शेन वॉर्न का ‘मास्टरस्ट्रोक’: 9 करोड़ की सैलरी के साथ स्मार्ट डील, अब परिवार को मिलेंगे 450 करोड़
क्रिकेट जगत में ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी शेन वॉर्न को लोग उनके लेग स्पिन के लिए याद करते हैं। लेकिन अब ऐसी जानकारी सामने आई जिससे उनके याद करने की एक और वजह जुड़ गई है। वह वजह उनकी दूरदर्शिता को कहा जा रहा है।
दरअसल, राजस्थान रॉयल्स की हालिया फ्रेंचाइजी बिक्री के बाद सामने आया है कि वॉर्न ने सालों पहले एक फैसला लिया था। वही आज उनके परिवार के लिए करोड़ों की कमाई बन गया है।
राजस्थान रॉयल्स की डील और बड़ा फायदा
बता दें कि राजस्थान रॉयल्स की फ्रेंचाइजी हाल ही में करीब 15,000 करोड़ रुपये से ज्यादा में नए मालिक को बेची गई है। इस डील के बाद वॉर्न के परिवार को लगभग 450-460 करोड़ रुपये मिलने की बात सामने आई है। करोड़ों रुपये मिलना एक पुरानी शर्त की वजह से संभव हुआ है।
कॉन्ट्रैक्ट की छोटी शर्त, बड़ा गेम
साल 2008 में वॉर्न आईपीएल के पहले सीजन में राजस्थान रॉयल्स से जुड़े थे। तब उन्होंने एक अलग तरह की डील की थी। इसमें उन्होंने सिर्फ सैलरी पर फोकस नहीं किया था। इसके अलावा उन्होंने हर सीजन के साथ 0.75% इक्विटी लेने की शर्त रखी थी। यह 4 सालों में मिलाकर करीब 3% हो गया था।
कम सैलरी, लेकिन लंबी सोच
वॉर्न ने 4 सीजन खेलने के लिए सैलरी में करीब 9.35 करोड़ रुपये ही लिए। उस वक्त यह रकम बड़ी लग सकती थी। लेकिन असली फायदा उन्होंने इक्विटी के जरिए उठाया। यह आगे चलकर कई गुना बढ़ गया।
कप्तान ही नहीं, पूरा कंट्रोल
वॉर्न को टीम का कप्तान ही नहीं, बल्कि क्रिकेट से जुड़े फैसलों का पूरा कंट्रोल भी दिया गया था। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि टीम को कैसे चलाना है, किसे खिलाना है। ये सब फैसले वही लेते थे।
आज का हिसाब
अब जब राजस्थान रॉयल्स करीब 15,000 करोड़ रुपये में बिक चुकी है। तह वॉर्न का 3% हिस्सा करीब 450 करोड़ रुपये के आसपास बैठता है। यानी, जो फैसला उन्होंने करीब दो दशक पहले लिया था। उसका फायदा आज उनके परिवार को मिल रहा है।