11 या 12 जून, कब है परमा एकादशी 11 या 12 जून? दूर करें कंफ्यूजन, जानें सही तिथि और शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग में अधिकमास में आने वाली परमा एकादशी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यह भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना को समर्पित होती है। इस वर्ष परमा एकादशी की तिथि को लेकर श्रद्धालुओं के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कई लोग जानना चाहते हैं कि व्रत 11 जून को रखा जाए या 12 जून को। यदि आपके मन में भी यही सवाल है, तो पंचांग के अनुसार इसकी सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि यहां जान सकते हैं।
11 जून को रखा जाएगा परमा एकादशी व्रत
द्रिक पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अधिकमास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 10 जून 2026 की देर रात 12:57 बजे शुरू होगी और 11 जून 2026 की रात 10:36 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के आधार पर एकादशी व्रत रखा जाता है। चूंकि 11 जून को सूर्योदय के समय एकादशी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए परमा एकादशी का व्रत बुधवार, 11 जून 2026 को रखा जाएगा।
परमा एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त
व्रत तिथि: 11 जून 2026 (बुधवार) एकादशी तिथि प्रारंभ: 10 जून रात 12:57 बजे एकादशी तिथि समाप्त: 11 जून रात 10:36 बजे ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:02 बजे से 4:42 बजे तक शुभ उत्तम मुहूर्त: सुबह 5:23 बजे से 7:07 बजे तक अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:53 बजे से दोपहर 12:49 बजे तक लाभ-उन्नति मुहूर्त: दोपहर 12:21 बजे से 2:05 बजे तक पारण समय: 12 जून सुबह 5:23 बजे से 8:10 बजे तक
परमा एकादशी का धार्मिक महत्व
अधिकमास में आने वाली परमा एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करने तथा व्रत रखने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। मान्यता है कि यह व्रत मोक्ष, पुण्य, आर्थिक उन्नति और मानसिक शांति प्रदान करता है। परमा एकादशी का उल्लेख पद्म पुराण में भी मिलता है, जहां इसकी महिमा का विस्तार से वर्णन किया गया है।
परमा एकादशी पूजा विधि
परमा एकादशी के दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें। इसके बाद पूजा स्थल पर चौकी स्थापित कर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर रखें। पास में कलश स्थापित करें। भगवान को स्नान कराकर पीले वस्त्र, चंदन, पुष्प और तुलसी अर्पित करें। धूप-दीप जलाकर विष्णु सहस्रनाम, विष्णु मंत्र या एकादशी व्रत कथा का पाठ करें। अंत में आरती कर भगवान से सुख-समृद्धि और कल्याण की प्रार्थना करें।
अधिकमास की आखिरी एकादशी
परमा एकादशी अधिकमास की दूसरी और अंतिम एकादशी मानी जाती है। अधिकमास में दो विशेष एकादशियां आती हैं। इसमें शुक्ल पक्ष की पद्मिनी एकादशी और कृष्ण पक्ष की परमा एकादशी। इसलिए धार्मिक दृष्टि से इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। ऐसे में श्रद्धालु 11 जून को श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना कर सकते हैं।