कॉकरोच प्रसंग: सत्ता का आसमानी सुल्तानी सपना
यह सही है कि प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं के पेपर लीक होना सरकार की अक्षम्य लापरवाही है।युवा मन का आक्रोश स्वाभाविक है और सरकार को इस आक्रोश से गूंथे सवालों की जबाबदेही लेनी ही होगी।लेकिन सवाल जो इससे भी बढ़ा है वह एंटी करप्शन की खोल में खड़ीं एंटी इंडिया फोर्सेज का है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के मुह से निकले कॉकरोच शब्द को जिस तरह से युवा और तथा कथित जेन जी के आंदोलन का आधार बनाया जा रहा है ,वह केवल एक परीक्षा व्यवस्था भर का सवाल नही रह गया है।कभी इसी पृष्ठभूमि और ऐसे ही चेहरों ने इंडिया अगेंस्ट करप्शन का नैरेटिव गढ़कर दिल्ली और पंजाब में सत्ता का राज्यारोहण कर लिया था जिस करप्शन के विरुद्ध अन्ना आंदोलन खड़ा हुआ उसी आंदोलन के झंडाबरदारों से तिहाड़ की जेल भरते हुए देश देख चुका है।
कमोबेश कोकरोच जनता पार्टी भी केजरीवाल मॉडल 02 ही नजर आता है।इस आभासी पार्टी के समर्थन में आज पूरा लेफ्ट इकोसिस्टम खड़ा नजर आया।आम आदमी पार्टी के वालंटियर एक्टिव दिखे।सीपीआई, सीपीएम के नेता दिखे।आरजेडी के राजसभा सांसद ने अपने नाम से हॉल बुक कराया है।सोशल मीडिया पर वो पूरी जमात सप्ताह भर से शोर मचाये हुए है जो राष्ट्रीय विचारों की पत्रकारिता को गोदी मीडिया के पदक बांटने की यूनिवर्सिटी खोलकर बैठे हैं।हर चुनाव में ये सोशल मीडिया के स्वयंभू पत्रकार मुह की खाते जा रहे हैं।इस सम्मिलित इकोचैंबर को ध्यान से देखें तो यह चुनावी राजनीति में जनता से खारिज किये जा रहे झुंड से कम नही है।
नीतिगत मोर्चे पर अपनी वैकल्पिक राजनीतिक स्वीकार्यता में सतत शिकस्त खाते इस झुंड ने अब किसी आसमानी सुल्तानी की तरह यह सोच लिया है कि आसमान से ही चमत्कार के लिए अब कोई आएगा और भाजपा को हराकर विपक्ष को सत्ता सौंप देगा।कॉकरोच जनता पार्टी इसी आसमानी इंतजार का एक नमूना है।जबसे पड़ोस के देशों में जेन जी नामकी छड़ी घूमी हैं तभी से विपक्ष को संसद और लोककल्याण मार्ग पर सपने में भी आंदोलनजीवी वह सब करते नजर आते हैं जो ढाका ,काठमांडू और कोलंबो में देखा गया है।यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि कॉकरोच जनता पार्टी के मुखिया ने यह नही कहा कि युवाओं के लिए उनका रोडमैप क्या है?आमआदमी पार्टी और सीजेपी की टूल कीट एक समान नजर आती है क्योंकि यह आंदोलन भी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के स्तीफ़े की एकमेव मांग पर टिका है। राहुल गांधी से लेकर सोनम वांगचुक और पत्रकारिता के चिन्हित चेहरों को ध्यान से देखें तो समझ आ जाता है कि टूल किट का कमांड सेंटर कहां है।
पुनश्च:संविधान की किताब लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के चीफ भी हवाई अड्डे से बाहर निकले हैं यही किताब लेकर राहुल गांधी भी मोहब्बत की दुकान खोलने निकलें थे।इस किताब की प्रेरणा लाल किताब में छिपी है जो भारत में कभी मैग्सेसे कभी नोबेल कभी बुकर जैसे पुरुस्कार देकर केजरीवाल, सिसोदिया जैसे चेहरे खड़े करती है।कभी हर्ष मन्दर और मेघा पाटकर को सर्वहारा का मसीहा बनाते हैं। भारत ने अपने आधुनिक लोकतांत्रिक इतिहास में सब कुछ स्वीकार किया है लेकिन एंटी इंडिया फोर्सेज को नही।जेन जी एक बार व्यवस्था से नाराज हो सकता है लेकिन भारत से नही।कोकरोच भारत के संस्थागत और ऐतिहासिक लोकतंत्र के साथ प्रतीकात्मक मजाक भी है इसे देश समझ रहा है।