मां बगलामुखी अवतरण दिवस: संकट हरने वाली देवी मां बगलामुखी, आस्था या अद्भुत शक्ति?
दतियाः शहर में इन दिनों आस्था का एक अलग ही रंग देखने को मिल रहा है, वजह है मां बगलामुखी का अवतरण दिवस। मंदिरों में भीड़ है, पीले वस्त्र, हल्दी की खुशबू और मंत्रोच्चार, सब कुछ एक साथ… कुछ लोगों के लिए ये सिर्फ परंपरा है, तो कुछ के लिए जीवन का सहारा भी। कहते हैं, जब हालात बिगड़ते हैं और रास्ते बंद दिखते हैं, तब भक्त मां बगलामुखी की शरण में जाते हैं। ये विश्वास कितना गहरा है, इसका अंदाज़ा भीड़ देखकर ही लगाया जा सकता है।
मां बगलामुखी क्यों मानी जाती हैं शत्रु नाशिनी
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां बगलामुखी को “शत्रु नाशिनी” कहा जाता है। यानी जो बुराई, विरोध या संकट है, उसे रोकने वाली शक्ति। ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि मां ने असुरों के अत्याचार से दुनिया को बचाया था। मां अपने भक्तों की शस्त्रुओं से रक्षा करती है, शहर के एक साधक मनोज गोस्वामी बताते हैं, “मां की साधना आसान नहीं है, लेकिन जो करता है उसे वो मिलता है जिसकी कल्आपना भी नहीं की जा सकती, और शायद यही सबसे बड़ी शक्ति है।”
मंत्र और साधना, कितना असर?
मां बगलामुखी से जुड़े मंत्रों को लेकर कहा जाता है कि नियमित जाप से मानसिक स्थिरता मिलती है, और विरोधियों से राहत भी… कुछ लोग बताते हैं कि विशेष अनुष्ठान, जैसे हल्दी से हवन या पीले वस्त्र धारण करना, उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए। वहीं कुछ लोगनियमित मां के दरबार में जप के लिए आते हैं।
देश में मां के मंदिर कम ही है मध्य प्रदेश में भी दतिया और आगर जिले के नलखेड़ा मे कुल दो मंदिर हैं इन दोनों जगह ही सुबह से ही लंबी कतारें देखी गईं। महिलाएं पीली साड़ी में, पुरुष माथे पर तिलक लगाए, हाथों में पूजा की थाली… मां की भक्ति जयकारें सुनाई दे रहे। एक श्रद्धालु ने कहा, “हम हर साल आते हैं, मां से बस यही मांगते हैं कि परिवार सुरक्षित रहे।” दूसरे ने कहा, “आज के समय में शांति मिल जाए वही बहुत है, बाकी तो मां पर छोड़ दिया।”
मां बगलामुखी की आराधना को लेकर लोगों में गहरी आस्था है और ऐसे अवसर भक्तों को जोड़ते हैं, एक उम्मीद देते हैं, और शायद यही वजह है कि हर साल ये भीड़ बढ़ती जा रही है।