14 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने अंडर-19 विश्व कप फाइनल

14 साल के वैभव सूर्यवंशी ने अंडर-19 WC फाइनल में 175 रन ठोककर रच दिया इतिहास

नई दिल्ली। अंडर-19 क्रिकेट में शुक्रवार का दिन हमेशा याद रखा जाएगा। भारत के 14 वर्षीय बल्लेबाज़ वैभव सूर्यवंशी ने विश्व कप फाइनल जैसे बड़े मंच पर ऐसा तूफान मचाया कि रिकॉर्ड्स की लिस्ट ही बदल गई। इंग्लैंड के खिलाफ खेलते हुए वैभव ने महज 80 गेंदों में 175 रन ठोक दिए और एक बार फिर साबित कर दिया कि उम्र सिर्फ एक नंबर है।

फाइनल में रिकॉर्ड्स की बरसात

अंडर-19 विश्व कप 2026 के फाइनल में वैभव सूर्यवंशी ने इतिहास रच दिया। उन्होंने सिर्फ 55 गेंदों में शतक पूरा किया, जो इस टूर्नामेंट के इतिहास में दूसरा सबसे तेज शतक है। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया के विल मलाजचुक ने इस संस्करण में 51 गेंदों में शतक लगाया था। वैभव यहीं नहीं रुके। उन्होंने 71 गेंदों में 150 रन पूरे कर अंडर-19 क्रिकेट में सबसे तेज 150 रन बनाने का रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया। इस मैदान पर इससे पहले इंग्लैंड के बेन मेयस ने स्कॉटलैंड के खिलाफ 98 गेंदों में यह कारनामा किया था।

छक्कों की बारिश, अपने ही रिकॉर्ड को तोड़ा

इस पारी के दौरान सूर्यवंशी ने छक्कों की जमकर बारिश की। उन्होंने किसी भी युवा वनडे पारी में सबसे ज्यादा छक्के लगाने का रिकॉर्ड भी बना लिया। इससे पहले दिसंबर में दुबई में यूएई के खिलाफ उन्होंने 14 छक्के लगाए थे, जिसे अब उन्होंने खुद ही पीछे छोड़ दिया। पूरे टूर्नामेंट में वैभव के बल्ले से कुल 22 छक्के निकले, जिसके साथ उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के देवाल्ड ब्रेविस का 2022 का 18 छक्कों वाला रिकॉर्ड भी तोड़ दिया।

साझेदारी जिसने मैच की दिशा तय की

भारतीय सलामी बल्लेबाज़ ने कप्तान आयुष म्हात्रे के साथ मिलकर महज 19 ओवरों में 142 रनों की अहम साझेदारी की। आयुष 51 गेंदों में 53 रन बनाकर आउट हुए, लेकिन तब तक भारत मज़बूत स्थिति में पहुंच चुका था। वैभव ने अपना पहला अर्धशतक सिर्फ 32 गेंदों में पूरा किया और दूसरा अर्धशतक आने में उन्हें सिर्फ 23 गेंदें लगीं। इंग्लैंड के गेंदबाज़ पूरी तरह दबाव में दिखे।

सबसे कम उम्र में शतक लगाने वाले खिलाड़ी

इस ऐतिहासिक पारी के साथ वैभव सूर्यवंशी अंडर-19 विश्व कप के इतिहास में सबसे कम उम्र में शतक लगाने वाले खिलाड़ी भी बन गए हैं। 14 साल की उम्र में फाइनल में ऐसा प्रदर्शन, भारतीय क्रिकेट के लिए बड़ी उम्मीद की तरह देखा जा रहा है। फाइनल जैसे मुकाबले में इस तरह की पारी खेलना आसान नहीं होता, लेकिन वैभव सूर्यवंशी ने दिखा दिया कि वो सिर्फ भविष्य नहीं, बल्कि वर्तमान भी हैं।