IPL में ‘देसी कप्तानों’ का दौर, 19 साल में पहली बार सभी टीमों की कमान भारतीयों के हाथ
इस बार IPL सिर्फ क्रिकेट नहीं बल्कि लीडरशिप का भी बड़ा टेस्ट बनने जा रहा है। ऐसा पहली बार होने जा रहा है जब इंडियन प्रीमियर लीग के पूरे सीजन की शुरुआत सभी 10 टीमों के भारतीय कप्तानों के साथ होगी। ये बदलाव अचानक आया है। लेकिन अब यही इस सीजन की सबसे बड़ी कहानी बन चुका है।
आखिरी वक्त पर बदली तस्वीर
दरअसल, सनराइजर्स हैदराबाद के नियमित कप्तान पैट कमिंस शुरुआती मैचों से बाहर हो गए। इसके बाद टीम ने युवा विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन को कप्तानी सौंप दी। बस यहीं से तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। इसके चलते IPL के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि एक भी विदेशी खिलाड़ी कप्तानी करता नजर नहीं आएगा, कम से कम शुरुआती मैचों में तो ऐसा होगा।
पहली बार कप्तानी, बड़ी जिम्मेदारी
ईशान किशन के लिए ये मौका जितना बड़ा है, उतनी ही बड़ी चुनौती भी। वो पहली बार आईपीएल में कप्तानी करेंगे, और वो भी ऐसे समय में जब हर टीम संतुलन और रणनीति के मामले में बेहद मजबूत दिख रही है। वैसे सिर्फ ईशान ही नहीं… इस बार 10 कप्तानों में से 6 ऐसे हैं जो अब तक एक भी IPL ट्रॉफी नहीं जीत पाए हैं।
ट्रॉफी की भूख वाले कप्तान
इनमें ऋतुराज गायकवाड़, रियान पराग, शुभमन गिल, अजिंक्य रहाणे, ईशान किशन और ऋषभ पंत शामिल हैं। इन खिलाड़ियों के लिए ये सीजन सिर्फ मैच जीतने का नहीं, बल्कि खुद को एक सफल कप्तान साबित करने का भी मौका है। शायद यही इस बार की सबसे दिलचस्प बात है।
अनुभवी कप्तानों का भी दम
वहीं दूसरी तरफ कुछ कप्तान ऐसे भी हैं, जो पहले ही ट्रॉफी जीत चुके हैं और उनके पास अनुभव का बड़ा फायदा है। श्रेयस अय्यर ने 2024 में कोलकाता नाइट राइडर्स को चैंपियन बनाया था। रजत पाटीदार ने 2025 में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर को खिताब दिलाया, जबकि हार्दिक पांड्या 2022 में गुजरात टाइटंस को ट्रॉफी जिता चुके हैं। यानि इस बार मुकाबला सिर्फ टीमों के बीच नहीं, कप्तानों के अनुभव और भूख के बीच भी होगा।
अय्यर का रिकॉर्ड अब भी सबसे खास
आईपीएल इतिहास में अगर कप्तानी के रिकॉर्ड की बात करें तो श्रेयस अय्यर का नाम अलग ही नजर आता है। वो इकलौते ऐसे कप्तान हैं जिन्होंने तीन अलग-अलग टीमों को फाइनल तक पहुंचाया है। उन्होंने 2020 में दिल्ली कैपिटल्स, 2024 में केकेआर को फाइनल में लेजाकर खिताब दिलाया और 2025 में पंजाब किंग्स को फाइनल तक ले गए। ये अपने आप में बड़ी उपलब्धि है।
धोनी-रोहित की विरासत का दबाव
और जब IPL की कप्तानी की बात होती है, तो महेंद्र सिंह धोनी और रोहित शर्मा का जिक्र जरूरी हो जाता है। दोनों ने अपनी-अपनी टीमों को 5-5 बार चैंपियन बनाया है। धोनी के नाम सबसे ज्यादा मैच और जीत दर्ज हैं, वहीं रोहित ने मुंबई इंडियंस को एक अलग ही ऊंचाई पर पहुंचाया।
इस बार IPL क्यों अलग है?
इस बार IPL में सिर्फ रन और विकेट की कहानी नहीं होग। ये सीजन कप्तानों की सोच, फैसलों और दबाव झेलने की क्षमता का असली टेस्ट होगा। शायद इसी वजह से ये IPL थोड़ा अलग, थोड़ा ज्यादा दिलचस्प लग रहा है।