पूर्वी यूरोप में भारत की नई कूटनीतिक पहल
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मोल्दोवा, उत्तरी मैसेडोनिया और रोमानिया की आधिकारिक यात्रा ने मध्य एवं पूर्वी यूरोप में भारत की कूटनीतिक उपस्थिति को एक नया आयाम दिया है। यह मोल्दोवा और उत्तरी मैसेडोनिया की किसी भारतीय राष्ट्रपति द्वारा की गई पहली द्विपक्षीय यात्रा है, जबकि रोमानिया की तीन दशक से अधिक समय बाद किसी भारतीय राष्ट्रपति की पहली यात्रा है। यह दौरा स्पष्ट संकेत देता है कि भारत अब पश्चिमी यूरोप के पारंपरिक साझेदारों तक सीमित न रहकर पूरे यूरोप के साथ संतुलित और बहुस्तरीय संबंध विकसित करने की नीति पर आगे बढ़ रहा है।
भारत ने मोल्दोवा को उसकी स्वतंत्रता के तुरंत बाद दिसंबर 1991 में मान्यता प्रदान की थी और 1992 में दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध स्थापित हुए। बुखारेस्ट स्थित भारतीय दूतावास को किशिनाउ के लिए भी मान्यता प्राप्त है। अब तक दोनों देशों के संबंध संयुक्त राष्ट्र जैसे बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग और सीमित व्यापार तक केंद्रित रहे, किंतु पिछले कुछ वर्षों में इन संबंधों में नई गति आई है। जनवरी 2026 में कृषि, वित्त, अवसंरचना, पर्यावरण, ऊर्जा, शिक्षा और श्रम जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर हुई उच्चस्तरीय पहल ने नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल भुगतान, कृषि आधुनिकीकरण और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में साझेदारी का नया आधार तैयार किया। राष्ट्रपति मुर्मू की यात्रा ने इन संभावनाओं को राजनीतिक समर्थन प्रदान करते हुए संबंधों को नए स्तर पर पहुंचाने का कार्य किया।
उत्तरी मैसेडोनिया के साथ भारत के संबंधों की शुरुआत 1993 में उसके संयुक्त राष्ट्र प्रवेश के समर्थन और 1995 में औपचारिक राजनयिक संबंधों की स्थापना के साथ हुई। वर्तमान में सोफिया स्थित भारतीय दूतावास वहां के लिए मान्यता प्राप्त है, जबकि स्कोप्जे की सरकार 2008 से नई दिल्ली में अपना दूतावास संचालित कर रही है। दोनों देशों के संबंध साझा लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ-साथ मदर टेरेसा की विरासत से भी जुड़े हैं, जिनका जन्म स्कोप्जे में हुआ था और जिन्होंने भारत में मानव सेवा का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया।
पिछले दशक में निवेश संरक्षण, राजनयिक पासपोर्ट धारकों के लिए वीजा छूट, दोहरे कराधान से बचाव तथा राजनयिक प्रशिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग जैसे अनेक समझौतों ने इस संबंध को संस्थागत आधार प्रदान किया है। व्यापार में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। भारत से जैविक रसायन, औषधियां, वस्त्र, विद्युत मशीनरी और ऑटोमोबाइल कलपुर्जों का निर्यात होता है, जबकि उत्तरी मैसेडोनिया से फेरो-एलॉय, संगमरमर, विद्युत उपकरण और प्लास्टिक उत्पाद भारत आते हैं। योग, भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक संगठनों की बढ़ती उपस्थिति ने दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क को भी मजबूत किया है। ऐसे में राष्ट्रपति मुर्मू की यह पहली यात्रा पहले से विकसित हो रही साझेदारी को नई दिशा देने वाली सिद्ध होती है।
रोमानिया के साथ भारत के संबंध अपेक्षाकृत अधिक पुराने और परिपक्व हैं। दोनों देशों के बीच 1948 में राजनयिक संबंध स्थापित हुए और 1957 में इन्हें दूतावास स्तर तक विस्तारित किया गया। इसके बाद अनेक उच्चस्तरीय यात्राओं ने संबंधों को मजबूती दी। औद्योगिक परियोजनाओं, तेल शोधन, रक्षा उत्पादन तथा तकनीकी सहयोग जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों ने लंबे समय से साथ काम किया है। आज रोमानिया में रैनबैक्सी, विप्रो, जेनपैक्ट और रेमंड जैसी भारतीय कंपनियों की उपस्थिति आर्थिक संबंधों की गहराई को दर्शाती है। वर्ष 2024 में दोनों देशों ने राजनयिक संबंधों की स्मृति में संयुक्त डाक टिकट भी जारी किए, जो इस ऐतिहासिक साझेदारी के महत्व को रेखांकित करते हैं।
राष्ट्रपति मुर्मू की रोमानिया यात्रा का उद्देश्य उच्चस्तरीय राजनीतिक संवाद को पुनर्जीवित करना और व्यापार, निवेश, शिक्षा, विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करना है। साथ ही, यूरोपीय संघ और नाटो में रोमानिया की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए भारत अपनी व्यापक यूरोपीय रणनीति में उसे एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में स्थापित करना चाहता है।
वास्तव में, यह तीन देशों की यात्रा भारत की बहु-दिशीय और गतिशील विदेश नीति का सशक्त उदाहरण है। भारत अब यूरोप को केवल फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे पारंपरिक साझेदारों तक सीमित नहीं देखता, बल्कि उन देशों के साथ भी सक्रिय संबंध विकसित कर रहा है, जहां व्यापार, प्रौद्योगिकी, डिजिटल नवाचार, हरित ऊर्जा और क्षमता निर्माण के नए अवसर मौजूद हैं। मोल्दोवा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर कूटनीति, हरित ऊर्जा और डिजिटल भुगतान, उत्तरी मैसेडोनिया में सूचना प्रौद्योगिकी तथा आईटी-सक्षम सेवाओं और रोमानिया के साथ व्यापार एवं निवेश पर विशेष बल इस बदलती प्राथमिकता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
यह यात्रा वैश्विक दक्षिण के प्रतिनिधि के रूप में भारत की भूमिका को भी मजबूत करती है। मोल्दोवा के पेशेवरों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार, उत्तरी मैसेडोनिया के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्तियां तथा क्षमता निर्माण कार्यक्रम और विकास साझेदारी की पहल यह दर्शाती है कि भारत केवल आर्थिक संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि मानव संसाधन विकास, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और संस्थागत सहयोग को भी अपनी विदेश नीति का महत्वपूर्ण आधार बना रहा है। साथ ही, आतंकवाद, संपर्क और जलवायु परिवर्तन जैसे वैश्विक मुद्दों पर तीनों देशों का भारत के प्रति समर्थन इस साझेदारी को और अधिक प्रासंगिक बनाता है।
समग्र रूप से देखा जाए तो राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मोल्दोवा, उत्तरी मैसेडोनिया और रोमानिया की यात्रा केवल एक औपचारिक राजकीय दौरा नहीं है, बल्कि भारत की विकसित होती विदेश नीति का एक स्पष्ट संकेत है। यह यात्रा दर्शाती है कि भारत राजनीतिक संवाद, आर्थिक सहयोग, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और विकास साझेदारी को साथ लेकर ऐसे नए भौगोलिक क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति सुदृढ़ कर रहा है, जो भविष्य की वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले हैं। यही इस यात्रा का सबसे बड़ा कूटनीतिक संदेश भी है।
प्रो. अंशु जोशी
(लेखिका जेएनयू में प्राध्यापिका हैं।)