मुख्यमंत्री योगी ने यूपी में फार्मर रजिस्ट्री लागू

उत्तर प्रदेश में लागू होगी फार्मर रजिस्ट्री, CM योगी के सख्त निर्देश

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में किसानों के लिए नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फार्मर रजिस्ट्री को पूरे प्रदेश में लागू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी पात्र किसानों को योजनाओं से जोड़ने पर विशेष जोर दिया है।

ग्राम पंचायत स्तर पर होंगे विशेष शिविर

बुधवार को सरकारी आवास पर हुई समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हर ग्राम पंचायत में विशेष शिविर लगाकर किसानों का पंजीकरण किया जाए। उद्देश्य है कि कोई भी पात्र किसान इस व्यवस्था से बाहर न रहे।

इस प्रणाली में विकसित होगी रजिस्ट्री

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि फार्मर रजिस्ट्री को एकीकृत लाभ वितरण प्रणाली बनाया जा रहा है। इसके तहत कृषि विभाग समेत अन्य विभागों की योजनाओं को एक प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। इससे किसानों को एक पहचान के आधार पर सभी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।

योजनाओं में त्रुटियां सुधारने के निर्देश

सीएम ने अधिकारियों को लाभार्थियों के रिकॉर्ड दुरुस्त करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और फसल बीमा योजना में त्रुटियों को ठीक किया जाए। आधार लिंकिंग के जरिए नाम और दस्तावेजों का सुधार प्राथमिकता से किया जाएगा।

किसान पहचान पत्र भी होगा अनिवार्य

मुख्यमंत्री ने प्रत्येक पात्र किसान का किसान पहचान पत्र बनवाने के निर्देश दिए हैं। इससे योजनाओं का लाभ देने में पारदर्शिता और आसानी सुनिश्चित होगी। साथ ही वितरण प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी। कृषि विभाग को आवश्यक तकनीकी व्यवस्था समय पर तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकारी पोर्टल को 1 मई 2026 तक पूरी तरह क्रियाशील बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे लाभार्थियों का चयन और वितरण प्रक्रिया डिजिटल हो जाएगी।

अन्य विभागों को भी दिए गए निर्देश

उद्यान, पशुपालन, मत्स्य, सहकारिता और लघु सिंचाई विभागों को भी जिम्मेदारी दी गई है। इन विभागों को 31 मई 2026 तक अपनी तैयारियां पूरी करने के लिए कहा गया है। सभी विभाग मिलकर एक समान व्यवस्था लागू करेंगे।

किसानों को मिलेगा सीधा और सरल लाभ

सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से किसानों को योजनाओं का लाभ आसानी से मिलेगा। जटिल प्रक्रियाएं खत्म होंगी और पारदर्शिता बढ़ेगी। साथ ही संसाधनों का सही और लक्षित उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।