मेजर सरस् त्रिपाठी 

NEET परीक्षा का पेपर लीक : व्यवस्था की विफलता और सुधार की चुनौतियां

देश की सबसे बड़ी और सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में गिने जाने वाली NEET-UG 2026 एक बार फिर भारी विवादों में आ गई। लगभग 23 लाख विद्यार्थियों की इस परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने की खबर सामने आने के बाद पूरे देश में छात्रों का आक्रोश फूट पड़ा। अन्ततः राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (National Testing Agency) को परीक्षा रद्द करनी पड़ी और मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सौंपनी पड़ी। यह घटना केवल एक परीक्षा में गड़बड़ी भर नहीं थी, वरन इसने भारतीय परीक्षा प्रणाली, परीक्षा कराने की प्रशासनिक क्षमता और सरकारी उत्तरदायित्व पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया।

मीडिया रिपोर्टों और जांच एजेंसियों के अनुसार, NEET-UG 2026 का प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले राजस्थान और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में “गेस पेपर” (अनुमानित प्रश्न पत्र) के रूप में फैलाया गया था। बाद में जांच में पाया गया कि इस कथित गेस पेपर के लगभग 600 अंक के प्रश्न वास्तविक प्रश्नपत्र से मेल खाते थे। अब 720 अंकों की परीक्षा में यदि 600 अंकों के प्रश्न लीक हो गये हों तो बचा क्या है?

केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो की जांच में धीरे-धीरे यह स्पष्ट हुआ कि यह कोई साधारण घटना नहीं वरन् एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा था। जांच एजेंसी ने दिल्ली, पुणे, जयपुर, गुरुग्राम, लातूर, नासिक और अन्य शहरों में छापेमारी की तथा कई लोगों को गिरफ्तार किया। रिपोर्टों के अनुसार अब तक कम से कम 13 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

इन गिरफ्तारियों में स्कूल प्रबंधन से जुड़े लोग, शिक्षक, मध्यस्थ और कुछ छात्र भी शामिल बताए गए। पुणे की एक स्कूल प्रधानाचार्या मनीषा हवेलदार को भी गिरफ्तार किया गया, जिस पर आरोप है कि उसने प्रश्नपत्र से जुड़े भौतिकी के प्रश्न याद करके छात्रों तक पहुंचाए।  कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी एन टी ए से जुड़े विशेषज्ञ पैनल के लोगों पर भी जांच की आंच पहुंची है।

यह पूरा प्रकरण बताता है कि भारत में प्रश्नपत्र लीक अब एक “संगठित अपराध उद्योग” का रूप ले चुका है। प्रश्नपत्र छपने से लेकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया में अनेक लोग शामिल रहते हैं। जहां कहीं भी मानवीय हस्तक्षेप अधिक होगा, वहां भ्रष्टाचार और लीक की संभावना बनी रहती है। प्रश्नपत्र प्रिंटिंग प्रेस से निकलने के बाद परिवहन, भंडारण, वितरण और परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने की प्रक्रिया में कई कमजोर कड़ियां होती हैं। इन्हीं कमजोरियों का फायदा परीक्षा माफिया उठाते हैं। इन परीक्षा माफियाओं में बड़ी संख्या नीट कोचिंग चलाने वालों की है।

भारत में प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव भी इस अपराध को बढ़ाता है। लाखों विद्यार्थी कुछ हजार मेडिकल सीटों के लिए संघर्ष करते हैं। ऐसे में कुछ परिवार और छात्र अनुचित तरीकों का सहारा लेने को तैयार हो जाते हैं। कोचिंग माफिया, भ्रष्ट अधिकारी और दलाल इस मानसिकता का लाभ उठाते हैं। कई मामलों में प्रश्नपत्र व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे माध्यमों से मिनटों में फैल जाते हैं।

NEET 2026 प्रकरण में सबसे गंभीर प्रश्न यह है कि क्या एन टी ए जैसी संस्था इतनी बड़ी परीक्षा को सुरक्षित ढंग से आयोजित करने में सक्षम है? पिछले कुछ वर्षों में एन टी ए लगातार विवादों में रही है। कभी परिणामों में गड़बड़ी, कभी सर्वर समस्या और अब पेपर लीक — इन घटनाओं ने संस्था की विश्वसनीयता को कमजोर किया है।

सर्वोच्च न्यायालय ने भी, जिसके दिशा निर्देशन में 2017 से परीक्षा आयोजन का प्रारंभ हुआ, इस मामले पर कठोर टिप्पणी करते हुए कहा कि उत्तरदायित्व तय होना चाहिए और किसी न किसी स्तर पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।  यह टिप्पणी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत में अक्सर बड़े घोटालों के बाद केवल जांच होती है, लेकिन संस्थागत सुधार नहीं होते।

