1 अप्रैल 2026 से नए इनकम टैक्स नियम लागू होंगे। सै

1 अप्रैल से बदलेगा टैक्स का खेल: सैलरी से गिफ्ट तक सब पर नजर, मिडिल क्लास की जेब पर असर

Income Tax Rule Change

नया वित्त वर्ष शुरू होते ही टैक्सपेयर्स के लिए नियमों का पूरा गणित बदलने वाला है। 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए इनकम टैक्स नियम सीधे आपकी सैलरी, सुविधाओं और निवेश पर असर डालेंगे। इसका मतलब है कि टेक-होम सैलरी पर भी फर्क पड़ सकता है।

नया कानून, नया सिस्टम

इनकम टेक्स डिपार्टमेंट ऑफ इंडिया के नए ड्राफ्ट नियमों के मुताबिक, अब टैक्स कैलकुलेशन ज्यादा 'फॉर्मूला बेस्ड' होगा। यानी कंपनी से मिलने वाली सुविधाओं की वैल्यू तय करने के लिए एक तय तरीका अपनाया जाएगा। ये नियम वित्त वर्ष 2026-27 से लागू होंगे, और इसका असर आपके अगले टैक्स रिटर्न में साफ दिखेगा। 

10 बड़े बदलाव जो आपकी जेब पर असर डालेंगे

1. रिटायरमेंट फंड पर टैक्स की नई सीमाः अगर कंपनी आपके पीएफ, एनपीएस और सुपरएन्युएशन में सालभर में ₹7.5 लाख से ज्यादा डालती है, तो अतिरिक्त रकम पर टैक्स देना होगा।

2. कंपनी का घर अब ‘फ्री’ नहींः अब कंपनी द्वारा दिए गए घर की टैक्स वैल्यू शहर की आबादी के हिसाब से तय होगी। 5% से 10% तक सैलरी का हिस्सा टैक्सेबल माना जाएगा।

3. लीज पर घर के लिए अलग नियमः अगर कंपनी किराए का घर देती है, तो वास्तविक किराया या सैलरी का 10% जो कम होगा, वही टैक्सेबल होगा।

4. ऑफिस कार का इस्तेमाल पड़ेगा महंगाः 1.6 लीटर तक की कार पर ₹5,000 महीना और बड़ी कार पर ₹7,000 महीना टैक्सेबल वैल्यू जुड़ जाएगी। ड्राइवर अलग से ₹3,000।

5. गिफ्ट्स की लिमिट तयः अब सालभर में ₹15,000 तक के गिफ्ट ही टैक्स-फ्री रहेंगे, इससे ज्यादा पर पूरा टैक्स लगेगा।

6. ₹200 तक का ऑफिस खाना टैक्स-फ्रीः वर्किंग ऑवर्स में मिलने वाला खाना ₹200 प्रति मील तक टैक्स फ्री रहेगा।

7. एम्प्लॉयर लोन पर भी टैक्सः अगर कंपनी सस्ता या बिना ब्याज लोन देती है, तो उस लाभ पर टैक्स लगेगा। हालांकि ₹2 लाख तक और मेडिकल इमरजेंसी में राहत मिलेगी।

8. टैक्स-फ्री इनकम पर खर्च का नया फॉर्मूलाः अब टैक्स-फ्री इनकम से जुड़े खर्च का 1% हिस्सा ही मान्य होगा, वो भी लिमिट के साथ।

9. विदेशी डिजिटल कंपनियों पर नजरः अगर किसी विदेशी कंपनी का भारत में ₹2 करोड़ से ज्यादा बिजनेस या 3 लाख यूजर्स हैं, तो उसे टैक्स देना होगा।

10. फॉर्म-16 और सैलरी स्लिप बदलेंगीः कंपनियों को अपने सॉफ्टवेयर और सैलरी स्ट्रक्चर अपडेट करने होंगे।  इससे आपकी सैलरी स्लिप में बदलाव दिखेगा।

PARX क्या होते हैं?

सरल भाषा में समझें तो कंपनी से मिलने वाली एक्स्ट्रा सुविधाएं जैसे घर, कार, क्लब मेंबरशिप इन्हें ‘पर्र्क्स’ कहा जाता है। अब इनकी वैल्यू तय करके उस पर टैक्स लगाया जाएगा

टैक्सपेयर्स पहले से करें प्लानिंग

टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि नए नियम लागू होने से पहले अपने एम्प्लॉयर के साथ बैठकर सैलरी स्ट्रक्चर रिव्यू करना जरूरी है। कार, घर या रिटायरमेंट फंड जैसे कंपोनेंट्स को समझदारी से सेट करना अब पहले से ज्यादा अहम हो गया है। वरना सैलरी तो वही रहेगी, लेकिन हाथ में आने वाली रकम कम हो सकती है।