सूडान युद्ध से जुड़ा छत्तीसगढ़ की कंपनी का नाम, US ने रायपुर की SBL एनर्जी पर लगाया बैन
सूडान में जारी गृह युद्ध के बीच अब भारत की एक कंपनी का नाम अंतरराष्ट्रीय विवाद में आ गया है। अमेरिका ने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित SBL एनर्जी लिमिटेड पर प्रतिबंध लगाते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। इस कार्रवाई में कंपनी के सीईओ समेत कुल 8 व्यक्तियों और संस्थाओं को निशाने पर लिया गया है।
अमेरिकी वित्त विभाग का दावा है कि कंपनी ने सूडान में सक्रिय सैन्य नेटवर्क को विस्फोटक सामग्री की सप्लाई की, जिसका इस्तेमाल संघर्ष में हुआ। वहीं कंपनी ने इन आरोपों को पूरी तरह गलत बताते हुए सबूत पेश करने की बात कही है।
अमेरिका की कार्रवाई से बढ़ा अंतरराष्ट्रीय विवाद
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अनुसार, SBL एनर्जी और उससे जुड़े नेटवर्क पर यह कार्रवाई सूडान में चल रहे गृहयुद्ध से जुड़े सपोर्ट सिस्टम को रोकने के लिए की गई है। आरोप है कि कंपनी ने एक सूडानी संस्था को विस्फोटक और संबंधित सामग्री की कई खेप भेजीं, जिनका उपयोग संघर्ष में हुआ। इस कदम के बाद कंपनी और उसके अधिकारियों की वैश्विक वित्तीय गतिविधियों पर सीधा असर पड़ा है।
कंपनी ने आरोपों को बताया गलत
SBL एनर्जी ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि वह केवल भारत सरकार से लाइसेंस प्राप्त औद्योगिक विस्फोटक बनाती है, जिनका उपयोग खनन और निर्माण कार्यों में होता है। कंपनी का कहना है कि वह किसी भी सैन्य या रक्षा उपयोग वाली सामग्री की सप्लाई नहीं करती। CEO आलोक चौधरी ने यह भी दावा किया कि 200 खेप भेजने की बात गलत है और वास्तविक संख्या इससे कहीं कम है।
प्रतिबंध से कंपनी पर वैश्विक असर
अमेरिकी प्रतिबंध के बाद SBL एनर्जी और उसके CEO की अमेरिका में मौजूद सभी संपत्तियां फ्रीज कर दी गई हैं। साथ ही किसी भी अमेरिकी व्यक्ति या संस्था को उनके साथ व्यापार करने से रोक दिया गया है। इस फैसले ने कंपनी की अंतरराष्ट्रीय कारोबारी गतिविधियों पर बड़ा असर डाल दिया है, हालांकि भारत में इसके संचालन पर प्रभाव को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
सूडान युद्ध की पृष्ठभूमि में बढ़ता तनाव
सूडान में 2023 से चल रहा गृह युद्ध लगातार गंभीर मानवीय संकट में बदल चुका है। सेना और अर्धसैनिक बलों के बीच संघर्ष के चलते लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लंबे समय से इस युद्ध में बाहरी हथियार सप्लाई और नेटवर्क की भूमिका पर चिंता जताता रहा है। इसी पृष्ठभूमि में अमेरिका ने यह कार्रवाई करते हुए कई देशों और संस्थाओं को सूची में शामिल किया है।