सम्राट चौधरी बिहार के नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे ह

सम्राट चौधरी कौन हैं, जो बनने जा रहे हैं बिहार के BJP के पहले मुख्यमंत्री? जानिए पूरा राजनीतिक सफर

Bihar first BJP CM

बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। भाजपा विधायक दल की बैठक के बाद सम्राट चौधरी को एनडीए विधायक दल का नेता चुना गया है। इसके साथ ही यह लगभग तय हो गया है कि वे राज्य के नए मुख्यमंत्री होंगे।

इससे पहले जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार ने मंगलवार (14 अप्रैल 2026) को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद राज्य में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज हो गई। जानिए आखि कौन हैं सम्राट चौधरी जो बिहार में नीतीश की जगह संभालेंगे जिम्मेदारी।

राजनीतिक सफर की शुरुआत

सम्राट चौधरी ने वर्ष 1990 में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। शुरुआती दौर में उन्होंने कई चुनौतियों का सामना किया। वर्ष 1995 में एक मामले में वे जेल भी गए थे। जिसके बाद उनका राजनीतिक जीवन और अधिक चर्चाओं में आ गया।

पारिवारिक राजनीतिक पृष्ठभूमि

सम्राट चौधरी बिहार के मुंगेर जिले से आते हैं। उनके पिता शकुनी चौधरी राज्य की राजनीति के प्रमुख चेहरों में रहे हैं। वे सांसद और विधायक दोनों रह चुके हैं और समता पार्टी के संस्थापकों में शामिल थे। वहीं, सम्राट चौधरी 1999 में राबड़ी देवी सरकार में कृषि मंत्री बने थे। इसके बाद वे वर्ष 2000 और 2010 में परबत्ता सीट से विधायक चुने गए। राजनीतिक अनुभव के साथ उनकी पकड़ लगातार मजबूत होती गई।

दल बदल और राजनीतिक उतार-चढ़ाव

लंबे समय तक राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) में रहने के बाद वे 2014 में जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) में शामिल हुए। बाद में वे जीतन राम मांझी की सरकार में मंत्री भी बने।

भाजपा में एंट्री और बढ़ता कद

वर्ष 2018 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थामा। इसके बाद पार्टी संगठन में उनकी भूमिका लगातार बढ़ती गई। वे बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं और संगठनात्मक स्तर पर मजबूत नेता माने जाते हैं।

हालिया राजनीतिक स्थिति

वर्तमान में सम्राट चौधरी बिहार के उपमुख्यमंत्री हैं और गृह विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वर्ष 2025 में उन्होंने तारापुर सीट से चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक स्थिति और मजबूत की।

नई जिम्मेदारी की ओर

अब एनडीए विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद उनके मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ माना जा रहा है। बुधवार को शपथ ग्रहण समारोह की संभावना जताई जा रही है, जिसके बाद वे आधिकारिक रूप से राज्य की कमान संभाल सकते हैं।