रकार के हाइब्रिड म्यूचुअल फंड हैं। इनका मुख्य उद्देश्य एक ही एसेट की दो अलग-अलग मार्केट (कैश मार्केट और फ्यूचर्स मार्केट) में कीमतों के अंतर का लाभ उठाना है। तकनीकी रूप से ये इक्विटी फंड माने जाते हैं क्योंकि इनका 65 प्रतिशत से अधिक निवेश शेयरों में होता है, लेकिन इनका रिस्क प्रोफाइल लो-रिस्क डेट फंड जैसा होता है।

आर्बिट्राज फंड कैश-एंड-कैरी मॉडल पर काम करते हैं। फंड मैनेजर एक ही समय में दो सौदे करता है- केश मार्केट यहाँ से शेयर खरीदा जाता है। फ्यूचर मार्केट यहाँ उसी शेयर को भविष्य की एक तय कीमत पर बेच दिया जाता है।

उदाहरण से समझेः मान लीजिए कंपनी ए के शेयर की कीमत कैश मार्केट में 100 रुपए है और फ्यूचर्स मार्केट में इसकी कीमत 101 रुपए चल रही है। फंड मैनेजर 100 रुपए में शेयर खरीदेगा और साथ ही 101 रुपए में फ्यूचर्स बेच देगा। महीने के अंत (एक्सपायरी) पर दोनों बाजारों में कीमत एक समान हो जाती है। कीमत चाहे 90 रुपए हो जाए या 110 रुपए। फंड मैनेजर को इन दोनों के बीच का 1 रुपए का अंतर जिसे सौड कहते हैं मुनाफे के रूप में मिल जाता है। निवेशकों को इसमें निवेश क्यों करना चाहिए। आर्बिट्राज फांड के कई फायदे हैं जो इसे पारंपरिक निवेश विकल्पों से अलग बनाते हैं- चूंकि यहाँ खरीदारी और बिक्री एक साथ की जाती है, इसलिए बाजार ऊपर जाए या नीचे, आपके निवेश पर बहुत कम असर पड़ता है। यह उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से डरते हैं। सबसे बड़ा फायदा टैक्स का है। आर्बिट्राज फंड को इक्विटी फंड माना जाता है। अगर आप 1 साल के बाद पैसा निकालते हैं, तो 1.25 लाख रुपए तक का मुनाफा टैक्स-फ्री होता है (एलटीसीजी)। शॉर्ट टर्म (1 साल से कम) के लिए भी इस पर डेट फंड के मुकाबले कम टैक्स लगता है।

अस्थिरता में फायदेमंदः जब शेयर बाजार में बहुत अधिक उतार-चढ़ाव होता है. तो कैश और फ्यूवर्स मार्केट के बीच अंतर बढ़ जाता है। ऐसे समय में ये फंड बैंक एफडी या लिक्विड फंड से बेहतर रिटर्न दे सकते हैं।

तरलताः इन फंड्स से पैसा निकालना आसान है। आमतौर पर 1 से 3 दिनों के भीतर पैसा आपके खाते में आ जाता है, जो इसे इमरजेंसी फंड रखने के लिए भी उपयुक्त बनाता है।

किसे निवेश करना चाहिए

वे निवेशक जो 15 दिन से 6 महीने की अवधि के लिए पैसा पार्क करना चाहते हैं। जो निवेशक बचत खाता या लिक्विड फंड से बेहतर और टैक्स-एफिशिएंट रिटर्न चाहते हैं। जो शेयर बाजार में निवेश तो करना चाहते हैं लेकिन पूंजी की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं।

ध्यान दें-यदि बाजार बहुत अधिक शांत है, तो इन फंड्स का रिटर्न थोड़ा कम हो सकता है, जैसा कि मार्च 2026 की रिपोर्ट में देखा गया है।

