महाशिवरात्रि पर उज्जैन के महाकाल मंदिर के गर्भगृह

महाशिवरात्रि पर महाकाल के पट 44 घंटे खुले रहेंगे, उज्जैन में उमड़ेगा श्रद्धालुओं का सैलाब

महाकालेश्वर मंदिर में इन दिनों दस दिवसीय शिवनवरात्रि उत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। तिथि वृद्धि के कारण इस बार नौ की बजाय दस दिनों तक आयोजन हो रहा है। शुक्रवार को उत्सव का आठवां दिन रहा, जबकि रविवार को महाशिवरात्रि पर्व पूरे वैभव के साथ मनाया जाएगा।

भस्मार्ती से खुले पट, 44 घंटे दर्शन का अवसर

महाशिवरात्रि के दिन रविवार तड़के भस्मार्ती के साथ मंदिर के पट खोले जाएंगे, जो सतत 44 घंटे तक खुले रहेंगे। इस दौरान श्रद्धालुओं को बिना व्यवधान दर्शन का अवसर मिलेगा। सोमवार को वर्ष में एक बार दोपहर में होने वाली भस्मार्ती भी इसी क्रम में सम्पन्न होगी।

दैनिक पूजन और रुद्र पाठ का विशेष क्रम

शिवनवरात्रि के दौरान प्रतिदिन भगवान चंद्रमौलेश्वर और कोटेश्वर का विधिवत पूजन किया जा रहा है। भगवान को केसर-चंदन का उबटन और हल्दी अर्पित की जा रही है। दोपहर में 11 ब्राह्मणों द्वारा गर्भगृह में एकादश एकादशनी रुद्र पाठ किया जा रहा है।

नित्य बदलते श्रृंगार, अलग-अलग स्वरूपों में दर्शन

शासकीय पुजारी पं. घनश्याम शर्मा के नेतृत्व में सायंकाल भगवान महाकालेश्वर को नवीन वस्त्र धारण कराए जा रहे हैं और प्रतिदिन अलग-अलग स्वरूपों में श्रृंगार किया जा रहा है। यह श्रृंगार क्रम 14 फरवरी तक लगातार चलेगा।

महाशिवरात्रि पर अखंड अभिषेक और रात्रि पूजन

15 फरवरी को महाशिवरात्रि पर्व पर सम्पूर्ण दिवस सतत जलधारा से भगवान महाकालेश्वर का अभिषेक होगा। पूरी रात विशेष महापूजन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देशभर से आए श्रद्धालु साक्षी बनेंगे।

वर्ष में एक बार दोपहर की भस्मार्ती

महाशिवरात्रि के दूसरे दिन 16 फरवरी को प्रातः भगवान का सप्तधान श्रृंगार और सवामन पुष्प मुकुट दर्शन होंगे। इसके बाद सेहरा आरती की जाएगी। इसी दिन दोपहर 12 बजे वर्ष में एक बार होने वाली विशेष भस्मार्ती सम्पन्न होगी।

पंचमुखारविंद दर्शन के साथ समापन

18 फरवरी को सायं पूजन से शयन आरती तक भगवान महाकालेश्वर के पंचमुखारविंद के दर्शन होंगे। इसके साथ ही दस दिवसीय शिवनवरात्रि उत्सव का विधिवत समापन होगा।

आठवें दिन उमा-महेश स्वरूप में सजे महाकाल

शिवनवरात्रि के आठवें दिन शुक्रवार को सायंकाल भगवान महाकालेश्वर का उमा-महेश स्वरूप में विशेष श्रृंगार किया गया। प्रातः भस्मार्ती के बाद चंद्रमौलेश्वर और कोटेश्वर महादेव का पूजन-अभिषेक हुआ। दोपहर में गर्भगृह में रुद्राभिषेक पाठ और सायंकाल नवीन वस्त्रों में श्रृंगार कर भक्तों को दर्शन कराए गए।