किराएदार जानें सच-मकान मालिक का बीमा आपके सामान को

किराएदार सावधान! मकान मालिक का बीमा आपके सामान को नहीं बचाएगा जानिए असली सच

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किराए के घर में शिफ्ट होते वक्त ज्यादातर लोग एक बड़ी गलतफहमी पाल लेते हैं। मकान मालिक ने इंश्योरेंस कराया है, तो सब कुछ सुरक्षित होगा। लेकिन सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है। अगर घर में आग लग जाए, पानी से नुकसान हो या चोरी हो जाए। तब आपका निजी सामान मकान मालिक के बीमे में कवर नहीं होता। यानी नुकसान आपका… जिम्मेदारी भी आपकी।

मकान मालिक का इंश्योरेंस क्या कवर करता है?

सीधे शब्दों में समझें तो मकान मालिक का बीमा सिर्फ “घर” को कवर करता है।  घर के अंदर के सामान की कोई सुरक्षा नहीं होती है। मकान मालिक के बीमा में बिल्डिंग का स्ट्रक्चर (दीवारें, छत), पाइपलाइन और बिजली की फिटिंग और प्राकृतिक आपदा में घर की मरम्मत शामिल है। अगर बाढ़, भूकंप या आग से मकान को नुकसान होता है, तो बीमा कंपनी मरम्मत का खर्च देती है। लेकिन आपका टीवी, लैपटॉप, फर्नीचर या ज्वेलरी इन सबकी जिम्मेदारी आपकी होती है।

किराएदार का इंश्योरेंस क्या होता है?

यहीं पर काम आता है “रेंटर्स इंश्योरेंस” या “होम कंटेंट कवर”। यह बीमा आपके निजी सामान को सुरक्षा देता है। चाहे नुकसान चोरी से हो या किसी दुर्घटना से।

 इसमें क्या-क्या कवर होता है? 

इस बीमा में इलेक्ट्रॉनिक्स (लैपटॉप, टीवी), फर्नीचर और घरेलू सामान, कपड़े और कीमती चीजें, किचन और एसी जैसे उपकरण शामिल होते हैं। मान लीजिए खाना बनाते समय आग लग गई या शॉर्ट सर्किट से नुकसान हुआ तो इसका खर्च बीमा कंपनी उठा सकती है।

एक्सपर्ट क्या कहते हैं?

इंश्योरेंस एक्सपर्ट्स का साफ कहना है कि मकान मालिक और किराएदार के बीमे में कोई टकराव (ओवरलैप) नहीं होता। यानि अगर आप अपना “कंटेंट कवर” लेते हैं, तो यह पूरी तरह आपके सामान के लिए अलग सुरक्षा देता है।

क्यों जरूरी है कंटेंट कवर?

आजकल हर घर में महंगे गैजेट्स और सामान होते हैं। एक लैपटॉप, टीवी और फर्नीचर की कीमत मिलाकर लाखों तक पहुंच जाती है। ऐसे में एक छोटी सी घटना जैसे चोरी या आग आपको बड़ा आर्थिक झटका दे सकती है। इसलिए ध्यान रखें कि मकान मालिक का बीमा आपके काम का नहीं है। अपने सामान के लिए अलग बीमा जरूरी है। साथ ही कम प्रीमियम में बड़ी सुरक्षा मिल सकती है।

कहां से ले सकते हैं यह बीमा?

भारत में कई कंपनियां किराएदारों के लिए “होम कंटेंट कवर” देती हैं, जैसे: ICICI Lombard, HDFC ERGO और Policybazaar। ये पॉलिसी किफायती होती हैं और खास तौर पर किराएदारों की जरूरत के हिसाब से बनाई जाती हैं।