आर्बिट्राज फंड्सः बाजार की उथल-पुथल के बीच स्थिरता का विकल्प मार्च 2026 का महीना भारतीय शेयर बाजार के लिए काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। पश्चिम एशिया के तनाव और वैश्विक अनिश्चितता ने बाजार पर भारी दबाव बनाया। जहाँ निफ्टी 50 में 12 प्रतिशत से अधिक को गिरावट देखी गई, वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांक भी लगभग 10 प्रतिशत तक टूट गए। इस नकारात्मक माहौल के बीच एडलवाइस म्यूचुअल फंड की ताजा रिपोर्ट आर्बिट्राज फंड्स की भूमिका और निवेशकों के बदलते रुझान पर प्रकाश डालती है। बाजार में गिरावट के बावजूद आर्बिट्राज फंड्स ने अपनी प्रकृक्ति के अनुरूप स्थिरता दिखाई है। ये फंड सीधे बाजार की दिशा पर निर्भर न होकर कैश और फ्यूचर मार्केट के बीच मूल्य अंतर से रिटर्न कमाते हैं।

बाजार के रुझान और निवेशकों की सतर्कताः रिपोर्ट के अनुसार, मार्च सीरीज में सिंगल स्टॉक फ्यूचर्स में 93 प्रतिशत रोलओवर देखा गया, जो दर्शाता है कि बड़े निवेशक बाजार से पूरी तरह बाहर नहीं हुए हैं। हालांकि, अन्य संकेतकों में सावधानी साफ दिख रही है। घटता ओपन इंटरेस्ट अप्रैल सीरीज के लिए ओपन इंटरेस्ट 11 प्रतिशत घटकर 4.26 लाख करोड़ रह गया है।

एयूएम में कमीः आर्बिट्राज कैटेगरी का कुल निवेश घटकर 3.16 लाख करोड़ पर आ गया है, जिसका अर्थ है कि निवेशकों ने फिलहाल वेट एंड वाँच की नीति अपनाई है।

एफआईआई की भूमिकाः विदेशी संस्थागत निवेशकों ने अपनी नेट लॉन्ग पोजीशन कम की है, जिससे बाजार में जोखिम लेने की क्षमता घटती नजर आई ।

कम बोलैटिलिटीः भले ही बाजार गिरा है, लेकिन दैनिक उतार-चढ़ाव सीमित रहने के कारण आर्बिट्राज स्प्रेड (कमाई के मौके) 57-60 बेसिस प्वाइंट के बीच ही सिमट कर रह गए। एसटीटी में वृद्धिः 1 अप्रैल 2026 से फ्यूचर्स पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स बढ़ने से रिटर्न पर मामूली दबाव आ सकता है। 

नियामकीय राहतः सेबी द्वारा डेट निवेश के नियमों में दी गई चील से फंड मैनेजरों को अतिरिक्त लचीलापन मिलेगा। भविष्य की राहः आने बाले महीनों में आरबीआई की मौद्रिक नीति, महंगाई दर और कंपनियों के चौथी तिमाही के नतीजे बाजार की दिशा तय करेंगे। यदि इन घटनाओं से बाजार में हलचल बढ़ती है, तो आर्बिट्राज फंड्स के लिए बेहतर स्प्रेड और रिटर्न के अवसर पैदा होंगे।

किसे निवेश करना चाहिए पोर्टफोलियो प्रबंधन में कुछ सलाहः आर्बिट्राज फंड उन निवेशकों के लिए एक सुरक्षित विकल्प बने हुए है जो कम जोखिम के साथ लिक्विड फंड्स से थोड़े बेहतर रिटर्न की तलाश में हैं, खासकर तब जब इक्विटी मार्केट में अनिश्चितता का दौर है.

ऐसे निवेशक जो शेयरों में निवेश तो करना चाहते हैं, मगर जोखिम लेने से डरते हैं। उनके लिए आर्बिट्राज फंड बेहतर विकल्प है। आर्बिट्राज फंड म्यूचुअल फंड की वह श्रेणी है जो शेयर बाजार की अस्थिरता का फायदा उठाकर मुनाफा कमाती है। सरल शब्दों में कहें तो यह जोखिम-मुक्त मुनाफे की रणनीति पर काम करते हैं। चूंकि इन्हें झी टी फंड की श्रेणी में रखा गया है इसलिए आयकर के वही लाभ मिलते हैं, जो इक्टिी में पैसा लगाने पर मिलते हैं। रिटर्न, एफडी अथवा लिविड फंड से थोड़ा ज्यादा मिलने की संभावना रहती है। अगर आप अपना पैसा 3-6 माह के लिए लगाने जा रहे हैं और रिस्क फी रिटर्न चाहते हैं तो आर्बिट्राज फंड बेहतर विकल्प है