फाइनल में पहली बार दो भारतीय खिलाड़ियों की टक्कर, कोनेरु हम्पी और दिव्या देशमुख आमने-सामने
Indian titans on one chessboard: दिव्या देशमुख के बाद अब कोनेरू हम्पी ने भी FIDE विमेंस वर्ल्ड कप के फाइनल में जगह बना ली है। सेमीफाइनल में हम्पी ने कड़े मुकाबले के बाद टाई ब्रेकर में चीन की टिंगजी लेई को शिकस्त दी। इस जीत के साथ टूर्नामेंट के फाइनल में पहली बार दो भारतीय खिलाड़ी आमने-सामने होंगी। जॉर्जिया के बटुमी में आयोजित इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में अब भारत की जीत निश्चित है। बस सवाल यह है कि चैंपियन कौन बनेगा?
लेई को हराकर बनाई फाइनल में जगह
टाईब्रेक की शुरुआत में चीन की टिंगजी लेई ने पहला मुकाबला जीतकर बढ़त हासिल कर ली थी, जिससे हम्पी दबाव में आ गईं। दूसरे मुकाबले में हम्पी ने शानदार वापसी करते हुए स्कोर बराबर कर दिया। तीसरे सेट में हम्पी ने सफेद मोहरों से खेल की शुरुआत की और हर विभाग में लेई को मात दी। इसके बाद उन्हें सिर्फ एक ड्रॉ की जरूरत थी, लेकिन हम्पी ने आक्रामक खेल जारी रखते हुए जीत दर्ज की।
टाई ब्रेकर में हुआ फैसला
कोनेरू हम्पी और टिंगजी लेई के बीच खेले गए दोनों क्लासिकल गेम ड्रॉ रहे। इसके बाद गुरुवार को टाई ब्रेकर का आयोजन किया गया। दूसरे गेम में हम्पी के पास सफेद मोहरे थे, लेकिन वह लेई की मजबूत डिफेंस लाइन को भेद नहीं पाईं।
दिव्या ने पूर्व वर्ल्ड चैंपियन को दी मात
दिव्या देशमुख ने सेमीफाइनल में चीन की पूर्व विश्व चैंपियन तान झोंग्यी को 1.5-0.5 के अंतर से हराकर फाइनल में जगह बनाई। पहले गेम में काले मोहरों से खेलते हुए उन्होंने ड्रॉ निकाला और दूसरे गेम में सफेद मोहरों से 101 चालों तक चले मुकाबले में जीत हासिल की। बीच के खेल में दिव्या ने जबरदस्त दबाव बनाते हुए झोंग्यी को गलतियां करने पर मजबूर कर दिया।
दूसरे गेम में क्वीन की अदला-बदली के बाद भी दिव्या की स्थिति काफी मजबूत रही। झोंग्यी ने वापसी की कोशिश की और कुछ देर के लिए बढ़त बनाई, लेकिन समय की कमी में वह गलत चाल चल बैठीं। दिव्या ने दो प्यादों की बढ़त लेते हुए मुकाबला पूरी तरह अपने पक्ष में कर लिया। हालांकि झोंग्यी के पास ड्रॉ के मौके थे, लेकिन वह उन्हें भुना नहीं सकीं।
सेमीफाइनल का पहला गेम ड्रॉ रहा, जिसमें दिव्या ने काले मोहरों से खेलते हुए संतुलन बनाए रखने की रणनीति अपनाई। तान झोंग्यी ने 'क्वीन्स गैम्बिट डिक्लाइन्ड' ओपनिंग से शुरुआत की। दिव्या ने सधी हुई चालों से लगातार मोहरे बदलते हुए स्थिति को बराबरी पर रखा। अंत में जब दोनों के पास एक-एक रूक और तीन-तीन प्यादे बचे, तब खेल को ड्रॉ घोषित कर दिया गया।
भारतीय महिला खिलाड़ियों ने किया ऐतिहासिक प्रदर्शन
FIDE महिला विश्व कप में पहली बार चार भारतीय महिला खिलाड़ी क्वार्टर फाइनल में पहुँचीं। कोनेरू हम्पी और दिव्या देशमुख के अलावा, हरिका द्रोणावल्ली और आर. वैशाली भी अंतिम-8 में पहुँचीं।