लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पास न हो सका, लेकिन भा

महिला आरक्षणः हार कर भी जीत गई मोदी सरकार

लोकसभा में महिला आरक्षण को लेकर 16 व 17 अप्रैल को पक्ष-विपक्ष के बीच जमकर बहस हुई। सरकार की पूरी कोशिश रही कि किसी तरह संशोधित महिला आरक्षण बिल को पारित करा लिया जाए। लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन बिल सहित तीन विधेयकों को पेश किए जाने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने विरोध कर रहे विपक्षी दलों को अपनी तरफ से तरह-तरह से समझाने की कोशिश की। 

क्रेडिट कार्ड से लेकर ब्लैंक चेक जैसी बातों से प्रधानमंत्री ने पूरे विपक्ष को भरोसा दिलाने की कोशिश की। केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी आआंकड़ों के जरिए विपक्ष के सवालों का जवाब देने की पूरी कोशिश की, लेकिन विपक्ष अपनी जिद पर अड़ा रहा। सभी मुख्य विपक्षी दलों ने इस बिल का न सिर्फ फ्लोर पर विरोध किया बल्कि मतदान के दौरान भी विरोध किया। मतदान में कुल 528 सांसदों ने हिस्सा लिया। जिसमें पक्ष में 298 और विरोध में 230 मत पड़े। सरकार को इस बिल को पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 352 मतों की जरूरत थी लेकिन सरकार दो तिहाई समर्थन प्राप्त नहीं कर पाई।

सतापक्ष के पास दो-तिहाई वाला आंकड़ा नहीं है लेकिन सरकार ने एक ऐसा एजेंडा जरूर सेट कर दिया, जिससे हार भी जीत के रूप में दिखाई दे। लोकसभा सदन में मतदान से पहले नोटिफिकेशन जारी कर सरकार ने महिला आरक्षण कानून 2023 लागू कर दिया ताकि अन्य संवैधानिक पेचीदगियों से बचा जा सके। अब महिला आरक्षण कानून 2023 राष्ट्रीय जनगणना के बाद लागू करने की कोशिश होगी। देश की आधी आबादी को साधने की भाजपा की रणनीति का बड़ा एजेंडा महिलाओं को 2029 के लोकसभा चुनाव में 33 प्रतिशत आरक्षण देने का मंसूबा भले ही पूरा नहीं हो सका लेकिन फिर भी भाजपा के दोनों हाथों में लड्डू मौजूद हैं। 

भाजपा अब मोदी सरकार की संसद में इस पहली बड़ी हार को भविष्य की जीत का आधार बनाने की कोशिश करेगी। इसकी शुरुआत मौजूदा पश्चिम बंगाल एवं तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से ही हो जाएगी और आगामी 2029 का लोकसभा चुनाव इसका बड़ा मंच होगा। इस दौरान भाजपा और उसके सहयोगी दल मिलकर विपक्षी दलों पर लगातार महिला विरोधी होने का आरोप चस्पा करने की कोशिश करते रहेंगे। चूंकि विपक्ष के तेवरों को देखते हुए गुरुवार 16 अप्रैल को ही साफ हो गया था कि विपक्ष के बिना दो तिहाई समर्थन मिलना मुश्किल होगा। यही कारण रहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने भाषण में विधेयक के गिरने के बाद की भाजपा की पिच तैयार कर दी थी। 

भाजपा ने अब बाद की रणनीति पर काम भी शुरू कर दिया था। एनडीए की महिला सांसदों ने विधेयक गिरने के साथ ही संसद भवन के प्रवेश द्वार पर बारिश के बीच विपक्ष के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। भाजपा देशभर में महिलाओं के धरना प्रदर्शन के जरिए विपक्ष पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाएगी। पश्चिम बंगाल एवं तमिलनाडु के बाकी चुनाव प्रचार में भी महिला आरक्षण एनडीए का बड़ा मु‌द्दा होगा। भाजपा इस मुद्दे को 2029 के लोकसभा चुनाव तक गरमाए रखेगी। तब तक उत्तरप्रदेश सहित कई राज्यों के चुनाव में भाजपा इसे प्रखरता से उठाएगी। 

जिस तरह से भाजपा आपातकाल को लेकर कांग्रेस को घेरती है। उसी तरह उसे महिला विरोधी बताने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगी। भाजपा को जब 2024 के चुनाव में बहुमत नहीं मिला तब उसके लिए विपक्ष के साथ इतने टकराव वाली स्थिति में दो तिहाई बहुमत कैसे मिल सकता था। इसलिए भाजपा ने इस विधेयक के माध्यम से विपक्ष को घेरने की कोशिश की और अगले चुनाव में देश की आधी आबादी को साथ लेकर फिर से अपनी ताकत को बढ़ाने का काम शुरू कर दिया है।