अब सरकार द्वारा यह विचार सामने आया है कि NEET के प्रश्नपत्रों को भारतीय वायुसेना के विशेष विमानों से पहुंचाया जाए। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में इस विकल्प पर चर्चा हुई।  सरकार का तर्क है कि इससे प्रश्नपत्र तेजी और सुरक्षा के साथ परीक्षा केंद्रों तक पहुंच सकेंगे।

निश्चित रूप से सुरक्षा बढ़ाना आवश्यक है, परंतु यह प्रश्न भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि क्या शांति काल में एक सामान्य नागरिक परीक्षा के संचालन के लिए सेना और वायुसेना का उपयोग उचित है? भारतीय सेना और वायुसेना का मूल कार्य राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमाओं की रक्षा है। यदि नागरिक प्रशासन इतना आधारभूत उत्तरदायित्व भी नहीं निभा पा रहा कि वह प्रश्नपत्र सुरक्षित रख सके, तो यह बहुत शर्मनाक है और प्रशासनिक विफलता का संकेत है।

यह कदम प्रतीकात्मक रूप से यह संदेश भी देता है कि सरकार को अपने ही नागरिक तंत्र पर भरोसा नहीं रहा। डाक विभाग, पुलिस, जिला प्रशासन और परीक्षा एजेंसियां यदि मिलकर भी प्रश्नपत्र की सुरक्षा नहीं कर सकतीं, तो यह अत्यंत चिंताजनक स्थिति है। विपक्षी दलों ने भी इसी आधार पर सरकार की आलोचना की है और कहा है कि यह “गवर्नेंस फेल्योर” है।

हालांकि यह भी सच है कि जब तक परीक्षा माफिया का नेटवर्क पूरी तरह समाप्त नहीं होता, तब तक अतिरिक्त सुरक्षा उपाय आवश्यक हो सकते हैं। लेकिन सेना या वायुसेना को स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता। स्थायी समाधान प्रशासनिक और तकनीकी सुधारों में ही है।

अब सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न ये है की पेपर लीक को कैसे रोका जाए?

पेपर लीक रोकने के लिए सबसे पहला कदम है परीक्षा प्रणाली का डिजिटलीकरण। NTA ने स्वयं संसदीय समिति के सामने कहा है कि कंप्यूटर आधारित परीक्षा पेपर लीक रोकने में सहायता कर सकती है।  यदि प्रश्नपत्र अंतिम समय में एन्क्रिप्टेड डिजिटल माध्यम से परीक्षा केंद्रों पर भेजे जाएं और वहीं सुरक्षित सर्वर से खोले जाएं, तो लीक की संभावना काफी कम हो सकती है।

दूसरा सुधार यह होना चाहिए कि प्रश्नपत्रों पर यूनिक क्या आर कोड और डिजिटल ट्रैकिंग व्यवस्था लागू की जाए। यदि कोई प्रश्नपत्र बाहर आता है तो तुरंत यह पता चल सके कि वह किस केंद्र या किस प्रिंटिंग यूनिट से लीक हुआ। तीसरा, प्रश्नपत्र की सुरक्षा में लगे कर्मचारियों का कठोर बैकग्राउंड वेरिफिकेशन होना चाहिए। चौथा, परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी निगरानी और जीपीएस आधारित परिवहन व्यवस्था अनिवार्य की जानी चाहिए।

इसके अलावा भारत को “एक परीक्षा, एक भविष्य” वाली मानसिकता से भी बाहर निकलना होगा। जब एक ही परीक्षा किसी छात्र का पूरा भविष्य तय करती है, तब भ्रष्टाचार और दबाव दोनों बढ़ते हैं। वर्ष में कई बार परीक्षा आयोजित करने और सामान्यीकरण प्रणाली लागू करने से भी पेपर लीक का दबाव कम किया जा सकता है।

अंततः NEET 2026 पेपर लीक केवल एक आपराधिक घटना नहीं बल्कि भारतीय प्रशासनिक तंत्र की परीक्षा थी, जिसमें व्यवस्था अशक्तता उजागर हुई। लाखों छात्रों का विश्वास टूटा है। यदि सरकार केवल गिरफ्तारियां और तदर्थ कदम उठाकर संतुष्ट हो जाती है, तो भविष्य में भी ऐसे घोटाले होते रहेंगे। आवश्यकता इस बात की है कि ऐसे अपराधों में उत्तरदायित्व तय हो, परीक्षा एजेंसियों में व्यापक सुधार हो तथा तकनीक आधारित पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाए। अन्यथा हर वर्ष करोड़ों युवाओं का भविष्य इसी प्रकार अविश्वास और अराजकता के बीच झूलता रहेगा।