यूपी में 50 हजार बेटियों को फ्री स्कूटी देने की तैयारी, पहली बार वोट करने वाली छात्राओं पर सरकार का फोकस
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक और सामाजिक संदेश देने की तैयारी में है। राज्य की 50 हजार से ज्यादा मेधावी बेटियों को फ्री स्कूटी देने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है। इसके लिए सरकार ने 400 करोड़ रुपए का बजट भी तय कर दिया है।
खास बात यह है कि इस योजना का लाभ पाने वाली ज्यादातर छात्राएं 2027 विधानसभा चुनाव में पहली बार वोट डालेंगी। ऐसे में इसे सिर्फ छात्राओं को सुविधा देने वाली योजना नहीं, बल्कि महिला वोटर्स तक बड़ा संदेश पहुंचाने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।
पेट्रोल स्कूटी या EV? सरकार के सामने सबसे बड़ा सवाल
फिलहाल शासन स्तर पर इस बात को लेकर मंथन जारी है कि बेटियों को पेट्रोल स्कूटी दी जाए या इलेक्ट्रिक वाहन (EV)। सरकार के कई अधिकारी इलेक्ट्रिक स्कूटी के पक्ष में हैं। दरअसल, तर्क यह है कि EV स्कूटी से छात्राओं का रोजाना खर्च कम होगा। कॉलेज आने-जाने में पेट्रोल का बोझ नहीं पड़ेगा और परिवार पर आर्थिक दबाव भी कम रहेगा। हालांकि गांवों और छोटे कस्बों में चार्जिंग सुविधा को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। यही वजह है कि अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है। सरकार ऐसी स्कूटी खरीदने पर भी जोर दे रही है जो मजबूत, टिकाऊ और कम मेंटेनेंस वाली हो।
किन बेटियों को मिलेगा फायदा?
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय के मुताबिक योजना के पात्रता नियमों पर अभी चर्चा जारी है। दो बड़े बिंदुओं पर खास फोकस किया जा रहा है। पहला, क्या सिर्फ यूपी बोर्ड, CBSE और ICSE की टॉपर छात्राओं को शामिल किया जाए या फिर ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन में 75 प्रतिशत से ज्यादा अंक लाने वाली बेटियों को भी योजना का लाभ मिले।
दूसरा, सरकार आय सीमा तय करने पर विचार कर रही है। यानी योजना का फायदा आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यम वर्गीय परिवारों की छात्राओं को प्राथमिकता के आधार पर दिया जा सकता है। अब समझिए, अगर यह मॉडल लागू होता है तो लाखों परिवारों के लिए यह योजना राहत बन सकती है, खासकर उन बेटियों के लिए जिन्हें पढ़ाई के लिए रोज लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
चुनाव से पहले महिला वोटर्स पर बड़ा फोकस
यूपी में कुल 13.40 करोड़ वोटर हैं, जिनमें 6 करोड़ से ज्यादा महिलाएं शामिल हैं। ऐसे में भाजपा सरकार महिला मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि स्कूटी योजना के जरिए सरकार “बेटी शिक्षा” और “महिला सशक्तिकरण” का संदेश देने की कोशिश कर रही है। साथ ही विपक्ष को यह कहने का मौका भी नहीं देना चाहती कि चुनावी वादे पूरे नहीं हुए।
दरअसल, भाजपा ने 2022 विधानसभा चुनाव के दौरान अपने संकल्प पत्र में ‘रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी वितरण योजना’ का वादा किया था। हालांकि नियम तय न होने की वजह से 2025-26 का बजट लैप्स हो गया था। अब नए वित्तीय वर्ष में दोबारा 400 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
स्कूटी के साथ टैबलेट और स्मार्टफोन
फिलहाल सरकार सिर्फ स्कूटी योजना तक सीमित नहीं रहना चाहती। ‘विवेकानंद छात्र सशक्तिकरण योजना’ के तहत चुनाव से पहले 25 लाख से ज्यादा टैबलेट और स्मार्टफोन बांटने की तैयारी भी चल रही है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 60 लाख से ज्यादा डिवाइस बांटे जा चुके हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में छात्राओं और युवाओं को लेकर सरकार की योजनाएं चुनावी चर्चा का बड़ा हिस्सा बन सकती हैं।