20 फरवरी से AI कंटेंट पर लेबल लगाना होगा ज़रूरी, डीपफेक 3 घंटे में हटाना अनिवार्य: सरकार का सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को
नई दिल्ली। अब सोशल मीडिया पर AI से बने कंटेंट को बिना पहचान दिए पब्लिश नहीं किया जा सकेगा। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने एक नया आदेश जारी किया है, जिसमें 20 फरवरी 2026 से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को सभी AI कंटेंट पर स्पष्ट लेबल लगाना होगा। इसके अलावा डीपफेक फोटो-वीडियो को 3 घंटे के अंदर हटाना भी अनिवार्य कर दिया गया है। ये नए नियम IT रूल्स 2021 में संशोधन के तहत लागू होंगे, उनका ड्राफ्ट सरकार ने 22 अक्टूबर 2025 को जारी किया था, और अब वे औपचारिक रूप से लागू करने के आदेश दे दिए गए हैं।
क्या है नया नियम?
सरकार ने साफ कहा है कि जो भी कंटेंट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जनरेट होगा, उसे प्लेटफॉर्म पर Share करने से पहले ही AI Generated के लेबल के साथ दिखाना होगा यानी यूज़र अगर कोई फोटो, वीडियो या ऑडियो Upload करता है और वो AI-Generated है, तो प्लेटफॉर्म को उस पर स्पष्ट रूप से लेबल दिखाना पड़ेगा। इसके लिए नियम में यह भी कहा गया है कि कंटेंट में Unique Metadata/Identifier Embed करना होगा, ताकि बाद में वो हटाया, छुपाया या बदला न जा सके।
डिजाइन ऐसा होगा कि पहचानना आसान हो
नई रूल 3(3) के मुताबिक विज़ुअल AI कंटेंट में लेबल कम से कम 10% एरिया में दिखेगा, ऑडियो AI कंटेंट में लेबल पहले 10% समय में सुनाई देगा, यह लेबल हर AI-Generated कंटेंट पर स्पष्ट रूप से दिखना चाहिए । सरकार का कहना है कि इससे प्लेटफॉर्म्स के यूज़र्स तक तुरंत पता लगे कि कंटेंट वास्तविक है या AI से बना।
3 घंटे में डीपफेक हटाना भी अनिवार्य
सबसे चर्चा में यह प्रावधान है कि अगर प्लेटफॉर्म पर डीपफेक फोटो या वीडियो Upload होता है, तो उसे 3 घंटे के भीतर हटाना होगा, सरकार का तर्क है कि डीपफेक कंटेंट को फैलने में कुछ ही मिनट लगते हैं, इसलिए जल्द से जल्द उसे हटाने से फेक न्यूज़, Mis-information और चुनावी गलत इस्तेमाल कम होगा।
प्लेटफॉर्म्स को तकनीकी तैयारी करनी होगी
सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्लेटफॉर्म्स को इस नियम को लागू करने के लिए pre-upload checks करने होंगे, यानी Upload होने से पहले ही कंटेंट का AI-Generated होने का पता लगाना होगा। इसका मतलब यह है कि केवल यूज़र बयान (user declaration) पर निर्भर नहीं किया जाएगा, बल्कि तकनीकी फ़िल्टरिंग और पहचान सिस्टम खुद प्लेटफॉर्म्स लागू करेंगे।