निर्जला एकादशी पर बन रहा दुर्लभ नवपंचम योग, इन राशियों के लिए खुल सकते हैं तरक्की के रास्ते
आस्था और ज्योतिष का ऐसा संयोग हर साल देखने को नहीं मिलता। एक ओर निर्जला एकादशी का महापर्व, दूसरी ओर शुक्र और शनि की विशेष स्थिति। ऐसे में धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ ज्योतिषीय गणनाओं पर नजर रखने वाले लोगों के लिए यह दिन खास महत्व लेकर आया है।
इस बार निर्जला एकादशी सिर्फ व्रत और पूजा तक सीमित नहीं है। ग्रहों की चाल एक ऐसे योग का निर्माण कर रही है जिसे करियर, धन और सामाजिक प्रतिष्ठा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शुक्र और शनि का नवपंचम योग कई राशियों के लिए सकारात्मक संकेत दे सकता है।
निर्जला एकादशी का विशेष संयोग
ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी 25 जून 2026 को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता है कि इस एक व्रत का फल वर्षभर की सभी एकादशियों के बराबर माना जाता है। एकादशी तिथि 24 जून की रात 8:09 बजे शुरू होकर 25 जून की रात 9:14 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर व्रत 25 जून को रखा जाएगा, जबकि पारण 26 जून की सुबह 5:25 बजे से 8:13 बजे के बीच किया जाएगा।
शुक्र और शनि की चाल ने बढ़ाई अहमियत
इस वर्ष की निर्जला एकादशी पर शुक्र और शनि के बीच नवपंचम योग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में शुक्र को सुख, वैभव और भौतिक संसाधनों का कारक माना जाता है, जबकि शनि कर्म, अनुशासन और न्याय का प्रतिनिधित्व करते हैं। दोनों ग्रहों का यह विशेष संबंध जीवन में संतुलित प्रगति और मेहनत के बेहतर परिणामों का संकेत माना जा रहा है।
इन राशियों को मिल सकता है लाभ
ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार तुला, धनु, मकर, कुंभ और मीन राशि के जातकों के लिए यह योग अपेक्षाकृत अधिक शुभ माना जा रहा है। तुला राशि के लोगों को करियर और आर्थिक क्षेत्र में अवसर मिल सकते हैं। धनु राशि के अटके कार्य आगे बढ़ सकते हैं। मकर राशि के लिए वित्तीय स्थिरता के संकेत हैं, जबकि कुंभ राशि को सहयोगियों और मित्रों से लाभ मिलने की संभावना है। मीन राशि के लोगों की नेतृत्व क्षमता और कार्यक्षेत्र में प्रभाव बढ़ सकता है।
विष्णु पूजा का रहेगा विशेष महत्व
निर्जला एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा को अत्यंत फलदायी माना गया है। श्रद्धालु ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर पीले वस्त्र धारण करते हैं। इसके बाद भगवान विष्णु का पंचामृत और शुद्ध जल से अभिषेक कर तुलसी दल, चंदन, अक्षत और पीले पुष्प अर्पित किए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप इस दिन विशेष पुण्यदायी माना जाता है।
दान और सेवा से बढ़ेगा पुण्य
निर्जला एकादशी का संबंध केवल उपवास से नहीं बल्कि सेवा और संयम से भी जोड़ा जाता है। जलदान, जरूरतमंदों को भोजन या दक्षिणा देना तथा पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था करना इस दिन के प्रमुख धार्मिक कार्यों में शामिल है। मान्यता है कि पारण से पहले किया गया दान विशेष फल प्रदान करता है। इसी कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस दिन सामाजिक और धार्मिक सेवा गतिविधियों में भी भाग लेते हैं।
आस्था के साथ बढ़ेगी ज्योतिषीय चर्चा
धार्मिक पर्वों के दौरान ग्रहों की विशेष स्थितियां अक्सर लोगों का ध्यान खींचती हैं। इस बार निर्जला एकादशी पर बना नवपंचम योग भी आने वाले दिनों में ज्योतिषीय चर्चाओं का केंद्र रह सकता है। आस्था, पूजा और ग्रहों के इस दुर्लभ संयोग ने 25 जून को धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से वर्ष के महत्वपूर्ण दिनों में शामिल कर दिया है।