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पहलगाम हमले में शहीद हुए लोंगो की शहादत पर क्रिकेट का तमाशा, BCCI बताए, क्या आतंक के साथ खेलना ही विकल्प है?
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IND vs PAK Asia Cup 2025: पहलगाम हमले में शहीद हुए लोंगो की शहादत पर क्रिकेट का तमाशा, BCCI बताए, क्या आतंक के साथ खेलना ही विकल्प है?

Pushpendra Raghuwanshi
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2 July 2025 3:18 PM IST

22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए दर्दनाक आतंकी हमले ने पूरे देश को न सिर्फ झकझोर कर रख दिया था बल्कि भारत के लिए यह काला दिन इतिहास के पन्‍नों में हमेशा के लिए दर्ज हो गया है। इस हमले में पाकिस्तानी आतंकियों ने मासूम और निहत्‍थे लोंगो को निशाना बनाते हुए एक बार फिर अपनी नापाक सोच का प्रदर्शन किया था।

इस आतंकी घटना के बाद देशभर में गुस्सा फूटा, सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक पाकिस्तान के खिलाफ आक्रोश उमड़ा, यहां तक भारत पाकिस्‍तान के बीच जंग भी हुई। लेकिन इन सबके बीच क्रिकेट जगत से जो खबर आई है, उसने हर देशभक्त नागरिक को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

आतंकी देश पाकिस्‍तान के साथ एशिया कप में क्रिकेट खेलने जा रहा है भारत

रिपोर्ट्स की मानें तो 5 सितंबर से शुरू हो रहे एशिया कप में भारत और पाकिस्तान के बीच 7 और 14 सितंबर को मुकाबले होंगे।

यह वही पाकिस्तान है, जिसके आतंकियों ने पहलगाम में हमारे जवानों की जान ली। यह वही पाकिस्तान है, जो ड्रोन हमलों से हमारी सीमाओं को लहूलुहान कर रहा है। और यही पाकिस्तान अब क्रिकेट के मैदान में हमारा "प्रतिद्वंद्वी" बनने वाला है?

BCCI जवाब दे, शहीदों की शहादत के बाद क्रिकेट जरूरी है या स्वाभिमान?

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) को अब खुलकर जवाब देना चाहिए। क्या देश की गरिमा से ज्यादा जरूरी है एक टूर्नामेंट? क्या पाकिस्तान के साथ खेलना उस देश की जनता और शहीद परिवारों का अपमान नहीं है जिसने हाल ही में अपने कई सपूत खो दिए?

क्या पहलगाम हमले में शहीद हुए लोंगो के परिवारों से किसी ने पूछा, कि क्या वे यह मैच देखना चाहेंगे? क्या उनके आंसुओं की कीमत सिर्फ एक T20 मैच भर है? जब पूरा देश पाकिस्तान से हर तरह के रिश्ते खत्म करने की बात कर रहा है, तो क्रिकेट बोर्ड क्यों रिश्तों को बनाए रखने में लगा है?

आतंकी देश के साथ मैत्री मैच क्‍यों?

पाकिस्तान आज सिर्फ एक दुश्मन देश नहीं, आतंक की फैक्ट्री बन चुका है। कश्मीर से लेकर पंजाब और अब ड्रोन के जरिए राजस्थान तक, वह लगातार भारत को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में क्या पाकिस्तान को क्रिकेट के मंच पर बराबरी का दर्जा देना समझदारी है?

कई बार सरकारें यह कहती रही हैं कि "क्रिकेट और आतंक साथ नहीं चल सकते", लेकिन अब BCCI ही इस सोच को ध्वस्त करता दिख रहा है। क्या यह आर्थिक हितों की मजबूरी है? क्या क्रिकेट की दुनिया में पाकिस्तान के साथ खेलना स्पॉन्सरशिप और कमाई का जरिया बन गया है?

क्या खेल भावना शहीदों की लाशों से बड़ी हो गई?

बीसीसीआई से ये सवाल पूछना जरूरी है

- क्या आपकी क्रिकेट डिप्लोमेसी में शहीदों की कुर्बानी का कोई मोल नहीं?

- क्या देश की भावना और सुरक्षा से बढ़कर अब टी20 मैच हो गया है?

अब वक्त है रुख साफ करने का

देश आज जवाब चाहता है। न केवल बीसीसीआई से, बल्कि उन सभी निर्णयकर्ताओं से जो पाकिस्तान के खिलाफ खेल को सामान्य समझते हैं। हम खेल के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन आतंक के साथ कोई मैच नहीं होना चाहिए। क्रिकेट शांति और सौहार्द का प्रतीक हो सकता है, लेकिन जब सामने एक आतंक समर्थक देश हो, तो वहां किसी भी प्रकार का कोई खेल नहीं होना चाहिए।

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